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Monday, May 4, 2020



_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 72}*_
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_*💫दुरूद शरीफ़ और मुफीद दुआयें*_

_*👉( 15 ) आईना देख कर पढ़े*_
_*“ अल्हम्दु लिल्लाहि अल्लाहुम्म कमा हस्सन त खल की फ़हस्सिन खुलकी "*_ 

_*👉( 16 ) जब किसी को रुखसत करे तो यह दुआ पढ़े*_
_*" अस्तौ दि उल्लाह दी न क व अमा न त क व खवाती म अ म लि को सफ़र में जाते वक़्त अहबाब व अइज़्जा से रुखसत होते वक़्त कहे*_
_*“ अस्तौदि उ कुमुल्ला हल्लजी ला युजीउ व दाइअह "*_ 

_*👉( 17 ) वक़्ते सफ़र यह दुआ पढ़े*_ 

*"अल्लाहुम्म बि क असूलु व बि क अहूलु व बि क असीरु ” जब सफ़र पर रवाना हो जाये तो यह दुआ पढ़े ।*_

_*" अल्लहुम्म इन्न नस्अलु क फ़ो स फ रिना हाजल बिर्र वत्तक़वा | व मिनल अ म लि मा तिरजा "*_

_*फिर यह दुआ पढ़े*_

 _*अल्लाहुम्म हव्विन अलयना हाजस्स फ़ र वत विअन्ना बुअ्दहू अल्लाहुम्म अन्तर साहि बु फ़िस्सफ़रि वल खलीफतु फिल अहलि अल्लाहुम्म इन्नी अऊजु बि क मिव व असाइस्स फ़ रि व कआ बतिल मन जरि व सूइल मुन कल बि फ़िल मालि वल अलि वल व ल दि " ।*_ 

_*👉( 18 ) सफ़र से वापसी पर यह दुआ पढ़े*_
_*“ आइबू न ताइबू न आबिदू न लिरब्न्निा हामिदू न "*_ 

_*👉( 19 ) शहर में दाखिल होते वक्त पढ़े*_
_*“ अल्लाहुम्म बारिक लना फोहा " तीन बार “ अल्लाहुम्मरजुकना जनाहा व ह ब्बिना इला अहलिहा व ह ब्बिब सालिही अहलिहा इलयना "*_

_*👉( 20 ) जब मंजिल पर पहुंचे यह दुआ पढ़े*_
_*" रब्बि अनज़िलनी मुनज़लम्मुबारकन व अन त खयरुल्मुनज़िलीन "*_

_*👉( 21 ) आंधी और अंधेरे के वक़्त की दुआ*_
_*" अल्लाहुम्म इन्ना नस्अलु क मिन खयरि हाजिहिरीहि व खरि मा फीहा व खयरी मा उमिरत बिहिव नऊजुबिक मिन शरिहाजिहिरीहि व शरिमा फोहा व शरीमा उमिरतबिहि "*_

                    *📍समाप्त THE END*

 _*बिऔनिही तआला सुम्न बिऔनिरसू लिहिल अअला जल्ल जलालुहु व सल्लल्लाहु तआला अलैहि व सल्लम ।*_


_*📕अनवारे शरिअत सफा, 136//137//138*_
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_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 71}*_
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_*💫दुरूद शरीफ़ और मुफीद दुआयें*_

_*👉( 1 ) सल्लल्लाहु अलन्नबीयिल उम्मीयि व आलिही सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सलातौं वसलामन अलय क या रसूलुल्लाह ।*_
_*इस दुरूद शरीफ़ को बाद नमाज़ जुमा दस्त बस्ता मदीना मुनव्वरह की तरफ़ मुतवज्जिह होकर सौ बार पढ़े दीन व दुनियां की बेशुमार नेमतों से सरफ़राज़ हो ।*_

_*👉( 2 ) पहले दाहिना क़दम रखकर मस्जिद में दाखिल हो और यह दुआ पढ़े ।*_ 
_*“ अल्लाहुम्मफ़ तह ली अबवा ब रह मतिक "*_

_*👉( 3 ) पहले बांया कदम मस्जिद से निकाले और यह दुआ पढ़े ।*_
_*👉" अल्लाहुम्म इन्नी असअलु क मिन फ़जलि क व रहमतिक "*_

_*👉( 4 ) चांद देख कर यह दुआ पढ़े ।*_
_*“ अल्लाहुम्म अहिल्लहु अलयना बिल अम ने वल ईमान वस्सलामति वल इस्लाम रब्बी व रब्बुकललाहु या हिलाल ।*_

_*👉( 5 ) जब बुरा ख्वाब देखे और जग जाए तो तीन बार “ अऊजु बिल्लाहि मिनश्शयता निर्रजीम " पढ़े और तीन बार बायें तरफ थूके फिर सोना चाहे तो करवट बदल कर सोये ।*_ 

_*👉( 6 ) जब आसमान से तारा टूटता हुआ देखे तो निगाह नीची कर ले और यह दुआ पढ़े “ माशअल्लाहु लाहौ  ल वला कूवत इल्ला बिल्लाह ।*_

_*👉( 7 ) अंधे , लंगड़े और कोढ़ी वगैरा किसी मुसीबत ज़दा को देखे तो यह दुआ पढ़े । मगर आशेबे चश्म ( आंख उठना ) जुकाम और खारिश के मरीजों को देख कर यह दुआ न पढ़ें कि इन बीमारियों से बदन की इसलाह होती है वह दुआ यह है ।*_
_*“ अलहम्दु लिल्लाहिललजी आफानी मिम्मबतला क बिही व फ़ज्जलनी अला कसीरिम मिम्मन न ल क तफजीला "*_

_*👉( 8 ) जब सोना चाहें तो यह दुआ पढ़ें ।*_
_*“ अल्लाहुम्म बिइस्मिक अमूतु व अह या "*_ 

_*और दूसरे सभी अवराद से फ़ारिग होकर सूरये काफ़िरून पूरी पढ़े और खामोश सो जाए । उसके बाद अगर बात चीत की ज़रूरत पड़ जाए तो दोबारा फिर पूरी सूरह पढ़ ले ।*_


_*📕अनवारे शरिअत सफा, 134//135*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 70}*_
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_*💫दुरूद शरीफ़ और मुफीद दुआयें*_

_*👉( 1 ) सल्लल्लाहु अलन्नबीयिल उम्मीयि व आलिही सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम सलातौं वसलामन अलय क या रसूलुल्लाह ।*_
_*इस दुरूद शरीफ़ को बाद नमाज़ जुमा दस्त बस्ता मदीना मुनव्वरह की तरफ़ मुतवज्जिह होकर सौ बार पढ़े दीन व दुनियां की बेशुमार नेमतों से सरफ़राज़ हो ।*_

_*👉( 2 ) पहले दाहिना क़दम रखकर मस्जिद में दाखिल हो और यह दुआ पढ़े ।*_ 
_*“ अल्लाहुम्मफ़ तह ली अबवा ब रह मतिक "*_

_*👉( 3 ) पहले बांया कदम मस्जिद से निकाले और यह दुआ पढ़े ।*_
_*👉" अल्लाहुम्म इन्नी असअलु क मिन फ़जलि क व रहमतिक "*_

_*👉( 4 ) चांद देख कर यह दुआ पढ़े ।*_
_*“ अल्लाहुम्म अहिल्लहु अलयना बिल अम ने वल ईमान वस्सलामति वल इस्लाम रब्बी व रब्बुकललाहु या हिलाल ।*_

_*👉( 5 ) जब बुरा ख्वाब देखे और जग जाए तो तीन बार “ अऊजु बिल्लाहि मिनश्शयता निर्रजीम " पढ़े और तीन बार बायें तरफ थूके फिर सोना चाहे तो करवट बदल कर सोये ।*_ 

