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Monday, December 3, 2018



_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 01)*_
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*_🌹फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह व अज़मते सहाबा कुरान की रोशनी में_*

_*जैसा कि आप सब जानते है की दौरे हाजिर मे बहुत से नये नये फितने जन्म ले रहे हैं और कुछ तो एेसे हैं जो हमारा ईमान का जनाज़ा तक निकाल दे रहे है, इन्हीं मे से एक फितना है जो सहाबिये रसूल ﷺ हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह को माज़अल्लाह सुम्मा माज़अल्लाह जहन्नमी कहता है और उन पर तरह तरह के इल्ज़ाम लगा रहा है।*_

_*आज हम लोग हमारी बज़्मे नूरी टीम भोपाल की जानिब से एेसे लोगो को कुरआन व हदीसों की रोशनी में एेसे लोगो को मुँहतोड़ जवाब देंगे और आप सभी हज़रात हमारी टीम के लिए दुआ करें।*_

_*📖सवाल :- सहाबा किसे कहते है..?*_

_*✍🏻जवाब :- जिस मुसलमान ने हालते ईमान मे मुस्तफा जाने रहमत, मदीने वाले आका, ताजदारे अम्बिया, रसूलअकरम ﷺ का दीदार किया है और हालते ईमान मे ही दुनियाए फ़ानी से रुख्सत हुआ है एेसे शख्स को सहाबीये रसूलﷺ कहते है।*_

_*अल्लाह अपने मुकद्दस कलाम कुरआने मजीद फुर्काने हमीद मे इरशाद फरमाता है :-*_

 *رَضِیَ اللّٰہُ  عَنۡہُمۡ وَ رَضُوۡا عَنۡہُ ؕ*

*_📝तर्ज़ुमाए कंज़ुल ईमान :- अल्लाह उन से राज़ी हो गया और वोह अल्लाह से राज़ी_*

_*अब जो शख्स सहाबा की शान मे जर्रा बराबर भी गुस्ताख़ी करता हैं एेसा शख्स अहले सुन्नत व जमात से खारिज है और कुरआन शरीफ की आयत का भी मुन्किर है।*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 02)*_
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_*💡जैसा कि मैंने आप को पहले ही बता दिया हूँ कि हम जो भी बात अपनी पोस्ट में करेंगे उन सभी बातों का हवाला कुरान और हदीस की रोशनी मे आपके सामने पेश करेंगे।*_

_*जैसे राफ्जी (शिया) सहाबा के गुस्ताख हैं वैसे ही आज के सुलाहकुल्ली जो अपने आप को अहले सुन्नत (सुन्नी) कहते हैं [लेकिन इनका अहले सुन्नत से कोई ताल्लुक नहीं है] ये लोग भी राफ्जियत की जानिब बहुत तेजी के साथ अपना कदम बढ़ा चुके हैं और ये भी सहाबिये रसूल ﷺ हज़रत अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो अन्ह और हज़रत अबू सूफीयान عنهما الله رضى की शान मे बहुत सी गुस्ताख़ी करने लगे है, यही वजह है कि आज हमें इनका बायकॉट करना पड़ रहा है...!*_

_*"न तुम सदमे हमें देते, न हम फरियाद यूँ करते....*_
_*न खुलते राज़े सरबस्ता, न यूँ रुसवाईया होती"...*_

_*अब मैं सबसे पहले अपने मौज़ू का आगाज़ कुराने मजीद की चन्द आयतों के तर्जुमे के साथ करता हूं...*_

_*🕋अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपनी मुकद्दस किताब में हुजूर ﷺ के सच्चे साथी यानी सहाबा का ज़िक्र करते हुए यूँ फरमाता है :*_

_*📝तर्ज़ुमा अल कुरान : "मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं और उनके साथ वाले (सहाबा) काफिरो पर सख्त हैं और आपस मे नर्म दिल, तू उन्हें देखेगा रुकु करते सज्दा मे गिरते हुए, अल्लाह का फ़ज़्ल और रिज़ा चाहते हुए, उनकी अलामत उनके चेहरों मे है सज्दो के निशान से, ये उनकी सिफात तौरात मे है और उनकी सिफात इन्जील मे"*_

_*📕 सूरह फ़तह, आयत नं. 29*_

_*और अब वो लोग जो किसी सहाबीये रसूल ﷺ ख़ुसुसन जो हज़रत अमीरे मुआविया व हज़रत अबू सूफियान عنهما الله رضى को हल्के लफ्ज़ो से याद करते है और उनकी शान मे ज़बानदराजी करते है वो अपनी खैर मनायें।*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 03)*_
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_*आज की पोस्ट भी मैं कुराने मुकद्दस की रोशनी मे आपके सामने हाजिर करने जा रहा हूं। आप सभी हज़रात आज की पोस्ट बगौर पढ़े और एेसे जाहिलो तक जरूर भेजिये जो सहाबिये रसूल ﷺ की शान में गुस्ताख़ी करते है।*_

_*🕋अल्लाह करीम अपने मुकद्दस कलाम कुराने मजीद वल फुर्काने हमीद में इरशाद फरमाता है :*_

_*तर्जुमा अल कुरान : उसने तुम को (सहाबा को) पसंद किया और तुम पर दीन मे कुछ तंगी न रखी कि तुम्हारे बाप इब्राहीम का दीन है, अल्लाह ने तुम्हारा नाम मुसलमान रखा है अगली किताबों में और इस कुरान मे भी, ताकि रसूल तुम पर गवाह हो और तुम लोगो की गवाही दो......*_

