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Wednesday, April 29, 2020


  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 123)*_
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 ‌     _*💦इस्तिन्जे के मुतअल्लिक मसाइल💦*_

_*📖मसअला : - पेशाब के बाद जिसको यह शक हो कि कोई कतरा बाकी रह गया या पेशाब फिर आयेगा तो उस पर इस्तिबरा करना यानी पेशाब के बाद ऐसा काम करना कि अगर कतरा रूका हो तो गिर जाये वाजिब है । भी इस्तिबरा टहलने से होता है या जमीन पर जोर से पाँव मारने या दाहिने पाँव को बायें या बायें को दाहिने पर रख कर ज़ोर करने या ऊँचाई से नीचे उतरने या नीचे से बलन्दी पर चढ़ने या खंकारने या बाई करवट पर लेटने से होता है और इस्तिबरा उस वक़्त तक करें कि दिल को इत्मिनान हो जाये । टहलने की मिकदार कुछ आलिमों ने चालीस कदम रखी है मगर सही यह है कि जितने में इत्मिनान हो जाये । इस्तिबरा का हुक्म मर्दो के लिये है औरत फारिग होने के बाद थोड़ी देर ठहरे फिर धो ले । पाखाने के बाद पानी से इस्तिन्जा का मुस्तहब तरीका यह है कि फैल कर बैठे और धीरे धीरे पानी डाले और उंगलियों के पेट से धोये उंगलियों का सिरा न लगे और पहले बीच की उंगली ऊँची रखे फिर जो उससे मिली है उसके बाद छंगुलिया ऊँची रखे और खूब मुबालगा के साथ ( खूब अच्छी तरह ) धोये । तीन उंगलियों से ज़्यादा से तहारत न करे और आहिस्ता - आहिस्ता मले यहाँ तक कि चिकनाई जाती रहे ।*_

_*📖मसअला : - हथेली से धोने से भी तहारत हो जायेगी ।*_ 

_*📖मसअला : - औरत हथेली से धोये और मर्द के मुकाबिले में ज्यादा फैल कर बैठे । तहारत के बाद हाथ पाक हो गये मगर धो लेना बल्कि मिट्टी लगाकर धोना मुस्तहब है । जाड़ों में गर्मियों के मुकाबले खूब धोये और अगर जाड़ों में गर्म पानी से इस्तिन्जा करे तो उसी कद्र मुबालगा करे जितना गर्मियों में मगर गर्म पानी से इस्तिन्जा ( तहारत करने ) में उतना सवाब नहीं जितना ठंडे पानी से और गर्म पानी से बीमारी का भी खतरा है ।*_

_*📖मसअला : - रोजे के दिनों में न ज्यादा फैल कर बैठे और न मुबालगा ( धोने में ज्यादती ) करे ।*_

_*📖मसअला : - मर्द लुंजा हो तो उसकी बीवी इस्तिन्जा करा दे और औरत ऐसी हो तो उसका शौहर और बीवी न हो या औरत के शौहर न हो तो किसी और रिश्तेदार बेटा बेटी भाई बहन से ही नहीं करा सकते माफ है ।*_

_*📖मसअला : - जमजम शरीफ से इस्तिन्जा पाक करना मकरूह है और ढेला न लिया हो तो नाजाइज़ ।*_

_*📖मसअला : - वुजू के बचे हुये पानी से तहारत करना अच्छा नहीं है ।*_

_*📖मसअला : - इस्तिन्जे के बचे हुये पानी से वुजू कर सकते हैं उस पानी को कुछ लोग फेंक देते हैं फेंकना नहीं चाहिए फेंकना फुजूलखर्ची है ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 95/96*_

_*📮बहारे शरिअत हिस्सा 2 खत्म हुआ इंशा'अल्लाह अब हिस्सा 3 से पोस्ट शुरुआत करेंगे*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 122)*_
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 ‌     _*💦इस्तिन्जे के मुतअल्लिक मसाइल💦*_

_*📖मसअला : - कागज से इस्तिन्जा मना है अगरचे उस पर कुछ लिखा न हो या अबूजहल ऐसे काफ़िर का नाम लिखा हो ।*_ 