_*👉( 6 ) जब आसमान से तारा टूटता हुआ देखे तो निगाह नीची कर ले और यह दुआ पढ़े “ माशअल्लाहु लाहौ  ल वला कूवत इल्ला बिल्लाह ।*_

_*👉( 7 ) अंधे , लंगड़े और कोढ़ी वगैरा किसी मुसीबत ज़दा को देखे तो यह दुआ पढ़े । मगर आशेबे चश्म ( आंख उठना ) जुकाम और खारिश के मरीजों को देख कर यह दुआ न पढ़ें कि इन बीमारियों से बदन की इसलाह होती है वह दुआ यह है ।*_
_*“ अलहम्दु लिल्लाहिललजी आफानी मिम्मबतला क बिही व फ़ज्जलनी अला कसीरिम मिम्मन न ल क तफजीला "*_

_*👉( 8 ) जब सोना चाहें तो यह दुआ पढ़ें ।*_
_*“ अल्लाहुम्म बिइस्मिक अमूतु व अह या "*_ 

_*और दूसरे सभी अवराद से फ़ारिग होकर सूरये काफ़िरून पूरी पढ़े और खामोश सो जाए । उसके बाद अगर बात चीत की ज़रूरत पड़ जाए तो दोबारा फिर पूरी सूरह पढ़ ले ।*_


_*📕अनवारे शरिअत सफा, 134//135*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 69}*_
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_*💫इस्लामी कलिमे🇸🇦*_

_*👉( 1 ) अव्वल कलिमये तैइब ।*_
_*ला इलाह इल्लल्लाहु मुहम्मदुर्रसूलुल्लाह ।*_

_*👉( 2 ) दूसरा कलिमये शहादत ।*_
 _*अश्हदु अल्ला इलाह इल्लल्लाहु व अश् हदु अन्न मुहम्मदन अब्दुहु व रसूलुह ।*_ 

_*👉( 3 ) तीसरा कलिमये तमजीद ।*_
_*सुबहानल्लाहि वल्हम्दुलिल्लाहि व लाइला ह इल्लल्लाहु वल्लाहु अकबर वला ही ल वला कूवत इल्ला बिल्लाहिल अलीयिल अजीम ।*_

_*👉( 4 ) चौथा कलिमये तौहीद ।*
_*लाइला - ह इल्लल्लाहु वहदहु ला शरी क लहू लहुल मुल्कु व लहुल हम्दु युह् यी व युमीतु व हु व हय्युल्लायमूतु बि यदि हिल खैरु व हुव अला कुल्लि शैइन कदीर ।*_
 
_*👉( 5 ) पांचवा कलिमये रद्दे कुफ्र ।*_
_*अल्लाहुम्म इन्नी अऊजु बिक मिन अन उशरिक बि क शै औं वअना अअलमु बिही व असतगफ़िरु क लिमाला अअलमु बिही तुब्तु अनहु वतबर्रातु मिनल कुफ़रि वश शिर कि वल मआसी कुल्लिहा व अस्लम्तु व आमन्तु व अकूल ला इलाह इल्लल्लाहुमुहम्मदुर्रसूलुल्लाह ।*_

_*💫ईमाने मुजमल ।*_

_*👉आमन्तु बिल्लाहि कमा हु व बि अस्माइहि व सिफ़ातिही व क़बिल्तु जमी अ अह कामिही ।*_

_*💫ईमाने मुफ़स्सल ।*_

_*👉आमन्तु बिल्लाहि व मलाइ क तिही व कुतु बिही व रुसुलिही वल योमिल आखिरि वल कदरि खैरिही व शररिही मिनल्लाहि तआला वल ब सि बदल मौत ।*_


_*📕अनवारे शरिअत सफा, 133//134*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 68}*_
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_*💫फातिहा का आसान तरीका*_

_*✨पहले तीन या पांच या सात बार दुरूद शरीफ पढ़े फिर कम से कम चारों कुल , सूरए फ़ातिहा और अलिफ़ लाम्मीम से मुफ़लिहू न तक पढ़े फिर आखिर में तीन या पांच या सात बार दुरूद शरीफ पढ़े और बारगाहे इलाही में हाथ उठा कर यूं दुआ करे या अल्लाह हमने जो कुछ दुरूद शरीफ पढ़ा है और कुरआन मजीद की आयतें तिलावत की हैं उनका सवाब ( अगर खाना या शीरीनी हो तो इतना और कहे कि इस खाना और शीरीनी का सवाब ) मेरी तरफ़ से हुजूर सरवरे कायनात सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम को नज्र पहुंचा दे फिर उनके वसीले से तमाम अंबियाये किराम अलैहिमुस्सलाम व सहाबा और तमाम औलिया व उलमा को अता फरमा ( फिर अगर किसी खास बुजुर्ग को सवाब पहुंचाना हो तो उनका नाम खुसूसियत से ले जैसे यूं कहे कि ) खुसूसन हज़रते गौसे पाक रज़ियल्लाहु तआला अन्हु या ख्वाजये अजमेरी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को नज़्र पहुंचा दे और फिर तमाम मूमिनीन व मूमिनात की अरवाह को सवाब अता फरमा । और किसी आम आदमी को सवाब पहुंचाना हो तो उसका ज़िक्र खुसूसियत से करे । जैसे यूं कहे कि खूसूसन हमारे वालिद , वालिदा या दादा , दादी या नाना नानी की रूह को सवाब पहुंचा दे और तमाम मोमिनीन व मोमिनात की रूहों को सवाब पहुंचा दे ।*_

_*"आमीन या रब्बल आलमीन बिरहमति क या अरहमरराहिमीन"।*_


_*📕अनवारे शरिअत सफा, 132*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 67}*_
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_*💫सोने का बयान*_

_*✨मुसमहब यह है कि बावजू सोये कुछ देर दाहिने करवट पर दाहिने हाथ को रूखसार (गाल) के निचे रख कर किबला की तरफ मुंह कर के सोये फिर उसके बाद बायें करवट पर ।पेट के बल न लेटे हदीस शरीफ में है कि इस तरह लेटने को अल्लाहा तआला पसन्द नहीं फरमाता । और पांव पर पांव रखना मना है जब कि चिट लेटा हो और यह उस सूरत मे हैं जबकि तहबन्द पहने हो और एक पांव खरा हो कि इस तरह बेसत्री (बेपरदगी) का अंदेशा खतरा हैं । और ऐसे छत पर सोना मना है कि जिस पर गिरने से कोई रोके न हो और लड़का जब दस साल का हो जाए तो अपनी मां या बहन वगैरा के साथ न सुलाया जाए । बल्कि इस उम्र का लड़का इतने बड़े लड़कों या मर्दो के साथ भी न सोये । और दिन के शुरू हिस्से मे सोना या मग़रिब व इशा के दरमियान सोना मकरूह हैं । और हमारे मुल्क (देश) मे उत्तर जानिब पांव फैला कर सोना। बिला शुबह जाइज़ हैं । उसे नाजाइज समझना गलती हैं । और जब सो कर उठे तो यह दुआं पढ़े ।*_

_*"अलहम्दु लिल्लाहिलज़ी अहयाना बाद मा अमा त ना व इलैहि नुशूर "*_


_*📕अनवारे शरिअत सफा, 131*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 66}*_
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_*✨लिबास ( पहनावा ) का बयान*_