_*📕 सूरह हज्ज आयत नं. 78*_

_*ये आयते करीमा साफ साफ बता रही है कि अल्लाह पाक ने अपने रसूल ﷺ के साथ और सोहबत के लिए सहाबा को खुद चुना था, अब जिनका इन्तेख़ाब खुद हक तबारक व तआला ने फरमाया फिर उनकी अज़मत का अंदाजा कौन कर सकता है..?*_

_*🕋अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का हम सुन्नी बरेलवियों और अहले सुन्नत के तमाम हक़ सिलसिलों पर बहुत बड़ा एहसान है कि हम मुहिब्बे अहले बैत और मुहिब्बे सहाबा है, अलहम्दुलिल्लाह अल्लाह ने हमें अपने उन चुनिंदा बंदो मे रखा है जिनके दिलों मे प्यारे आक़ा मुस्तफा जाने रहमत रसूलेआज़म ﷺ की और उनके जां निसारों की सच्ची पक्की मुहब्बत है, अल्लाह हम सब का खात्मा बिलखैर फरमाये।*_
_*आमीन या रब्बुल आलमीन*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 04)*_
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_*जैसा कि अब तक आप हज़रात ने पिछली 3 पोस्टों में पढ़ा ही होगा कि अल्लाह पाक ने सहाबा ए किराम के मर्तबे का ज़िक्र कुराने करीम में फरमाया है और उनसे भलाई का वादा फरमा लिया है,*_

_*लेकिन अब जो लोग सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह पर इतनी बेहुरमती से पेश आते हैं वो लोग बेशक अल्लाह के कलाम के खिलाफ बात करते हैं और हमें चाहिए कि हमें ऐसे लोगों से सलाम व कलाम दोनो चीजों से दूर रहना चाहिए।*_

_*अभी तक तो कुराने करीम के हवाले से बताया गया है कि सहाबा का मकाम व उनकी शान क्या है लेकिन वक्त कि कमी को देखते हुए अब मैं आगे कुछ हदीसों से भी बताता चलूंं कि मदीने वाले अाक़ा ﷺ अपने सहाबा के बारे में क्या फरमाते है.?*_

_*📚 हदीसे नबवी ﷺ :- हज़रत जाबिर रदिअल्लाहु तआला अन्ह से रिवायत है हुज़ूर ﷺ ने फरमाया :*_

*لا تمس النار مسلما رآنى او رآى من رآنى*

_*📝तर्जुमा : आग (जहन्नम की) उस मुसलमान को न छुयेगी जिसने मुझे देखा या मेरे देखने वालो (सहाबा ए किराम) को देखा।*_ _(सुभानअल्लाह)_

*📕 جامع الترمذي،،،،، جلد-2،،،، الصفحة- { 225}*

_*🕋अल्लाह अल्लाह यहाँ तो सिर्फ सहाबा की ही नहीं बल्कि ताबई बुर्ज़ुगों की शान इतनी बुलंद हो गई की उन्होंने सिर्फ सहाबा को देखा है तो उन पर जहन्नम की आग हराम हो गई, अब इससे हम और आप ये गुमान भी नहीं कर सकते हैं कि सहाबा ए किराम अजमईन का मर्तबा क्या होगा.?*_

_*इसीलिए बरेली से मेरे इमाम अहमद रज़ा ने फरमा दिया :*_

_*"जिस मुसलमां ने देखा उन्हें एक नज़र,*_
_*उस नज़र की बसारत पे लाखों सलाम.!*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 05)*_
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_*📚 हदीसे रसूल ﷺ :*_

*قال رسول الله صلى الله عليه وسلم الله الله فى اصحابى لا تتخذوهم غرضا من بعدى، فمن احبهم فحبى أحبهم ومن أبغضهم فببغضى أبغضهم ومن اذا هم فقد*
*آذانى ومن آذانى فقد اذى الله ومن اذالله فيوشك أن ياخذه*

_*📝तर्जुमा : प्यारे मुस्तफा जाने रहमत ﷺ इरशाद फरमाते हैं कि मेरे सहाबा के बारे मे अल्लाह से डरो और मेरे बाद उन्हें निशाना न बनाओ, जिसने उनसे मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने उनसे बुग्ज़ रखा उसने मुझसे बुग्ज़ रखा और जिसने उन्हें तकलीफ दी उसने मुझे तकलीफ दी और जिसने मुझे तकलीफ दी उसने अल्लाह को तकलीफ दी और जो अल्लाह को तकलीफ देगा करीब है कि अल्लाह पाक उसे अपनी गिरफ्त (अज़ाब) मे ले ले।*_

*📕 مشكوة المصابيح،،، الصفحة- {554}*

_(अल्लाहुअकबर)_

_*🕋अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हम सबको सहाबा ए किराम से मुहब्बत करने की तौफीक अता फरमाये और मज़हबे अहले सुन्नत (मसलके आला हज़रत) पर मर मिटने की तौफीक अता फरमाये।*_
_*🌹आमीन या रब्बुल आलमीन*_

_*बरेली शरीफ से हर वक्त ये सदा आती है :*_

*_अहले सुन्नत का है बेड़ा पार अस्हाबे हुज़ूर_*
*_नज़्म है और नाव है इतरत रसूलअल्लाह की ﷺ_*

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 06)*_
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_*📚 हदीसे रसूल ﷺ : हज़रत उमर फ़ारूके आज़म عنه الله رضى रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया :*_