_*📖मसअला : - दाहिने हाथ से इस्तिन्जा करना मकरूह है अगर किसी का बायाँ हाथ बेकार हो गया हो तो उसके लिए दाहिने हाथ से इस्तिन्जा करना जाइज़ है ।*_ 

_*📖मसअला : - पेशाब के आले को दाहिने हाथ से छूना या दाहिने हाथ में ढेला लेकर उससे इस्तिन्जा करना मकरूह है जिस ढेले से एक बार इस्तिन्जा कर लिया उसे दोबारा काम में लाना मकरूह है मगर दूसरी करवट उसकी साफ हो तो उससे कर सकते हैं ।*_ 

_*📖मसअला : - पाखाने के बाद मर्द के लिये ढेलों के इस्तेमाल का मुस्तहब तरीका यह है कि गर्मी के मौसम में पहला ढेला आगे से पीछे को ले जाये और दूसरा पीछे से आगे की तरफ और तीसरा आगे से पीछे की तरफ ले जाये । और जाड़ों में पहला पीछे से आगे को और दूसरा आगे से पीछे को और तीसरा पीछे से आगे को ले जाए ।*_

_*📖मसअला : - औरत पाखाने के बाद हर ज़माने में उसी तरह ढेले से इस्तिन्जा करे जैसे मर्दो के लिए गर्मियों में हुक्म है ।*_ 

_*📖मसअला : - पाक ढेले दाहिनी जानिब रखना और काम में लाने के बाद बाई तरफ इस तरह पर डाल देना कि जिस रूख में नजासत लगी हो नीचे हो मुस्तहब है ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 95*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 121)*_
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 ‌     _*💦इस्तिन्जे के मुतअल्लिक मसाइल💦*_

_*📖मसअला : - आगे या पीछे से जब नजासत निकले तो ढेलों से इस्तिन्जा करना सुन्नत है और अगर सिर्फ पानी ही से धोलिया तो भी जाइज़ है मगर मुस्तहब यह है कि ढेले लेने के बाद पानी से धोये ।*_

_*📖मसअला : - आगे और पीछे से पेशाब और पाखाने के सिवा कोई और नजासत जैसे खून पीप वगैरा निकले या उस जगह बाहर से कोई नजासत लग जाये तो भी ढेले से साफ कर लेने से तहारत हो जायेगी जबकि उस जगह से अलग न हो मगर धो डालना मुस्तहब है ।*_

_*📖मसअला : - ढेलों की कोई मुकर्रर गिन्ती सुन्नत नहीं बल्कि जितने से सफाई हो जाये तो अगर एक से सफाई होगई तो सुन्नत अदा होगई और अगर तीन ढेले लिए और फिर सफाई न हुई तो सुन्नत अदा न होगी । अलबत्ता मुस्तहब यह है कि ढेले ताक ( विषम ) हों और कम से कम तीन हों तो अगर एक या दो से सफाई हो जाये तो तीन की गिन्ती पूरी कर ले और अगर चार से सफाई हो जाये तो एक और बढ़ा ले कि ताक ढेले हो जायें ।*_

_*📖मसअला : - ढेलों से पाकी उस वक़्त होगी कि नजासत से नजासत निकलने की जगह या उस के आसपास की जगह एक दिरहम से ज़्यादा न सनी हो और अगर एक दिरहम से ज़्यादा सन जाये तो धोना फर्ज है मगर ढेले लेना अब भी सुन्नत है ।*_

_*📖मसअला : - कंकर पत्थर और फटा हुआ कपड़ा यह सब ढेले के हुक्म में है इन से भी साफ करना जाइज़ है मकरूह नहीं । दीवार से भी इस्तिन्ज़ा सुखाया जा सकता है मगर बशर्ते कि वह दूसरे की दीवार न हो । अगर दीवार दूसरे की हो या वक्फ हो तो उससे इस्तिन्जा करना मकरूह है और अगर कर लिया तो पाकी हासिल हो जायेगी । अगर किसी के पास किराये का मकान है ता उसकी दीवार से इस्तिन्जा सुखा सकता है ।*_