_*✍🏻....इतना लिबास ज़रूर पहनें कि जिसे से सत्रे औरत हो जाये । औरतें बहुत बारीक और चुस्त कपड़ा हरगिज़ न पहनें कि जिससे बदन के हिस्से जाहिर हों कि औरतों को ऐसा कपड़ा पहनना हराम है और मर्द भी पाजामा या तहबन्द इतना हल्का न पहनें कि जिस से बदन की रंगत झलके और सतर ( झुपाव ) न हो कि मर्दो को भी ऐसा पाजामा व तहबन्द पहनना हराम है । और धोती न पहनें कि धोती पहनना हिन्दुओं का तरीका है और उससे सत्र भी नहीं होता कि चलने में रान का पिछला हिस्सा खुल जाता है । मुसलमानों को इस से बचना ज़रूरी है । और नैकर जांघिया हरगिज़ न पहनें कि हराम है । लेकिन तहबन्द वगैरा के नीचे पहनें तो कोई हर्ज नहीं ।*_

_*✨जीनत ( सिंगार ) का बयान*_

_*✍🏻....मर्दो को सोने की अंगूठी पहनना हराम है और चांदी की सिर्फ एक अंगूठी एक नग वाली जो वज़न में साढ़े चार माशा से कम हो पहन सकते हैं । और कई अंगूठी या एक अंगूठी या कई नग वाली या छल्ले नहीं पहन सकते कि नाजाइज़ है और औरतें सोना चांदी की हर किस्म की अंगूठियां और छल्ले पहन सकती हैं लेकिन दूसरी धातों की अंगूठियां जैसे तांबा , पीतल , लोहा और जस्ता वगैरा तो यह मर्द व औरत दोनों के लिए नाजाइज़ हैं । लड़कियों को सोने चांदी के जेवर पहनाना जाइज़ है । लड़कों को हराम है पहनाने वाले गुनाहगार होंगे । इसी तरह लड़कियों के हाथ पांव में मेंहदी लगाना जाइज है और लड़कों के हाथ पांव में जीनत के लिए मेंहदी लगाना नाजाइज़ है ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा, 129/130/131*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 65}*_
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                    _*🍱खाने का बयान*_

_*💫खाना खाने से पहले और बाद में दोनों हाथ गट्टों तक धोए । सिर्फ एक हाथ या सिर्फ उंगलियां न धोए कि सुन्नत अदा न होगी । खाने से पहले हाथ धोकर पोंछना मना है और खाने के बाद हाथ धोकर पोंछ ले कि खाने का असर बाक़ी न रहे बिस्मिल्लाह पढ़ कर खाना शुरू करें अगर शुरू में बिस्मिल्लाह पढ़ना भूल जाये तो जब याद आये यह दुआ पढ़े । “ बिस्मिल्लाहि फी अव्वलिही व आखिरिही " रोटी पर कोई चीज़ न रखी जाए और हाथ रोटी से न पोंछे । नंगे सर खाना अदब के खिलाफ़ है । खाना दाहिने हाथ से खायें बायें हाथ से खाना शैतान का काम है । खाने के वक्त बायां पांव बिछा दें और दाहिना खड़ा रखें या सुरीन ( पुट्ठा ) पर बैठे और दोनों घुटने खड़े रखे । खाने के वक़्त बातें करता रहे । बिल्कुल चुपचाप रहना मजूसियों का तरीका ‌है मगर बुरी बातें न बके बल्कि अच्छी बातें करें । खाने के बाद उंगलियां चाट ले और बर्तन को भी उंगलियों से पोंछ कर चाट ले । खाने की शुरूआत नमक से की जाए और खत्म भी उसी पर करे कि उस से बहुत सी बीमारियां खत्म हो जाती हैं । खाने के बाद यह दुआ पढ़े ।*_

_*🤲🏻अलहम्दु लिल्लाहिल्लजी अत अम ना व सकाना व कफ़ाना व ज अलना मिनल मुस्लिमीन ।*_

                  _*💧पीने का बयान*_

_*💧पानी बिस्मिल्लाह पढ़ कर दाहिने हाथ से पीये । बायें हाथ से पीना शैतान का काम है और तीन सांस में पीये हर मर्तबा बर्तन को मुंह से हटा कर सांस ले । पहली और दूसरी मर्तबा एक एक घुट पिये और तीसरी सांस में जितना चाहे पी डाले खड़े होकर पानी हरगिज़ न पीये । हदीस शरीफ में है कि जो शख्स भूलकर ऐसा कर डाले वह कै कर दे और पानी को चूस कर पीये गट गट गट बड़े घूंट न पीये जब पी चुके तो अलहम्दु लिल्लाह कहे । पीने के बाद गिलास वगैरा का बचा हुआ पानी फेंकना इसराफ़ व गुनाह है । सुराही में मुंह लगाकर पानी पीना मना है इसी तर लोटे की टोंटी से भी पानी पीना मना है मगर जब कि देख लिया हो कि उनमें कोई चीज नहीं है तो हर्ज नहीं ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा, 128/129*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 64}*_
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_*💫इद्दत का बयान*_

_*📝सवाल : - इद्दत कितने दिन की होती है ।*_

_*✍🏻जवाब : - बेवह ( विधवा ) औरत अगर हामिला हो तो उसकी इद्दत बच्चा पैदा होना है और अगर हामिला न हो तो उसकी इद्दत चार महीने दस दिन है । और तलाक़ वाली औरत अगर हामिला हो तो उसकी इद्दत भी बच्चा जनना है । और तलाक़ वाली औरत अगर आइसा यानी पचपन साला या नाबालिग हो तो उसकी इद्दत तीन माह है । और तलाक़ वाली औरत अगर हामिला , नाबालिग या पचपन साला न हो यानी हैज़ वाली हो तो उसकी इद्दत तीन हैज़ है । चाहे यह तीन हैज़ तीन माह या तीन साल या उससे ज्यादा में आये ।*_ 

_*📍नोट : - ( 1 ) तलाक़ वाली गैर मदखूला औरत यानी जिससे शौहर ने हमबिसतरी नहीं की है उसके लिए कोई इद्दत नहीं ।*_

_*( 2 ) अवाम में जो मशहूर है कि तलाक़ वाली औरत की इद्दत तीन महीने तेरह दिन है तो यह बिल्कुल गलत और बे बुनियाद है । जिसकी शरीअत में कोई अस्ल नहीं ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा, 127/128*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत {पोस्ट न. 63}*_
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_*📑तलाक़ का बयान*_

_*📝सवाल : - तलाक़ किसे कहते हैं ?*_

_*✍🏻जवाब : - औरत निकाह से शौहर की पाबन्द हो जाती है उस पाबन्दी के उठा देने को तलाक़ कहते हैं ।*_

_*📝सवाल : - तलाक़ देना कैसा है ?*_

_*✍🏻जवाब : - तलाक़ देना जाइज़ है लेकिन बगैर वजहे शरयी मना है । और वजहे शरयी हो तो तलाक देना मुबाह है बल्कि अगर औरत शौहर को या दूसरों को तकलीफ़ देती हो या नमाज़ न पढ़ती हो तो तलाक देना मुसतहब है । और अगर शौहर नामर्द हो या उस पर किसी ने जादू कर दिया हो कि हमबिस्तरी ( सम्भोग ) नहीं कर पाता और उसके दूर करने की भी कोई सूरत नज़र नहीं आती तो इन सूरतों में तलाक़ देना वाजिब है । अगर तलाक़ नहीं दी तो गुनाहगार होगा ।*_

_*📝सवाल : - तलाक देने का बेहतरीन तरीका क्या है ?*_

_*✍🏻जवाब : - तलाक देने का बेहतरीन तरीका यह है कि जिस तुहर में हमबिस्तरी ( सम्भोग ) न की हो उसमें एक तलाक रजयी दे और औरत के करीब न जाए यहां तक कि इद्दत गुज़र जाए । और एक तलाके बाइन दे तो भी जाइज़ है और अगर औरत मदखूला हो यानी शौहर उससे हमबिस्तरी ( सम्भोग ) कर चुका हो तो तीन तलाक़ न दे कि इस सूरत में बगैर हलाला दोबारा निकाह न होगा । और अगर शौहर ने उससे हमबिसतरी नहीं की है तो इन लफ़्ज़ों के साथ तलाक न दे कि मैंने उसे तीन तलाक़ दी या तलाके मुग़ल्ल्ज़ा दी कि इस सूरत में वह भी बगैर हलाला तलाक़ देने वाले के लिए हलाल न होगी ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा, 126/127*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत पोस्ट न. 62}*_
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_*💞निकाह का बयान 💞*_