*سألت ربى عن اختلاف أصحابى من بعدى فاوحى إلى يا محمد إن اصحابك عندى بمنزلة النجوم فى السماء بعضها أقوى من بعض ولكل نور فمن أخذ بشى مما*
*هم عليه من اختلافهم فهو عندى على هدى*

_*📝तर्जुमा : मैं ने अपने रब से अपने बाद सहाबा के इख्तेलाफ़ के बारे मे पूछा तो मुझे वही (अल्लाह की तरफ से कलाम) हुई कि ऐ मुहम्मद ﷺ तुम्हारे सारे अस्हाब मेरे नज़दीक आसमान के तारों की तरह हैं, रोशनी में अगरचे कम ज़ियादा हों मगर नूर और हिदायत हर एक में है, पास जिनके सहाबा के दरमियान के इख्तेलाफ़ मे जिसके मसले को इख्तियार की वो मेरे नज़दीक हिदायत पर है।*_

_*📕 مشكوة المصابيح،،، الصفحة- {554}*_

_*यानी सहाबा के इख्तेलाफ़ का ताल्लुक़ हक से है, इसलिए उनमें से किसी की भी इक्तेदा हिदायत ही है और इस हदीस से साबित हुआ अल्लाह के नज़दीक तमाम के तमाम सहाबा मक़बूल और मेहबूब हैं।*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 07)*_
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_*बहुत से लोग हमारी पोस्ट को पढ़कर ये सोचते होंगे कि हम लोगों ने ये हदीसें कहाँ से लाई है, और ये भी कि हमने तो कभी ये सब हदीसें किसी आलिम और मुफ्ती से भी नहीं सुनी और कुछ तो ऐसे भी होंगे जिनके दिमाग में ये दौड़ता होगा कि कहीं हमने ये सब हदीसें गढ़ तो नहीं दी?*_

_*👉🏻मैं ऐसे लोगों को जवाब देना चाहता हूँ कि जब तक आप लोग किताबों का मुताला नहीं करेंगे तब तक आपको ये सब फालतू बातें ही लगेंगी और हर बात आपको ज़रूरी नहीं है कि आलिम और मुफ्ती बतायेंगे बल्कि इल्मे दीन हर मुसलमान मर्द-औरत पर फर्ज़ है, हमें चाहिए कि हम जो अपना फालतू वक्त होटलों में, दुकानों में,  घरों में रहकर गुज़ारते है उसे हमें किसी आलिम के पास गुज़ारना चाहिए ताकि हम इल्मे दीन से करीब हो जाए और कोई आलिम आपके घर आकर आपको नही समझाएगा बल्कि आप में खुद इल्मे दीन सीखने उनके पास जाना होगा और जज़्बा होना चाहिए सीखने का न कि अपने मतलब के लिए हो।*_

_*📚 हदीस शरीफ :*_

*عن ابن عمر قال رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا رأيتم الذين يسبون أصحابى فقولوا لعنة الله على شركم*

_*📝तर्जुमा: हज़रत इब्ने उमर कहते हैं कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया, "जब तुम उन लोगों को देखो जो मेरे सहाबा के बारे मे बुरा भला कह रहे हैं तो (उनसे) कहो तुम पर अल्लाह की लानत हो।"*_

_*📕  الجامع الترمذي،،، جلد-2،،، الصفحة- { 225}*_

_*❌तमाम दुश्मने सहाबा बिलखुसुस राफ्जी, गैर मुक़ल्लिदीन और अजमेर शरीफ के वो मुजावर जो सहाबा के गुस्ताख़ है उन सब पर अल्लाह की लानत हो।*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 08)*_
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*_❤सहाबा ए किराम मुज्तहिद थे उनमें जो इख्तेलाफ़ हुआ अगर उसमें किसी ने गलती भी की तब भी उन्हें एक नेकी ज़रूर मिली...._*

_*🌹हुज़ूर ﷺ फरमाते हैं :*_

*وإذا حكم فاجتهد ثم أخطأ فله اجر*

_*📝तर्जुमा : और जब फैसला करने और इज्तेहाद करने में उनसे गलती हो तब भी वो सवाब पायेंगे....*_

_*📕 صحيح البخاري،،، جلد-2،،، الصفحة- { 92}*_

_*🌹हज़रत इब्ने अब्बास रदिअल्लाहुु अन्ह का एक कौल तमाम सहाबा के बारे मे पढ़े :*_

*ولا تسبوا اصحاب محمد صلى الله عليه وسلم فلمقام أحدهم ساعة يعنى مع النبى صلى الله عليه وسلم خير من عمل أحدكم اربعين سنة*

_*📝तर्जुमा : तुम मुहम्मद ﷺ के साथ वालों को बुरा न कहो, उनका कुछ देर हुज़ूर के साथ रहना तुम्हारे 40 साल के अमल से बेहतर है।*_

_*📕 شرح العقيدة الطحاوية،،،، الصفحة- { 398}*_

_*कहां सहाबा का मक़ामे बुलंद और कहां ये ज़मीन की पस्तिया?*_

_*🌹रुखे मुस्तफा पर उनकी एक नज़र पड़ी तो सुरईया की बुलंदियों पर उन्हें पहुँचा दिया जो हमारे गुमान से भी वरा है।*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 09)*_
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_*💡आज से हम अपने मौज़ू (हज़रते सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह व उनकी शान) के बारे मे आप सभी को बताएँगे, अल्लाह हम सब को हक बोलने और हक पर अमल करने की तौफीक़ अता फरमाये...*_
_*🌹आमीन या रब्बुल आलमीन*_

