_*📚हदीस की रोशनी में {पोस्ट न. 15}*_
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_*🌀तबलीग जमाअत🌀*_
_*✨अल - विदाई कलिमात✨*_
_*💫इस किताब के खातमा पर मैं आप से चन्द आखिरी कलिमात कह कर रुख्सत हो रहा हूँ । अपनी तलाश व जुस्तजू के बाद तबलीगी जमाअत से मुतअल्लिक जितनी हदीसें मेरी नज़र में थीं मैंने आपके सामने पेश कर दीं । अब उन पर पुरखुलूस जज्बे के साथ गौर फरमाएं ।*_
_*✨आप अगर तबलीगी जमाअत के साथ मुंसलिक हैं तो मैं आपकी नीयत पर हमला नहीं करूंगा । हो सकता है कि आख़िरत का शौक़ ही आपको इस तरफ़ खींच कर ले गया हो लेकिन क्या एक लम्हे के लिए आप यह सोचने की ज़हमत गवारा फरमाएंगे कि मैंने अपनी किताब ' तबलीगी जमाअत ” में तबलीगी जमाअत के खिलाफ जितने हकाइक पेश किए हैं क्या वह सब के सब यकलख्त गलत और बेबुनियाद हैं ? फर्ज कीजिए आपके तईं सारे इल्ज़ामात गलत हैं तो क्या इन हदीसों को भी आप गलत कह दीजिएगा जिन के ज़रिया तबलीगी जमाअत से अलाहिदगी में रसूले पाक की खुशनूदी का पता चलता है । बहरहाल आपके तई तबलीगी जमाअत में अगर कुछ खैर का हिस्सा है तो अज़रूए इंसाफ “ शर " का हिस्सा उस से कहीं ज्यादा है । इसलिए थोड़े से खैर के लिए अपने आपको बहुत बड़े शर में मुब्तला कर देना न इस्लाम ही का मुतालबा है और न अक्ल ही का तकाज़ा ।*_
_*🌀तबलीगी जमाअत का साथ देने में उख़रवी मुज़र्रत का यकीन न सही इस सवाल का एहतमाल तो ज़रूर है कि रसूल की निशानदेही के बावजूद तुम ने ऐसी जमाअत का साथ क्यों दिया ? लेकिन अलाहिदा रहने में कोई खतरा नहीं , न दुनिया का न आख़िरत का ।*_
_*✨इस किताब की आखिरी सतरें लिखते हुए मैं रूहानी इत्मीनान महसूस करता हूँ कि उम्मत को एक अज़ीम ख़तरा से अहादीसे पाक की रौशनी में आगाह करने का फर्ज मैंने अपने सर से उतार दिया अब अंजाम के लिए फैसले की ज़िम्मेदारी उन लोगों पर है जिनके हाथों में यह किताब है । दुआ है कि खुदाए कदीर इस किताब के ज़रिया अपने सादा लौह बन्दों को सलामती की मंज़िल की तरफ वापसी की तौफीक मरहमत फरमाए ।*_
_*🤲🏻आमीन !*_
_*💫वसल्लल्लाहु तआला अला सैय्यिदना मुहम्मदिन व आलेही व सहबेही अज्मईन ।*_
_*✍🏻 मुसन्निफ़ : - हज़रत अल्लामा मौलाना अरशदुल क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह ।*_
_*📍The End*_
_*📕 तबलीग जमाअत हदीस की रोशनी में सफा, 30/31/32*_
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_*🌀तबलीग जमाअत🌀*_
_*✨अल - विदाई कलिमात✨*_
_*💫इस किताब के खातमा पर मैं आप से चन्द आखिरी कलिमात कह कर रुख्सत हो रहा हूँ । अपनी तलाश व जुस्तजू के बाद तबलीगी जमाअत से मुतअल्लिक जितनी हदीसें मेरी नज़र में थीं मैंने आपके सामने पेश कर दीं । अब उन पर पुरखुलूस जज्बे के साथ गौर फरमाएं ।*_
_*✨आप अगर तबलीगी जमाअत के साथ मुंसलिक हैं तो मैं आपकी नीयत पर हमला नहीं करूंगा । हो सकता है कि आख़िरत का शौक़ ही आपको इस तरफ़ खींच कर ले गया हो लेकिन क्या एक लम्हे के लिए आप यह सोचने की ज़हमत गवारा फरमाएंगे कि मैंने अपनी किताब ' तबलीगी जमाअत ” में तबलीगी जमाअत के खिलाफ जितने हकाइक पेश किए हैं क्या वह सब के सब यकलख्त गलत और बेबुनियाद हैं ? फर्ज कीजिए आपके तईं सारे इल्ज़ामात गलत हैं तो क्या इन हदीसों को भी आप गलत कह दीजिएगा जिन के ज़रिया तबलीगी जमाअत से अलाहिदगी में रसूले पाक की खुशनूदी का पता चलता है । बहरहाल आपके तई तबलीगी जमाअत में अगर कुछ खैर का हिस्सा है तो अज़रूए इंसाफ “ शर " का हिस्सा उस से कहीं ज्यादा है । इसलिए थोड़े से खैर के लिए अपने आपको बहुत बड़े शर में मुब्तला कर देना न इस्लाम ही का मुतालबा है और न अक्ल ही का तकाज़ा ।*_
_*🌀तबलीगी जमाअत का साथ देने में उख़रवी मुज़र्रत का यकीन न सही इस सवाल का एहतमाल तो ज़रूर है कि रसूल की निशानदेही के बावजूद तुम ने ऐसी जमाअत का साथ क्यों दिया ? लेकिन अलाहिदा रहने में कोई खतरा नहीं , न दुनिया का न आख़िरत का ।*_
_*✨इस किताब की आखिरी सतरें लिखते हुए मैं रूहानी इत्मीनान महसूस करता हूँ कि उम्मत को एक अज़ीम ख़तरा से अहादीसे पाक की रौशनी में आगाह करने का फर्ज मैंने अपने सर से उतार दिया अब अंजाम के लिए फैसले की ज़िम्मेदारी उन लोगों पर है जिनके हाथों में यह किताब है । दुआ है कि खुदाए कदीर इस किताब के ज़रिया अपने सादा लौह बन्दों को सलामती की मंज़िल की तरफ वापसी की तौफीक मरहमत फरमाए ।*_
_*🤲🏻आमीन !*_
_*💫वसल्लल्लाहु तआला अला सैय्यिदना मुहम्मदिन व आलेही व सहबेही अज्मईन ।*_
_*✍🏻 मुसन्निफ़ : - हज़रत अल्लामा मौलाना अरशदुल क़ादरी रहमतुल्लाह अलैह ।*_
_*📍The End*_
_*📕 तबलीग जमाअत हदीस की रोशनी में सफा, 30/31/32*_
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