_*📝सवाल : - निकाह करना कैसा है ?*_

_*✍🏻जवाब : - जो शख्स नान व नफका की कुदरत रखत हो अगर उसे यक़ीन हो कि निकाह नहीं करेगा तो गुनाह में मुबतिला हो जाएगा तो ऐसे शख्स को निकाह करना फ़र्ज है । और अगर गुनाहगार का यकीन नहीं बल्कि सिर्फ ख़तरा है तो निकाह करना वाजिब है । और शहवत ( लालसा ) का बहुत ज़्यादा ग़लबा न हो तो निकाह करना सुन्नते मुअक्कदा है । और अगर इस बात का खतरा है कि निकाह करेगा तो नान व नफका न दे सकेगा या निकाह के बाद जो फ़राइज़ मुतअल्लिका हैं उन्हें पूरा न कर सकेगा तो निकाह करना मकरूह है । और इन बातों का खतरा ही नहीं बल्कि यकीन हो तो निकाह करना हराम है ।*_

_*📝सवाल : - किन औरतों से निकाह करना हराम है ?*_

_*✍🏻जवाब : - मां , बेटी , बहिन , फूफी , खाला , भतीजी , भांजी , दूध पिलाने वाली मां , दूध शरीकी बहिन , सास , मदखूला बीवी की बेटी , नसबी बेटा की बीवी , दो बहनों को इकट्ठा करना , शौहर वाली औरत , काफिरा अस्लीया और मुरतद्दा वहाबीया इन सब से निकाह हराम है । इस मसअला की मजीद तफ़सील बहारे शरीअत वगैरा से मालूम करें ।*_

_*📝सवाल : - अगर लड़की - लड़का नाबालिग हों तो निकाह कैसे होगा ?*_

_*✍🏻जवाब : - अगर नाबालिग हों तो उनके वली की इजाज़त से होगा ।*_

_*📝सवाल : - वली होने का हक़ किसको है ?*_

_*✍🏻जवाब : - अगर औरत मजनून ( पागल ) है और बेटे वाली है तो उस के बेटे को वली होने का हक है । फिर उस के पोता परपोता वगैरा को । अगर यह न हों या जिसका निकाह है वह नाबालिग हो तो बाप वाली होगा । अगर यह न हो तो दादा फिर परदादा वगैरहुम । फिर हक़ीकी भाई । फिर सौतेला भाई फिर हक़ीकी भाई का बेटा फिर सौतेले भाई का बेटा । फिर हकीकी चचा फिर सौतेला चचा । फिर हकीकी चाचा का बेटा फिर सौतेला चाचा का बेटा । फिर बाप का हक़ीकी चाचा फिर सौतेले चाचा फिर बाप के हकीकी चाचा का बेटा फिर सौतेले चाचा का बेटा । खुलासा यह कि उस खानदान में सब से ज़्यादा करीब का रिश्तेदार जो मर्द हो वही वली होगा । और अगर यह सब न हों तो मां वली हैं । फिर दादी फिर नानी फिर बेटी फिर पोती वगैरा फिर नाना ।*_

_*💫निकाह पढ़ाने का तरीका*_💫

 _*📝सवाल : - निकाह पढ़ने का तरीका क्या है ?*_

_*✍🏻जवाब : - निकाह पढ़ने का बेहतर तरीका यह है कि दुल्हन अगर बालिग हो तो निकाह पढ़ने वाला दुल्हन से वर्ना उसके वली से इजाजत लेकर मज्लिसे निकाह में आये । दूल्हा को पांचो कलिमे या कलिमये तय्यिबा और ईमाने मुजमल व मुफ़स्सल पढ़ाये फिर खड़े होकर खुतबये निकाह पढ़े और बैठ कर पढ़ना भी जाइज़ है । फिर दूल्हा की तरफ़ मुखातिब हो कर यूं कहे कि मैंने बहैसियत वकील फुलां बिन्ते फुलां ( जैसे हिन्दा बिन्ते जैद ) को इतने महर के बदले आपके निकाह में दिया क्या आपे ने कुबूल किया । जब दूल्हा कबूल कर ले तो निकाह पढ़ने वाला दूल्हा दुल्हन के दरमियान उल्फ़त व मुहब्ब्त की दुआ करे ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा,123/124/125/126*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत पोस्ट न. 61}*_
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_*💫रोज़ा के मकरूहात💫*_

 _*📝सवाल : - किन चीजों से रोज़ा मकरूह हो जाता है ?*_

_*✍🏻जवाब : - झूट , गीबत , चुगली , गाली देने , बेहूदा बात करने और किसी को तकलीफ़ देने से रोज़ा मकरूह हो जाता है ।*_

_*📝सवाल : - क्या रोज़ादार को कुल्ली करने के लिए मुंह भर पानी  लेना मकरूह है ?*_

_*✍🏻जवाब : - हां रोज़ादार को कुल्ली करने के लिए मुंह भर पानी लेना मकरूह है ।*_

_*📝सवाल : - क्या रोज़ा की हालत में खुश्बू सूंघना , तेल मालिश करना और सुर्मा लगाना मकरूह है ?*_ 

_*✍🏻जवाब : - नहीं रोज़ा की हालत में खुश्बू सूंघना , तेल मालिश करना और सुर्मा लगाना मकरूह नहीं । मगर मर्दो को ज़ीनत के लिए सुर्मा लगाना हमेशा मकरूह है और रोज़ा की हालत में बदरजए औला ( ज़रूर ) मकरूह है ।*_

_*📝सवाल : - क्या रोज़ा में मिसवाक करना मकरूह है ?*_

_*✍🏻जवाब : - नहीं । रोज़ा में मिसवाक करना मकरूह नहीं बल्कि जैसे और दिनों में मिसवाक करना सुन्नत है वैसे ही रोज़ा में भी मिसवाक करना मसनून है । चाहे मिसवाक खुश्क हो या तर ( गीली ) और ज़वाल से पहले करे या बाद में किसी वक़्त मकरूह नहीं ।*_


_*📕अनवारे शरिअत सफा,122/123*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत पोस्ट न. 60}*_
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_*💫रोज़ा तोड़ने और न तोड़ने वाली चीजों का बयान*_

_*📝सवाल : - किन चीजों से रोजा टूट जाता है ?*_

_*✍🏻जवाब : - खाने पीने से रोजा टूट जाता है जबकि रोज़ादार होना याद हो और हुक्का बीड़ी सिगरेट वगैरा पीने और पान या सिर्फ तम्बाकू खाने से भी बशर्ते कि याद हो रोज़ा जाता रहता है । कुल्ली करने में बिला इरादा पानी हलक से उतर गया या नाक में पानी चढ़ाया और दिमाग तक चढ़ गया या कान में तेल टपकाया या नाक में दवा चढ़ाई अगर रोज़ादार होना याद है तो रोज़ा टूट गया वर्ना नहीं । क़सदन ( जान बूझकर ) मुंह भर कै की और रोज़ादार होना याद है तो रोज़ा जाता रहा । और मुंह भर न हो तो नहीं । और अगर बिला इख्तियार कै हो और मुंह भर न हो तो रोज़ा गया और अगर मुंह भर हो तो लौटाने कि सुरत में जाता रहा वर्ना नहीं ।*_