_*हज़रत अमीर मुआविया बिन अबु सुफीयान عنهما الله رضي जलीलुल क़दर् सहाबी हैं, आप सहाबी,आपके वालिद सहाबी और आपकी वालिदा सहाबिया हैं। आप पहले शख्स हैं जिन्होंने इस्लाम मे बादशाहत क़ाइम की, नवासए रसूल ﷺ हज़रत सैय्यदना इमामे हसने मुज्तबा عنه تعالى الله رضى ने 6 माह खिलाफत के फराइज़ अन्जाम दे कर अपनी खुशी से हज़रत अमीर मुआविया की बैअत की और बारे खिलाफत हज़रत अमीर मुआविया को सौंपा।*_

_*इमाम हसन की इस सुलाह को हुज़ूर ﷺ ने पसंद फरमाया और पहले ही इसकी बसारत दी थी :*_

*ان ابنى هذا سيد لعل الله ان يصلح به بين فئتين عظيمتين من المسلمين*

_*📝तर्जुमा : मेरा ये बेटा सैय्यद (सरदार) है मुझे उम्मीद है कि अल्लाह पाक इसकेे ज़रिये 2 बड़े गिरोह इस्लाम मे सुलाह करा दे।*_

_*📕 सही बुखा़री, जिल्द 2, पेज-214, हदीस नं.-2704*_

*_तो अब हज़रत अमीर मुआविया पर फिस्क़ वगैरह का तान करने वाला हकी़कतन हज़रत इमाम हसन बल्कि हुज़ूर ﷺ बल्कि यहां तक कि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त पर तान करता है।_*

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 10)*_
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_*लगभग सब जानते हैं कि हज़रत अमीर मुआविआ और उनके वालिद और वालिदा से बुग्ज़ो ईनाद सिर्फ राफज़ियों को है और अब उनके नक्शे कदम पर चलते हुए अजमेर शरीफ के राफ्जी मुजावर भी हुब्बे अली और बुग्ज़े अमीर मुआविया में अपनी राफ्ज़ियत का इज़्हार कर रहे हैं।*_

_*🌹हज़रत अमीर मुआविया अज़ीम सहाबी हैं और कातिबीने वही(वही के लिखने वाले 13 सहाबा मे से एक) हैं अल्लामा इब्ने कसीर लिखते हैं :*_

*وكتب الوحى بين يديه مع الكتاب*

_*📜तर्जुमा : अमीर मुआविया ख़ुतूत की किताबत के साथ वही की किताबत का भी काम करते थे...*_

*📕 البداية والنهاية، جلد-8،، الصفحة- {117}*

_*अगर हज़रत अमीर मुआविया की ज़ात को मजरूह किया जाये तो कुरान और हदीस पर एेतेमाद कैसे किया जा सकता है❓*_

_*जबकि लिखने वालों मे अमीर मुआविया भी हैं और अमीर मुआविया वो जिनको हुज़ूर ﷺ ने इस उम्मत का मामू फरमाया चुंकि आपकी बहन हुज़ूर ﷺ ने निकाह मे थी, आपके लिए हुज़ूर ने ये दुआ भी फरमाई :*_

*اللهم اجعله هاديا مهديا واهديه*

_*📜तर्जुमा : ऐ अल्लाह मुआविया को हिदायत देने वाला और हिदायत याफ्ता बना और इसके ज़रिये लोगों को हिदायत दे।*_

_*📕 तिर्मिजी शरीफ, जिल्द-2, पेज-224*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 11)*_
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*_हादी व मह्दी बना दे_*

_*हज़रते सय्यिदुना अ़ब्दुर्रह़मान बिन अबी अ़मीरह रदिअल्लाहु अन्ह से रिवायत है कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया:*_

_*📝तर्जुमा : ऐ अल्लाह इन्हें (यानी हज़रते अमीरे मुआविआ) को हादी (हिदायत देने वाला) और मह्दी (हिदायत याफ़्ता) बना दे और इनके ज़रिये से लोगों को हिदायत दे।*_

_*📕 तिर्मिजी किताबुल मनाकिब, बाबुल मनाकिब मुअाविया बिन्त अबु सूफीयान, हदीस नं.-3868 जिल्द 5 सफा नं.455*_

_*हज़रते शाह वलिय्युल्लाह मुहद्दिसे देहलवी रहमतुल्लाह अलैह फरमाते हैं : अल्लाह के रसूल ﷺ ने सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहु अन्ह को हिदायत याफ़्ता और ज़रिअए हिदायत फ़रमाया क्यूंकि नबिये करीम ﷺ को मालूम था कि ये मुसलमानों के ख़लीफ़ा बनेंगे।*_

_*📕 इज़ालतूल खे़फा, मक़सद अव्वल, फस्ल 5, बयाने फितन, जिल्द 01, पेज नम्बर 527*_

*_📖 किताब व ह़़िक्मत सिखा दे_*

_*🌹हज़रते सय्यिदुना इ़रबाज़़ बिन सारिया रदिअल्लाहु अन्ह से रिवायत है कि रसूलअल्लाह ﷺ ने अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त की बारगाह में अ़र्ज़ की : ऐ अल्लाह!  मुआविया को किताब का इ़ल्म और ह़िक्मत सिखा और इसे अज़ाब से बचा।*_

_*📕 मोअजमे कबीर,मुस्लिमा बिन मख़लद, जिल्द नम्बर 19, सफ़ा नं.439, हदीस नं.1066, जिसे मजमउज़ जँवाई, किताबुल मनाकिब*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 12)*_
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*_दुनिया व आख़िरत में मग़फ़िरत याफ़्ता_*