_*📖मसअला : - पराई दीवार से इस्तिन्जे के ढेले लेना जाइज़ नहीं अगर्चे वह मकान उसके किराये में हो ।*_

_*📖मसअला : - हड्डी , और खाने और गोबर , पक्की ईट , ठीकरी , शीशा , कोयला , जानवर के चार " और ऐसी चीज़ से जिसकी कुछ कीमत हो अगर्चे एक आध पैसा हो इन चीजों से इस्तिन्जा किया मकरूह है ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 94*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 119)*_
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 ‌     _*💦इस्तिन्जे के मुतअल्लिक मसाइल💦*_

_*📖मसअला : - जब आदमी पाखाने को जाये तो मुस्तहब है कि पाखाने से बाहर यह पढ़ ले :*_
بِسْمِ اللّٰهِ اللّٰہُمَّ اِنّ‌ِیْ اَعُوْذُ بِکَ مِنَلْخُبُثِ وَالْخَبَائِثِ
_*बिस्मिल्लाहि अल्लाहुम्मा इन्नी अऊजु बिका मिनल खुबसि बल खबाइसि*_

_*📝तर्जमा - " ऐ अल्लाह मैं तेरी पनाह माँगता हूँ नापाकी और शैतानों से " । फिर बायाँ पाँव दाखिल करे और निकलते वक़्त पहले दाहिना पैर बाहर निकाले और बाहर निकल कर यह पढ़े :*_
غُفْرَا نَکَ اَللْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِیْ اَذْھَبَ عَنّ‌ِیْ مَا یُؤْ ذِیْنِیْ وَاَمْسِکَ عَلَیَّ مَا یَنْفَعُنِیْ
_*गुफरानाका अल्लहम्दु लिल्ला हिल्लजी अजहबा अन्नी मा युअजीनी व अम सिक अलय्या मा यन फउनी*_

_*📝तर्जमा - " अल्लाह से मगफिरत का सवाल करता हूँ हम्द है अल्लाह के लिए उसने मेरे पेट से वह चीज निकाली जो मुझे तकलीफ देती और वह चीज रोकी जो मुझे नफा देगी ।*_

_*📖मसअला - पाखाना या पेशाब फिरते वक़्त या तहारत करने में या किसी वक़्त शर्मगाह खुली हो तो न किब्ले की तरफ मुंह हों और न पीठ हो और यह आम हुक्म है चाहे मकान के अन्दर हो या मैदान में अगर भूल से किब्ले की तरफ मुँह , पीट कर के बैठ गया तो याद आते ही फौरन रूख बदल दे कि इस में उम्मीद है कि फौरन उस के लिये मगफिरत कर दी जाये ।*_

_*📖मसअला - बच्चे को पाखाना पेशाब फिराने वाले को मकरूह है कि उस बच्चे का मुँह किब्ले को हो यह फिराने वाला गुनाह गार होगा ।*_

_*📖मसअला : - पाखाना पेशाब करते वक़्त सूरज और चाँद की तरफन मुंह हो न पीठ । ऐसे ही हवा के रुख पेशाब करना मना है ।*_

_*📖मसअला : - कुँए हौज या चश्में के किनारे या पानी में अगर्चे बहता हुआ हो या घाट पर या फलदार पेड़ के नीचे या उस खेत में जिस में खेती मौजद हो या साये में जहाँ लोग उठते बैठते हो या मस्जिद या ईदगाह के करीब में या कब्रिस्तान या रास्ते में या जिस जगह पर मवेशी बंधे हो इन सब जगह में पेशाब पाखाना मकरूह है यूँ ही जिस जगह वुजू या गस्ल किया जाता हो वहाँ पेशाब करना मकरूह है ।*_ 

_*📖मसअला : - खुद नीची जगह बैठना और पेशाब की धार ऊँची जगह गिरना यह मना ।*_

_*📖मसअला : - ऐसी सख्त ज़मीन पर जिस से पेशाब की छींटे उड़ कर आयें पेशाब करना मना है ऐसी जगह को कुरेद कर नर्म कर लेना चाहिये या गढ्ढा खोद कर पेशाब करना चाहिए ।*_