_*📝सवाल : - किन चीज़ों से रोज़ा नहीं टूटता ।*_

_*✍🏻जवाब : - भूलकर खाने पीने से रोज़ा नहीं टूटता , तेल या सुर्मा लगाने और मक्खी , धुंवा या आटे वगैरा का गुबार ( गर्दा ) हलक में जाने से रोज़ा नहीं जाता , कुल्ली की और पानी बिल्कुल उगल दिया सिर्फ कुछ तरी मुंह में बाकी रह गयी थी थूक के साथ उसे निगल गया या कान में पानी चला गया या खंकार मुंह में आया और खा गया अगरचे कितना ही हो रोजा न जायेगा । इहतिलाम ( स्वप्नदोष ) हुआ या गीबत ( चुगली ) की तो रोज़ा न गया अगरचे गीबत सख्त कबीरा ( बड़ा ) गुनाह है । और जनाबत ( नापाकी ) की हालत में सुबह की बल्कि अगरचे सारे दिन जुनुब ( नापाक ) रहा रोजा न गया । मगर इतनी देर तक जान बूझकर गुस्ल न करना कि नमाज़ क़ज़ा हो जाए गुनाह और हराम है ।*_


_*📕अनवारे शरिअत सफा,121/122*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत पोस्ट न. 59}*_
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_*💫रोजा का बयान💫*_

_*📝सवाल : - रोज़ा किसे कहते हैं ?*_

_*✍🏻जवाब : - सुबह सादिक़ से गुरूबे आफ़ताब ( सूर्य अस्त ) तक नीयत के साथ खाने , पीने और जिमा ( संभोग ) से रुकने का नाम रोज़ा है ।*_

_*📝सवाल : - रमज़ान शरीफ के रोजे किन लोगों पर फर्ज हैं ?*_

_*✍🏻जवाब : - रमज़ान शरीफ के रोजे हर मुसलमान आक़िल बालिग मर्द और औरत पर फ़र्ज़ हैं । उनकी फ़रज़ीयत का इन्कार करने वाला काफ़िर और बिला उज़्र छोड़ने वाला सख्त गुनाहगार और फ़ासिक मरदूदुश्शहादत है । और बच्चा की उम्र जब दस साल हो जाये और उसमें रोज़ा रखने की ताक़त हो तो उस से रोज़ा रखवाया जाए और न रखे तो मार कर रखवायें ।*_

_*📝सवाल : - किन सूरतों में रोज़ा न रखने की इजाज़त है ?*_

_*✍🏻जवाब : - जिन सूरतों में रोजा न रखने की इजाजत है उनमें से बाज़ यह हैं ( 1 ) सफ़र यानी तीन दिन की राह के इरादा से बाहर निकलना लेकिन अगर सफ़र में मशक्कत न हो तो रोज़ा रखना अफ़ज़ल है ।*_

_*👉🏻( 2 . 3 ) हामिला और दूध पिलाने वाली औरत को अपनी जान या बच्चा का सही अंदेशा हो तो इस हालत में रोज़ा न रखने की इजाज़त है ।*_

_*👉🏻( 4 ) मर्ज़ यानी मरीज़ को मर्ज बढ़ जाने या देर में अच्छा होने या दन्दुरुस्त को बीमार हो जाने का गालिब गुमान हो तो उस दिन रोजा न रखना जाइज़ है ।*_

_*👉🏻( 5 ) शैखे फानी यानी वह बूढ़ा कि न अब रोज़ा रख सकता है और न आइन्दा उसमें इतनी ताक़त आने की उम्मीद है कि रख सकेगा तो उसे रोज़ा न रखने की इजाजत है । और हैज़ व निफास की हालतों में रोजा रखना जाइज़ नहीं ।*_

_*📝सवाल : - क्या ऊपर बयान किए हुए लोगों को बाद में रोजा की क़ज़ा करना फर्ज हैं ?*_

_*✍🏻जवाब : - हां उज़्र खत्म हो जाने के बाद सब लोगों को रोजा की क़ज़ा करना फर्ज है और शैखे फानी अगर जाड़ों में कजा रख सकता है तो रखे वर्ना हर रोजा के बदले दोनों वक़्त एक मिसकीन को पेट भर खाना खिलाए या हर रोज़ा के बदले सदकए फ़ित्र की मिकदार मिसकीन को दे दे ।*_

_*📝सवाल : - जिन लोगों को रोज़ा न रखने की इजाज़त है क्या वह किसी चीज़ को अलानियह खा पी सकते हैं ?*_

_*✍🏻जवाब : - नहीं । उन्हें भी अलानियह किसी चीज़ को खाने पीने की इजाजत नहीं ।*_

_*📝सवाल : - रमज़ान के रोजे की नीयत किस तरह की जाती है ?*_

_*✍🏻जवाब : - नीयत दिल के इरादा का नाम है मगर जुबान से कह लेना मुसतहब है अगर रात में नीयत करे तो यूं कहे नवैतु अन असू म ग़दन लिल्लाहि तआला मिन फरजि रमज़ान और दिन में नीयत करे तो यूं कहे नवैतु अन असू म हाजल यौम | लिल्लाहि तआला मिन फर जि र म जान ।*_

_*📝सवाल : - रोजा इफ़तार करने के वक़्त कौन सी दुआ पढ़ी जाती है ?*_

_*✍🏻जवाब : - यह दुआ पढ़ी जाती है । अल्लाहुम्म लक सुम्तु व बि क आमन्तु व अलै क तवक्कलतु व अला रिज़कि क अफ़तरतु | फगफिरली मा कद्दम्तु व मा अख्खरतु ।*_


_*📕अनवारे शरिअत सफा,119/120/121*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत पोस्ट न. 58}*_
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_*💫सदकये फ़ित्र का बयान*_

_*📝सवाल : - सदक़ये फ़ित्र देना किस पर वाजिब होता है ?*_

_*✍🏻जवाब : - हर मालिके निसाब पर अपनी तरफ़ से और अपनी हर नाबालिग औलाद की तरफ से एक एक सदक़ये फ़ित्र देना ईदुल फित्र के दिन वाजिब होता है ।*_

_*📝सवाल : - सदक़ये फ़ित्र की मिक़दार क्या है ?*_

_*✍🏻जवाब : - सदक़ये फ़ित्र की मिकदार यह है कि गेंहूं या उसका आटा आधा साअ दें । और खजूर , मुनक्का या जौ या उस का आटा एक साअ दें और अगर इन चारों के अलावा कोई दूसरा गल्ला वगैरा देना चाहें तो कीमत का लिहाज़ करना यानी उस चीज़ का आधे साअ गेंहूं या एक साअ जौ की कीमत का होना ज़रूरी है ।*_

_*📝सवाल : - साअ कितनी मिकदार का होता है ?*_

_*✍🏻जवाब : - आला दर्जा की तहकीक़ और इहतियात यह है कि साअ का वजन तीन सौ इक्कयावन ( 351 ) रुपया भर होता है और आधा साअ एक सौ पच्चहत्तर ( 175 ) रुपये अठन्नी भर ऊपर ।*_

_*📝सवाल : - नए वज़न से साअ कितने का होता है ?*_

_*जवाब : - नए वज़न से एक साअ चार किलो और तकरीबन 94 ग्राम होता है । और आधा साअ दो किलो तकरीबन 47 ग्राम का होता है ।*_