_*🌹उम्मुल मोमिनीन हज़रते सय्यिदतुना आ़इशा सिद्दीक़ा रदिअल्लाहु अन्हा फरमाती हैं:- नबिये करीम ﷺ हज़रते उम्मे ह़बीबा रदिअल्लाहु अन्हा के पास जल्वा फ़रमा थे, किसी ने दरवाज़े पर दस्तक दी, हुज़ूर ﷺ ने फ़रमाया : देखो कौन है*_

_*अर्ज़ की : मुआविया है।*_
_*आप (हुज़ूर ﷺ) ने फरमाया  :- उन्हें बुला लो।*_

_*हज़रते सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहु अन्ह ख़िदमते अक़्दस में हाजिर हुए तो आपने कान पर ✒क़लम रखा हुआ था जिसे से आप किताबत फरमाया करते थे, नबिये करीम ﷺ ने फरमाया : मुआविया तुम्हारे कान पर कलम कैसा है❓*_

_*हज़रते सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहु अन्ह ने अर्ज़ की : मैं इस कलम को अल्लाह और उसके रसूल के लिए तैय्यार रखता हूँ।*_

_*नबिये करीम ﷺ ने फ़रमाया : अल्लाह तुम्हारे नबी की त़रफ़ से तुम्हें जज़ाए ख़ैर अता फ़रमाये, मेरी ख़्वाहिश है कि तुम सिर्फ़ वही की किताबत किया करो और मैं हर छोटा बड़ा काम अल्लाह की वही से कर*_

_*(यह बात सुन कर) ह़ज़रते सैय्यदतुना उम्मे ह़बीबा रदिअल्लाहु अन्हा उठीं और नबिये करीम ﷺ के रू-बरू बैठ कर अ़र्ज़ की :- या रसूलअल्लाह ﷺ ! क्या अल्लाह मेरे भाई को ख़िलाफ़त अ़त़ा फ़रमाएगा❓*_

_*🌹आप (रसूलअल्लाह ﷺ) ने फ़रमाया :- हां! लेकिन इस में आज़माइश है, आज़माइश है, आज़माइश है।*_

_*उम्मुल मोमिनीन ह़ज़रते सैय्यदतुना उम्मे ह़बीबा रदिअल्लाहु अन्हा ने अर्ज़ की : या रसूलअल्लाह ﷺ आप इनके लिए दुआ़ फ़रमा दीजिए।*_

_*🤲🏻नबिये करीम ﷺ ने दुआ़ की :-*_

_*📝तर्जुमा : "ऐ अल्लाह मुआविया को हिदायत पर साबित क़दमी अ़ता़ फ़रमा, इन्हें हलाकत से मह़फ़ूज़ फ़रमा और दुनिया व आख़िरत में इन की मग़्फ़िरत फ़रमा।"*_
_*(सुभानअल्लाह)*_

_*📕 मोअजमे अहमद, मीन ईस्मेही अहमद, जिल्द 01, पेज नम्बर 497, हदीस नम्बर 1838*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 13)*_
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        *_✨इसे इ़ल्म व ह़िल्म से भर दे✨_*

_*🌹हज़रते सैय्यदना वहशी रदिअल्लाहु अन्ह फ़रमाते हैं :- एक बार हज़रते सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहु अन्ह नबिये करीम ﷺ के साथ सवारी पर बैठे हुए थे। नबिये करीम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया :- तुम्हारे जिस्म का कौन सा ह़िस्सा मेरे जिस्म से मस हो रहा है?*_

_*💫"हज़रते सैय्यदना अमीरे मुुआविया  रदिअल्लाहु अन्ह ने अर्ज़ की :- मेरा पेट।"*_

_*🌹नबिये करीम ﷺ ने दुआ फ़रमाई :- ऐ अल्लाह इसे इ़ल्म व ह़िल्म से मा'मूर फ़रमा दे।*_

*_📕 ख़स़ाईसे कुबरा,ज़िक्रुल मोअजज़ात, फि इजाबतूद दाअवात, आख़िर तक, बाबो जामे मिन दाअवातेहि, आख़िर तक, जिल्द 02, पेज नम्बर 293_*

*_🔥आग के त़ौक़ की वई़द_*

_*🌹नबिये करीम, रऊफ़ुर्रहीम ﷺ ने इरशाद फ़रमाया :- ऐ मुआविया जो तेरी फ़ज़ीलत में शक करे वोह क़यामत के रोज यूं उठाया जाएगा कि उसके गले में आग का त़ौक़ होगा।*_

_*📕 तारीख़े इब्ने असाकिर, मोआविया बिन सख़र, जिल्द नम्बर 59, पेज नम्बर 90*_

_*✍🏻टीम: बज़्म-ए-नूरी, भोपाल*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 14)*_
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_*👉🏻आज कल बहुत ज्यादा देखने और सुनने में आया है कि कुछ लोग डॉ. ताहिरुल पादरी, उनके कुछ चटुए-भटुए और अजमेर शरीफ के कुछ राफ्जी ख़ुद्दाम (कामरान चरसी) कह रहे हैं कि हज़रत अमीरे मुआविया के बारे में कभी किसी मोहद्दिसीन ने उनके मरातिब बयान नहीं किया है और मस्लके आला हजरत वाले जो हज़रत अमीरे मुआविया का अपनी मेहफ़िलों में जिक्र करते हैं ये लोग ख़ारजी है (माज़अल्लाह)।*_

_*इन लोगों की नज़र में मसलके आला हज़रत मसलके ख़ारजीयत का नाम है (माज़अल्लाह सुम्मा माज़अल्लाह) ये सब बातें डॉ. पादरी और राफ्जी ख़ुद्दाम कामरान ने अपने बयान में कहा है, आप लोग YOUTUBE पर इनका बयान सुन सकते हैं।*_

_*💡सच तो ये है कि येे लोग राफ्जियत की तरफ गालिब हो चुके हैं और सिर्फ़ मुहिब्बे अहलेे बैत में, सहाबिये रसूल की गुस्ताख़ी करते हैं, अलहम्दुलिल्लाह हम सुन्नी बरेलवी मुहिब्बे अहले बैत भी हैं और मुहिब्बे सहाबा भी है, हम अहले बैते अत़हर और बिलख़ुसुस हज़रत अली से भी मोहब्बत करते हैं और हम हज़रत अमीरे मुआविया से भी मोहब्बत करते हैं, अगर हज़रत अली पर उँगली उठाओगे तो हम उसका भी जवाब देना जानतेे हैं और बेशक हज़रत अली, मर्तबे में हज़रते अमीरे मुआविया से बहुत आला व अफ़ज़ल हैं और "उनके दरमियान में जो भी इख़्तिलाफात हुए उन्हें अल्लाह की मश्शियत समझ कर ज़बान बन्द रखी जाये" (सरकार गौसेे आज़म)।*_ _(रदिअल्लाहुअन्हु)_

_*🤲🏻अल्लाह एेसे राफ्जी बदअकीदा गुमराह लोगों से हमारी हिफाज़त फरमाये..... आमीन या रब्बुल आलमीन*_

_*📖किताबुल्लाह के अमीन 📖*_

*_🌹हज़रते सैय्यदना इब्ने अब्बास रदिअल्लाहु अन्ह से रिवायत है कि एक दिन हज़रते सैय्यदना जिब्रीले अमीं अलैहिस्सलाम बारगाहे रिसालत में हाजिर हुए और अर्ज़ की :- या रसूलअल्लाह ﷺ अमीरे मुआविया को मेरा सलाम कहिए और उन से हुस्ने सुलूक फ़रमाइए क्यूंकी वोह किताबुल्लाह और वह्'ये इलाही पर अल्लाह के अमीन हैं और वो बहुत अच्छे अमीन हैं।_*

_*📕 मोअजमे अवसत, मिन ईस्मेही अली, जिल्द नम्बर 03, पेज नम्बर 73, हदीस नम्बर 3902, अलबेदाया वन नेहाया, सन साठ हिजरी।*_

_*✍🏻टीम: बज़्म-ए-नूरी, भोपाल*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 15)*_
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*_मैं अली से मोहब्बत करता हूं_*

_*❤ सैय्यदना इब्ने अब्बास रदिअल्लाहो तआला अन्ह ने फ़रमाया : मैं नबिये करीम ﷺ की बारगाह में हाज़िर था, हज़रत सैय्यदना अबू बक्र सिद्दीक़, हज़रत सैय्यदना उ़मर फ़ारूक़, हज़रत सैय्यदना उस्माने ग़नी और हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह भी मौजूद थे।*_

_*👉🏻अचानक हज़रत सैय्यदना अलिय़्युल मुर्तज़ा रदिअल्लाहो तआला अन्ह तशरीफ़ लाए।*_

_*नबिये करीम ﷺ ने हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह से फ़रमाया : ऐ मुआविया! क्या तुम अली से मोहब्बत करते हो❓*_

_*🌹हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह ने अर्ज़ की : उस ज़ात की कसम जिस के सिवा कोई मा'बूद नहीं मैं अल्लाह के लिए इनसे बहुत मोहब्बत करता हूं।*_

_*🌹आक़ाए दो जहां ﷺ ने फ़रमाया : बेशक अ़न क़रीब तुम दोनों के दरमियान आज़माइश होगी।*_

_*❤ हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह ने अर्ज़ की या रसूलअल्लाह ﷺ इसके बाद क्या होगा❓*_

_*शफ़ीए उम्मत, मालिके़ जन्नत ﷺ ने फ़रमाया : इसके बाद अल्लाह की मुआफ़ी, उसकी रिज़ामन्दी और जन्नत में दाख़िला।*_

_*हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह ने अर्ज़ की : हम अल्लाह के फ़ैसले पर राज़ी हैं और उस वक्त ये आयत नाज़िल हुई :*_

*وَ لَوۡ شَآءَ اللّٰہُ  مَا اقۡتَتَلُوۡا ۟ وَ لٰکِنَّ اللّٰہَ یَفۡعَلُ  مَا یُرِیۡدُ*

_*🌹तर्जमाए कन्ज़ुल ईमान :- और अल्लाह चाहता तो वोह न  लड़ते मगर अल्लाह जो चाहे करे।*_

*_📕 पारा 3, सुरह अलबक़रह, आयत नम्बर 253_*
*_📕 तारीख़े इब्ने अदाकार, मोआविया बिन सख़र, जिल्द नम्बर 59, पेज नम्बर 139_*

_*✍🏻टीम: बज़्म-ए-नूरी, भोपाल*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 16)*_
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*_💐हक़ किए साथ फ़ैसला करने वाले 💐_*

_*फ़ातेह़े मिश्र हज़रते सैय्यदना सा'द बिन अबी वक़्क़ास रदिअल्लाहु अन्ह फ़रमाते हैं : मैंने अमीरुल मोमिनीन हज़रते सैय्यदना उस्माने ग़नी रदिअल्लाहु अन्ह के बाद ह़क़ के साथ फ़ैसला करने वाला हज़रते सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहु अन्ह से बेहतर नहीं देखा।*_