_*📝सवाल : - अगर गेहूं या जौ देने की बजाय उनकी कीमत दी जाये तो क्या हुक्म है ।*_

_*✍🏻जवाब : - गेंहूं या जौ देने के बजाय उनकी कीमत देना अफ़ज़ल हैं ।*_

_*📝सवाल : - सदक़ये फ़ित्र किन लोगों को देना जाइज़ है ?*_

_*✍🏻जवाब : - जिन लोगों को ज़कात देना जाइज़ है उनको सदकये फ़ित्र भी देना जाइज़ है और जिन लोगों को ज़कात देना जाइज़ नहीं उनको सदक़ये फ़ित्र भी देना जाइज़ नहीं ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा,117/118/119*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत पोस्ट न. 57}*_
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_*💫ज़कात का माल किन लोगों पर खर्च किये जाए*_

_*📝सवाल : - ज़कात और उश्र का माल किन लोगों को दिया जाए ?*_

_*✍🏻जवाब : - जिन लोगों को दिया जाता है उनमें से कुछ यह हैं ( 1 ) फ़कीर यानी वह शख़्स कि जिसके पास कुछ माल है लेकिन निसाब भर नहीं ।*_

_*👉🏻( 2 ) मिसकीन यानी वह शख़्स कि जिसके पास खाने के लिए गल्ला और बदन छिपाने के लिए कपड़ा भी न हो ।*_

_*👉🏻( 3 ) कर्जदार यानी वह शख्स कि जिसके जिम्मा क़र्ज़ हो और उसके पास कर्ज से फ़ाज़िल कोई माल बक़दरे निसाब न हो ।*_

_*👉🏻( 4 ) मुसाफिर जिसके पास सफ़र की हालत में माल न रहा उसे ज़रूरत भर को ज़कात देना जाइज़ है ।*_

_*📝सवाल : - किन लोगों को ज़कात देना जाइज़ नहीं ?*_

_*✍🏻जवाब : - जिन लोगों को ज़कात देना जाइज़ नहीं उनमें से कुछ यह हैं ।*_

_*👉🏻( 1 ) मालदार यानी वह शख्स जो मालिके निसाब हो ।*_

_*👉🏻( 2 ) बनी हाशिम यानी हज़रते अली , हज़रते जाफ़र , हज़रते अक़ील और हज़रते अब्बास व हारिस बिन अब्दुल मुत्तलिब की औलाद को देना जाइज़ नहीं ।*_

_*( 3 ) अपनी नस्ल और फरा यानी मां , बाप , दादा दादी , नाना नानी वगैरहुम और बेटा , बेटी , पोता , पोती , नवासा नवासी को ज़कात देना जाइज़ नहीं ।*_

_*👉🏻( 4 ) औरत अपने शौहर को और शौहर अपनी औरत को अगरचे तलाक़ दे दी हो जब तक की इद्दत में हो ज़कात नहीं दे सकता ।*_

_*👉🏻( 5 ) मालदार मर्द के नाबालिग बच्चे को ज़कात नहीं दे सकता और मालदार की बालिग औलाद को जबकि मालिके निसाब न हो दे सकता है ।*_

_*( 6 ) वहाबी या किसी दूसरे मुरतद बद मज़हब और काफ़िर को जकात देना जाइज नहीं ।*_

_*📝सवाल : - सैय्यद को ज़कात देना जाइज़ है या नहीं ?*_ 

_*✍🏻जवाब : - सैयिद को ज़कात देना जाइज़ नहीं इसलिए कि वह भी बनी हाशिम में से हैं ।*_

_*सवाल : - ज़कात का पैसा मस्जिद में लगाना जाइज़ है या नहीं ?*_

_*जवाब : - ज़कात का माल मस्जिद में लगाना , मदरसा तामीर करना या उससे मैयित को कफ़न देना या कुआं बनवाना जाइज नहीं यानी अगर इन चीजों में जकात का माल खर्च करेगा तो जकात अदा न होगी ।*_

_*📝सवाल : - कुछ लोग अपने आप को खानदानी फ़कीर कहते हैं उनको ज़कात और गल्ला का उश्र देना जाइज़ है या नहीं ?*_

_*✍🏻जवाब : - अगर वह लोग साहिबे निसाब हों तो उन्हें ज़कात और उश्र देना जाइज़ नहीं ।*_

_*📝सवाल : - किन लोगों को जकात देना अफजल है ?*_

_*✍🏻जवाब : - ज़कात और सदक़ात में अफ़ज़ल यह है कि पहले अपने भाई बहनों को दे फिर उनकी औलाद को फिर चचा और फूफियों को फिर उनकी औलाद को फिर मामू और खाला को फिर उनकी औलाद को फिर दूसरे रिश्तादारों को फिर पड़ोसियों को फिर अपने पेशा वालों को फिर अपने शहर या गांव के रहने वालों को । और ऐस तालिबे इल्म को भी ज़कात देना अफ़ज़ल है जो इल्मेदीन हासिल कर रहा हो बशर्ते कि यह लोग मालिके निसाब न हों ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा,115/116/117*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत*_
                              *{पोस्ट न. 56}*

                 _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_
_*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_
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_*🌾उश्र का बयान🌽*_

_*❓सवाल : - किन चीज़ों की पैदावार में उश्र वाजिब है ?*_ 

_*✍🏻जवाब : - गेंहूं , जौ , ज्वार , बाजरा , धान और हर किस्म के ग़ल्ले और अल्सी , कुसुम , अखरोट , बादाम और हर किस्म के मेवे , रुई , फूल , गन्ना , खरबूजा , तरबूज़ , खीरा , ककड़ी , बैगन और हर किस्म की तरकारी सब में उश्र वाजिब है । थोड़ा पैदा हो या ज्यादा ।*_

_*❓सवाल : - किन सूरतों में दसवां हिस्सा और किन सूरतों में बीसवां हिस्सा वाजिब होता है ?*_

_*✍🏻जवाब : - जो पैदावार बारिश या ज़मीन की नमी से हो उसमें दसवां हिस्सा वाजिब होता है और जो पैदावार चरसे डोल , पम्पिंग मशीन या ट्यूबविल वगैरा के पानी से हो या खरीदे हुए पानी से हो उसमें बीसवां हिस्सा वाजिब होता है ।*_

_*❓सवाल : - क्या खेती के अख़राजात ( खर्चा ) हल बैल और काम करने वालों की मजदूरी निकाल कर दसवां बीसवां वाजिब होता ?*_

_*✍🏻जवाब : - नहीं । बल्कि पूरी पैदावार का दसवां बीसवां वाजिब होता है ।*_

_*❓सवाल : - गौरमिन्ट को जो माल गुज़ारी दी जाती है वह उश्र की रक़म से मुजरा की जाएगी या नहीं ?*_

_*✍🏻जवाब : - वह रकम उश्र से मुजरा नहीं की जाएगी ।*_

_*❓सवाल : - ज़मीन अगर बटाई पर दी तो उश्र किस पर वाजिब ?*_

_*✍🏻जवाब : - ज़मीन अगर बटाई पर दी तो उन दोनों पर वाजिब ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा,114/115*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत*_
                             *{पोस्ट न. 55}*

                 _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_
_*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_
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_*💫जकात का बयान*_ 

_*❓सवाल : - ज़कात फ़र्ज़ है या वाजिब ?*_

_*✍🏻जवाब : - ज़कात फर्ज है । उसकी फरजीयत का इन्कार करने वाला काफ़िर और न अदा करने वाला फ़ासिक और अदायगी मे देर करने वाला गुनाहगार मरदूदुश्शहादत हैं । ( गवाही न देने के योग ) नहीं ।*_

_*❓सवाल : - ज़कात फ़र्ज होने की शर्ते क्या हैं ?*_

_*✍🏻जवाब : - चन्द शर्ते हैं । मुसलमान आकिल बालिग होना , माल  बक़दरे निसाब का पूरे तौर पर मिलकियत में होना , निसाब का हाजते अस्लीया और किसी के बकाया से फारिग होना , मालेतिजारत या सोना चांदी होना और माल पर पूरा साल गुज़र जाना ।*_