_*📕 तारीख़े इब्ने असाकिर, मोआविया बिन सख़र, जिल्द नम्बर 59, पेज नम्बर 161*_

*_🌹ऐसा सरदार नहीं देखा 🌹_*

_*हज़रते सैय्यदना अ़ब्दुल्लाह बिन उमर रदिअल्लाहु अन्ह फ़रमाते हैं : मैंने रसूलअल्लाहﷺ के बाद हज़रते सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहु अन्ह जैसा कोई सरदार नहीं देखा।*_

_*📕 मोअजमे कबीर, मिम्मा अस्नदा अब्दुल्लाह ईब्ने उमर, जिल्द नम्बर 12, पेज नम्बर 387, हदीस नम्बर 13432*_

*_🍂नमाज़ में सब से ज़्यादा मुशाबहत🍂_*

_*🌹हज़रते सैय्यदना अबू दरदा रदिअल्लाहु अन्ह फ़रमाते हैं : मैंने हज़रते सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहु अन्ह के अलावा कोई ऐसा शख़्स नहीं देखा जिस की नमाज़ नबिएे करीम ﷺ की नमाज से ज़्यादा मुशाबहत रखती हो।*_

_*📕 मजमउज - ज़वाईद, किताबुल मनाकिब,  बाबो मा जाअ फि मोआविया, जिल्द नम्बर 9, पेज नम्बर 595, हदीस नम्बर 15920*_

_*✍🏻टीम: बज़्म-ए-नूरी, भोपाल*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 17)*_
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*_🌹मुस्तफ़ा करीम के सामने लिखने वाले_*

*_हज़रते सैय्यदना अ़ब्दुल्लाह इब्ने अम़्र रदिअल्लाहु अन्ह फ़रमाते हैं : हज़रते सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहु अन्ह नबिएे करीम ﷺ के सामने बैठ कर लिखा करते थे।_*

_*📕 मजमउज़ ज़वाईद, किताबुल मनाकिब, बाबो मा जाअ फि5 मोआविया, जिल्द नम्बर 09, पेज नम्बर 596, हदीस नम्बर 15924*_

*_💐अमीरे मुआविया का ज़िक्र ख़ैर से ही करो_*

*_हज़रते सैय्यदना उ़मैर बिन सा'द रदिअल्लाहु अन्ह फ़रमाते हैं :- हज़रते सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहु अन्ह का ज़िक्र ख़ैर से ही करो।_*

_*📕 तिर्मिज़ी, किताबुल मनाकिब, बाबो मोआविया बिन अबी सुफयान, जिल्द नम्बर 05, पेज नम्बर 455, हदीस नम्बर 3869*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 18)*_
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*_ज़बान बन्द रखी जाये_*

_*🌹पीराने पीर रौशन ज़मीर हज़रत सैय्यदना ग़ौसुल आज़म सैय्यद अ़ब्दुल क़ादिर जीलानी रदिअल्लाहो तआला अन्ह फ़रमाते हैं : "हज़रत सैय्यदना अ़लिय्युल मुुर्तज़ा रदिअल्लाहो तआला अन्ह और हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह के दरमियान जो भी इख़्तिलाफ़ात हुए उन्हें अल्लाह की मश्शियत समझ कर ज़बान बन्द रखी जाये।"*_

*_📕 अलग़ुनिया, अलक़िस्मुस्सानि, अलअक़ाइद वलफेरक़अल्इसस्लामिया, फि फज़लिल उम्मह अल मोहम्मदीया, जिल्द नम्बर 01, पेज नम्बर 161_*

*_💡ऐसे शख़्स से ताल्लुक़ न रखो_*

_*☝🏻एक दफ़ा हज़रत सैय्यदना इमाम अहमद बिन ह़म्बल रदिअल्लाहो तआला अन्ह की बारगाह में अर्ज़ किया गया : यहां एक शख़्स ऐसा भी है जो हज़रत सैय्यदना उ़मर बिन अ़ब्दुल अ़ज़ीज़ रदिअल्लाहो तआला अन्ह को हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह पर फ़ज़ीलत देता है.?*_

_*🌹हज़रत सैय्यदना इमाम अहमद बिन ह़म्बल रदिअल्लाहो तआला अन्ह फ़रमाते हैं: "न ऐसे शख़्स की सोहबत इख़्तेेयार करो, न ही उसके साथ खाओ पिओ और जब वोह बीमार हो जाए तो उसकी इ़यादत भी न करो।"*_

*_📕 जै़लो त़बक़ातील हनाबेलाह, वफियातुल मेअह अस्सादिसाह, यहया बिन अब्दुल वह्हाब बिन मोहम्मद, जिल्द नम्बर 03, पेज नम्बर 111_*

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 19)*_
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*_ताबेेई का मुकाबला सहाबी से करते हो_*

_*🌹हज़रत सैय्यदना मुआफ़ा बिन इमरान रदिअल्लाहो तआला अन्ह की बारगाह में सवाल किया : हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह अफ़ज़ल हैं या हज़रत सैय्यदना उमर बिन अब्दुल अ़ज़ीज़ रदिअल्लाहो तआला अन्ह....? ये सवाल सुनते ही आपके चेहरे पर जलाल के आसार नुमूदार हुए और निहायत सख़्ती से इरशाद फ़रमाया : क्या तुम एक ताबेई का सहाबी से मुक़ाबला करते हो? हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह तो नबिएे करीम ﷺ के सहाबी हैं, आप के ससुराली रिश्तेदार, नबिएे करीम ﷺ के कातिब और अल्लाह की तरफ से अता़कर्दा़ वह्'य के अमीन थे।*_

_*📕 अलबेदायाह वन नेहायाह, 60 हिजरी, व हाज़ेहि तरजूमातो मोआविया, जिल्द नम्बर 5, पेज नम्बर 643*_

*_अह्'ले बैत के ख़िदमतगार_*

_*🌹हज़रत सैय्यदना दाता गंज बख़्श सैय्यद अली हिजवेरी रदिअल्लाहो तआला अन्ह फ़रमाते हैं : हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह को हज़रत सैय्यदना इमामे हुसैन रदिअल्लाहो तआला अन्ह से ऐसी मोहब्बत थी कि आपको बेश क़िमती नज़राने पेश करने के बावजूद उनसे माज़िरत फ़रमाया करते थे : "फ़िलहाल मैं आपकी सह़ीह़ ख़िदमत नहीं कर सका, आइंदा मज़ीद नज़राना पेश करूंगा।"*_

_*📕 कशफुल महजूब, बाबो फि ज़िकरे अईम्मतेहिम मीन अहलिल बैत, पेज नम्बर 77*_

_*हमारे इमाम ने कितनी प्यारी बात कही है :*_

*_वो जो न थे तो कुछ न था, वो जो न हों तो कुछ न हो..._*
*_जान हैं वो जहांन की, जान है तो जहांन है..._*

_*एक जगह और इरशाद फ़रमाते हैं आला हज़रत :*_

*_ज़मीनों ज़मां तुम्हारे लिए, मकीनों मकां तुम्हारे लिए._*
*_चुनीनो चुनां तुम्हारे लिए, बने दो जहां तुम्हारे लिए..._*
*_दहन में ज़बा तुम्हारे लिए, बदन में है जां तुम्हारे लिए..._*
*_हम आए यहां तुम्हारे लिए, उठें भी वहां तुम्हारे लिए..._*

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 20)*_
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_*🕋अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का करम हुआ और आप सभी भाईयों की मोहब्बत की वजह से हम मुसलसल 20 दिनों से हज़रत अमीेरे मुआविया के ताल्लुक से उनकी शान में पोस्ट बना कर आप सभी की ख़िदमत में हाज़िर करते रहे, हम उन लोगों के बहुत शुक़्रगुज़ार है जिन लोगों ने हमारी मदद की और इस पैगाम को दूसरों तक पहुँचाया। आज हमारी इस मौज़ू पर आख़िरी पोस्ट है और हम बहुत जल्द ही एक नये उन्वान के तहत इसी तरह से पोस्ट बना कर आप सभी से जुड़े रहेंगे और आप भी हमारी पोस्ट का Response दिया कीजिए जिससे हमें अपने अगले उन्वान की पोस्ट बनाने में हौसला अफ़्ज़ाई हो।*_

_*मेेरे इमाम ने कितनी हक़ बात कह दी👇🏻*_

*_🌹शाने हज़रत अमीरे मुअाविया ब-ज़बाने इमामे अहले सुन्नत, मुजद्दिदे दीनो मिल्लत, हम सुन्नियों की जान, सरकार सैय्यदी आला हज़रत अज़ीमुल-बरक़त_*

_*🌹आला हज़रत अश्शाह इमाम अह़मद रज़ा खान फ़ाज़िले बरेलवी रदिअल्लाहो तआला अन्ह, हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह के फ़ज़ाइल के मुताल्लिक़ इरशाद फ़रमाते हैं : बा'ज जाहिल बोल उठते हैं कि हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह की फ़ज़ीलत में कोई हदीस सह़ीह़ नही है ये उनकी नादानी है। उल्माए मुहद्दिसीन अपनी इस्त़िलाह़ पर क़लाम फ़रमाते हैं, येह बे-समझे ख़ुदा जाने कहां से कहां ले जाते हैं? अ़ज़ीज़ व मुस्लिम की सिह़्ह़त नहीं फिर हसन क्या कम है? ह़सन भी न सही यहां ज़ईफ़ भी मुस्तह़्कम है।*_

_*📕 फ़तावा रज़विया शरीफ़ जिल्द 5, सफ़ा नं. 478*_

_*ये मसला जिसे समझने में कोई दिक्कत पेश आती हो तो अपनी मस्जिदों के इमाम से समझ ले, क्युंंकी क़लम आला हज़रत का है और आला हज़रत का लिखा हुआ क़लाम या उनकी बातें समझना हर किसी आम इंसान के बस की बात नहीं है और मेरी इन पोस्ट से जिसे भी तकलीफ हुई हो तो वो ख़ुद अपनी इस्लाह कर ले क्योंकि हक़ बात कढ़वी ही होती है।*_
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_*📝नोट : आप सभी सुन्नी सही-उल-अक़ीदा मुसलमान भाईयो से गुजारिश है हमारे अज़ीज़ दोस्त (आफ़ताब आलम क़ादरी रज़वी) भाई के लिए दुआ करे जिनकी मेहनत से हमे (फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्हु) की शान मे पोस्ट पड़ने को अता हुआ*_
_इन'शा'अल्लाह आगे भी वो हमे इल्मी पोस्ट अता करते रहेंगे_

_*📮उन्वान खत्म.....*_
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Al Waziftul Karima 👇🏻👇🏻👇🏻 https://drive.google.com/file/d/1NeA-5FJcBIAjXdTqQB143zIWBbiNDy_e/view?usp=drivesdk 100 Waliye ke wazai...