_*❓सवाल : - सोना चांदी का निसाब क्या है और उनमें कितनी  ज़कात फ़र्ज़ है ?*_

_*✍🏻जवाब : - सोने का निसाब साढ़े सात तोला है जिसमें चालीसवां हिस्सा यानी सवा दो माशा जकात फर्ज है । और चांदी का निसाब साढ़े बावन तोला है जिस में एक तोला तीन माशा छ : रत्ती ज़कात फर्ज है । सोना चांदी के बजाय बाज़ार भाव से उनकी कीमत लगा कर रुपया वगैरा देना भी जाइज़ है ।*_

_*❓सवाल : - क्या सोना चांदी के जेवरात में भी ज़कात वाजिब होती ?*_

_*✍🏻जवाब : - हां सोना चांदी के जेवरात भी ज़कात वाजिब होती है ।*_

_*❓सवाल : - तिजारती माल का निसाब क्या है ?*_

_*✍🏻जवाब : - तिजारती माल की कीमत लगाई जाए फिर उससे सोना चांदी का निसाब पूरा हो तो उसके हिसाब से जकात निकाली जाए ।*_

_*❓सवाल : - कम से कम कितने रुपये हों कि जिन पर ज़कात वाजिब होती है ?*_

_*✍🏻जवाब : - अगर सोना चांदी न हो और न माले तिजारत हो तो कम से कम इतने रुपये हों कि बाज़ार में साढ़े बावन तोला चांदी या साढ़े सात तोला सोना खरीदा जा सके तो उन रुपयों की जकात वाजिब होती है ।*_

_*❓सवाल : - हाजते अस्लीया किसे कहते हैं ?*_

_*✍🏻जवाब : - ज़िन्दगी बसर करने के लिए जिस चीज़ की ज़रूरत होती है जैसे जाड़े और गर्मियों में पहनने के कपड़े , खानादरी के सामान , पेशावरों के औजार और सवारी के लिए साईकिल और मोटर वगैरा यह सब हाजते अस्लीया में से हैं इनमें ज़कात वाजिब नहीं ।*_

_*❓सवाल : - निसाब का दैन से फ़ारिग होने का क्या मतलब है ?*_ 

_*✍🏻जवाब : - इसका मतलब यह है कि मालिके निसाब पर किसी का बाक़ी न हो या इतना हो कि अगर बाक़ी अदा कर दे तो भी निसाब बचा रहे तो इस सूरत में ज़कात वाजिब है और अगर बाकी इतना हो कि अदा कर दे तो निसाब न रहे तो इस सूरत में ज़कात वाजिब नहीं ।*_

_*❓सवाल : - माल पर पूरा साल गुज़र जाने का क्या मतलब है ?*_

_*✍🏻जवाब : - इसका मतलब यह है कि हाजते अस्लीया से जिस तारीख को पूरा निसाब बच गया उस तारीख से निसाब का साल शुरू हो गया फिर साले आइन्दा अगर उसी तारीख को पूरा निसाब पाया गया तो ज़कात देना वाजिब है । अगर दरमियाने साल में निसाब की कमी हो गयी तो यह कमी कुछ असर न करेगी ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा,111/112/113/114*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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_*📜अनवारे शरिअत*_
                               *{पोस्ट न. 54}*

                 _*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_
_*अल्लाह के नाम से शुरू जो बोहत मेहरबान रहमत वाला*_
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_*🕌नमाज़े जनाज़ा का बयान*_

_*❓सवाल : - नमाज़े जनाज़ा फ़र्ज़ है या वाजिब ?*_

_*✍🏻जवाब : - नमाज़े जनाज़ा फ़र्ज़ किफ़ाया है यानी अगर एक शख्स ने पढ़ली तो सब छुटकारा पा गए और अगर खबर हो जाने के बाद किसी ने पढ़ी तो सब गुनाहगार हुए ।*_

_*❓सवाल : - जनाज़ा में कितनी चीजें फर्ज हैं ?*_

_*✍🏻जवाब : - दो चीजें फर्ज हैं चार बार “ अल्लाहु अकबर " कहना , कियाम यानी खड़ा होना ।*_

_*❓सवाल : - नमाज़े जनाज़ा में कितनी चीजें सुन्नत हैं ?*_

_*✍🏻जवाब : - नमाज़े जनाज़ा में तीन चीजें सुन्नते मुअक्कदा हैं । अल्लाह तआला की सना , हुजूर अलैहिस्सलातु वस्सलाम पर दुरूद , और मैइत के लिए दुआ ।*_

_*❓सवाल : - नमाज़े जनाज़ा पढ़ने का तरीका क्या है ?*_ 

_*जवाब : - पहले नीयत करे । नीयत की मैंने नमाज़े जनाज़ा की चार तकबीरों के साथ अल्लाह तआला के लिए दुआ इस मैइत के लिए ( मुक़तदी इतना और कहे , पीछे इस इमाम के ) मुंह मेरा तरफ़ काबा शरीफ़ के फिर कानों तक दोनों हाथ उठाकर अल्लाहु अकबर कहता हुआ हाथ वापस लाए और नाफ के नीचे बांध ले फिर यह सना पढ़े जो उपर नमाज़ के तरीके मे बताया गया ।*_

_*फिर बगैर हाथ उठाए अल्लाहु अकबर कहे और दुरुद इब्राहीमी पढ़े जो पांच वक़्त की नमाज़ में पढ़े जाते हैं । फिर बगैर हाथ उठाए अल्लाहु अकबर कहे और बालिग का जनाज़ा हो तो यह दुआ पढ़े ।*_

_*अल्लाहुम्ममग्फिर लिहैयिना व मैयितिना व शहिदिना व गाइबिना सगीरिना व कबीरिना व ज क रिना व उनसाना अल्लाहुम्म मन अयैतहू मिन्ना फ़अह यही अलल्इस्लामि व मन तवफ्फैतहू मिन्ना फ़तवफ्फ़हू अलईमान "*_
_*اَللّٰہُمَّ اغْفِرْ لِحَیّ‌ِنَا وَمَیْ‌ِتِنَا وَشَاھِدِنَا وَغآ ںِٔبِنَا وَصَغِیْرِنَا وَسَبِیْرِنَا وَذَکَرِنَا وَاُنْثٰنَا اَللّٰہُمَّ مَنْ تَوَفَّیْتُهٗ مِنَّا فَتَوَفَّهٗ عَلَے الْاِیْمَان*_
_*इसके बाद चौथी तकबीर कहे फिर बगैर कोई दुआ पढ़े हाथ खेलकर सलाम फेर दे और नाबालिग बच्चे का जनाज़ाहो तो यह दुआ पढ़ी जाए*_

 _*“ अल्लाहुम्मज अल्हु लना फ़रातन वज्अल्हुलना अज्रन व जुख्रव वज्अल्हु लना शफिअन व मुशफ्फआ "*_
_*اَللّٰہُمَّ اجْعَلْهُ لَنَا فَرَاطاًوَّاجْعَلْهُ لَنَا اَجْرًا وَّذُخْرًا وَّاجْعَلْهُ لَنَا شَافِعًا وَّمُشَفَّعًا*_
_*और अगर नाबालिग लड़की का जनाज़ा हो तो यह दुआ पढ़े ।*_
_*“ अल्लाहुम्मज अल्हा लना फ़रतन वज्अल्हा लना अज्रन  व जुख्रव वज्अल्हा लना शा फिअतव् व मुशफ्फअतन ।*_
_*اَللّٰہُمَّ اجْعَلْهَا لَنَا فَرَطاً وَّاجـعَلْهَا لَنَا اَجْرًاوَّذُخْرًا وَّاجْعَلْهَا لَنَا شَافِعَۃً وَّمُشَفَّعَۃً*_

_*❓सवाल : - अस्र या फज़्र की नमाज़ के बाद जनाज़ा पढ़ना कैसा?*_

_*✍🏻जवाब : - जाइज़ है और यह जो अवाम में मशहूर है कि नहीं जाइज है गलत है ।*_

_*❓सवाल : - क्या सूरज निकलने , डूबने और ज़वाल के वक़्त नमाजे जनाज़ा . पढ़ना मकरूह है ?*_

_*✍🏻जवाब : - जनाज़ा अगर उन्हीं वक्तों में लाया गया तो नमाज़ उन्हीं वक़्तों में पढ़ें कोई कराहत नहीं कराहत उस सूरत में हैं कि पहले से तैयार मौजूद है और देर की यहां तक कि वक्ते कराहत आ गया ।*_

_*📕अनवारे शरिअत सफा,109/110/111*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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    _*📜अनवारे शरिअत (पोस्ट न. 53)*_
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                                 *﷽*

_*🔪अकीका का बयान (भाग 2)*_

_*❓सवाल : - लड़का के अक़ीक़ा की क्या दुआ है ।*_

_*✍🏻जवाब : - लड़का के अकीका की दुआ यह है*_
_*“ अल्लाहुम्म हाजिही अकीकतु बनी फुलां*_
     _*اَللّٰہُمَّ عَقِیْکَۃُ ابْنِی فُلَاں*_
 _*( फुलां की जगह बेटे का नाम ले अगर दूसरे के बेटे का अक़ीक़ा करे तो इबनी फुलां की जगह लड़का और उसके बाप का नाम ले )*_

_*दमुहा बिदमिही व लह मुहा बिलह मिही व शमुहा बिशहमिही व अजमुहा बिअजमिही वजिलदुहा बिजिलदिही व शअरुहा बिशअरिही अल्लाहुम्मजअल्हा फिदाँअल लिबनी फलां*_

_*دَمُہَا بِدَمِهٖ وَلَحْمُہَا بِلَحْمِهٖ وَشَحْمُہَا بِشَحْمِهٖ وَعَظْمُہَا بِعَظْمِهٖ وَجِلْدُھَا بِجِلْدِہٖ وَشَعْرُھَا بِشَعْرِهٖ اَلَلّٰہُمَّ اجْعَلْہَا فِدًأ‍ً لّ‌ِابْنِیْ فُلَاں*_

_*( इस जगह भी फुलां की जगह बेटे का नाम ले । और अगर दूसरे के लड़के का अकीका करे तो लि के बाद उसका और उसके बाप का नाम ले )*_

_*मिन्नारि व तक़बलहा मिन्हु कमा तकब्बल तहा मिन नबीइकल मुस्तफा वहबीबिकल मुजतबा अलैहित तहीयतु वस्सनाइ इन्न सलाती व नुसुकी व महयाय व ममाती लिल्लाहि रब्बिल आलमीन । ला शरीक लहू व बिजालि क उमिरतु व अना मिनल मुस्लिमीन । अल्लाहुम्म मिन क व ल क बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर ।*_
*_مِنَالنَّارِ وَتَقَبَّلْہَا مِنْهُ کَمَا تَقَبَّلْتَہَا مِنْ نَبِیّ‌ِکَ الْمُصْطَفٰی وَحَبِیْبِکَ الْمُجْتَبٰی عَلَیْهِ التَّحیَّۃُ وَالثَّنَا ءِ اِنَّ صَلَاتِی وَنُسُکِیْ وَمَحْیَا یَ وَمَمَا تِیْ لِلّٰهِ رَبّ‌ِالْعٰلَمِیْنَ۔لَاشَرِیْکَ لَهٗ وَبِذٰلِکَ اُمِرْتُ وَاَنَامِنَ المُسْلِمِیْنَ اَلَلّٰہُمَّ مِنْکَ وَلَکَ بِسْمِ اللّٰهِ اَللّٰهُ اَکْبَرْ_*
_*कह कर ज़बह करे ।*_

_*सवाल : - लड़की के अक़ीका की क्या दुआ है ।*_

_*जवाब : - लड़की के अक़ीका की दुआ यह है*_
 _*अल्लाहुम्मा हाज़िही अक़ीक़तु बिनती फुलां*_
   _*اَللّٰہُمَّ ھٰذِہٖ عَقِیْکَۃُ بِنْتِیْ فُلَاں*_
 _*( फुलां की जगह अपनी बेटी का नाम लो । अगर दूसरे की लड़की का अक़ीक़ा करे तो बिनती फुलां की जगह लड़की और उसके बाप का नाम ले )*_

_*दुमुहा बिदमिहा व लहमुहा बिलह मिहा व शमुहा बिशहमिहा व अज्मुहा बिअफ्रिमहा व जिलदुहा बिजिलहिदा व शअरुहा बिशअरिहा । अल्लाहुम्मजअल्हा फिदाअन लिबिनती फुलां*_
_*دَمُہَا بِدَمِہَا وَلَحْمُہَا بِلَحْمِہَا وَشَحْمُہَا بِشَحْمِہَا وَعَظْمُہَا بِعَظْمِہَا وَجِلْدُھَا بِجِلْدِھَا وَشَعْرُھَا بِشَعْرِھَا اَلَلّٰہُمَّ اجْعَلْہَا فِدًآ‌ءً لِبِنْتِیْ فُلَاں*_
 _*( इस जगह भी फुलां की जगह बेटी का नाम ले । अगर दूसरे की लड़की का अक़ीका करे तो लि , के बाद लड़की और उसके बाप का नाम ले )*_

_*मिन्नारि व तकब्बल्हा मिन्हा कमा तक़ब्बल्तहा मिन नबी इकलमुस्तफा व हबीबिकलमुज्तबा अलैहित्तहीयतु वस्सना इन्ना सलाती व नुसुकी व मह्याय व नमाति लिल्लाहि रब्बिल आलमीन । ला शरीक लहु व बिजालि क उमिरतु व अना मिनल मुसिलमीन अल्लाहुम्म मिन कव ल क बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर*_
*_مِنَالنَّارِ وَتَقَبَّلْتَہَا مِنْہَا کَمَا تَقَبَّلْتَہَا مِنْ نَبِیّ‌ِکَ                        الْمُصْطَفٰی وَحَبِیْبِکَ الْمُجْتَبٰی عَلَیْهِ التَّحیَّۃُ وَالثَّنَا ءِ اِنَّ صَلَاتِی وَنُسُکِیْ وَمَحْیَا یَ وَمَمَا تِیْ لِلّٰهِ رَبّ‌ِالْعٰلَمِیْنَ۔لَاشَرِیْکَ لَهٗ وَبِذٰلِکَ اُمِرْتُ وَاَنَامِنَ الْمُسْلِمِیْنَ اَلَلّٰہُمَّ مِنْکَ وَلَکَ بِسْمِ اللّٰهِ اَللّٰهُ اَکْبَرْ_*
_*कह जबह करे।*_

_*❓सवाल : - अगर यह दुआ न पढ़े तो अक़ीका होगा या नहीं ।*_

_*⁦✍🏻⁩जवाब : - अगर यह दुआ न पढ़े और अकीका की नीयत से |  बिस्मिल्लाहि अल्लाहु अकबर कह कर जबह कर दे तो भी अकीका हो जाएगा ।*_

_*📕( बहारे शरीअत )*_


_*📕 अनवारे शरिअत, सफा 106/107*_

_*📮जारी रहेगा इंशाअल्लाह.....*_
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Al Waziftul Karima 👇🏻👇🏻👇🏻 https://drive.google.com/file/d/1NeA-5FJcBIAjXdTqQB143zIWBbiNDy_e/view?usp=drivesdk 100 Waliye ke wazai...