_*📖मसअला : - खड़े हो कर या लेट कर या नंगे हो कर पेशाब करना मकरूह है ।*_

_*📖मसअला : - नंगे सर पाखाना पेशाब को जाना या अपने साथ कोई ऐसी चीज ले जाना जिस पर कोई दुआ या अल्लाह और रसूल या किसी बुजुर्ग का नाम लिखा हो मना है युही बात करना भी मकरूह है ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 92/93*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 118)*_
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              _*💦इस्तिन्जे का बयान💦*_ 

_*📚हदीस न . 15 : - अबू दाऊद और इब्ने माजा मआज रदियल्लाहु तआला अन्हु से बयान करते हैं कि हुजूर ने फरमाया कि तीन चीजें लअ्नत का सबब है उनसे बचों वह तीन चीज़ें ये हैं*_
_*💫(1) खाट पर पेशाब करना*_
_*💫(2)बीच रास्ते में पेशाब करने से*_
_*💫(3) और पेड़ के साये में पेशाब करने से ।*_

_*📚हदीस न . 16 - इमामे अहमद तिर्मिजी और नसई उम्मुल मोमिनीन सिद्दीका रदियल्लाह अन्हा से रिवायत करते हैं कि वह फरमाती है कि जो शख्स तुम से यह कहे कि नबी ए करीम सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम खड़े हो कर पेशाब करते थे तो तुम उसे सच्चा न जानो हुजूर नहीं पेशाब  फरमाते मगर बैठ कर ।*_

_*📚हदीस न . 17 - इमाम अहमद , अबू दाऊद और इब्ने माजा अबू सईद रदियल्लाहु तआला अन्हु ने रिवायत करते है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि दो आदमी पाखाने को जायें और सत्र खोल कर बातें करें तो अल्लाह उन पर गजब फरमाता है ।*_

_*📚हदीस न 18 - बुखारी शरीफ और मुस्लिम शरीफ में अब्दुल्ला इब्ने अब्बास रदियल्लाहु ताल अन्हुमा से मरवी कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने दो कब्रों पर गुजर फरमाया तो यह फरमाया कि उन दोनों को अजाब होता है और किसी बड़ी बात में अजाब नहीं दिए जा र हैं उन में से एक पेशाब की छीट से नहीं बचता था और दूसरा चुगली खाता फिर हुजूर ने खजूर की एक तर शाख ले कर उसके दो हिस्से किए और हर कब्र पर एक एक टुकड़ा गाड दिशा सहाबा ने अर्ज किया कि या रसूलुल्लाह यह क्यूँ किया फरमाया इस उम्मीद पर कि जब तक यह खुश्क न हो उन पर अजाब में तखफीफ ( कमी ) हो*_

_*📍नोट - इस हदीस से पता चलता है कि कब्रों पर फूल डालना जाइज है कि फूल भी जब तक हरे भरे रहेगे अजाब हल्का होगा और इनकी तस्बीह से मय्यत का दिल बहलता है ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 91/92*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 117)*_
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              _*💦इस्तिन्जे का बयान💦*_ 

_*📚हदीस न . 7 : - हिस्ने हसीन में है कि हुजूर सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम इस तरह इरशाद फरमाते :*_
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِیْ اَخْرَجَ مِنْ بَطْنِیْ مَایَضُرُّ نِیْ وَاَبْقٰی فِیْهِ مَا یَنْفَعُنِیْ
_*अललहम्दु लिल्लाहिल लजी अखरजा मिम बतनी मा यदुर्रूनी व अब्का फीहि मा यन फउनी*_

_*📝तर्जमा : - " तारीफ है अल्लाह के लिये जिसने मेरे पेट से वह चीज़ निकाल दी जो मुझे तकलीफ देती और वह चीज़ बाकी रखी जो मुझे नफा देगी " ।*_

_*📚हदीस न . 8 : - कई किताबों में बहुत से सहाबए किराम रदियल्लाहु तआला अन्हुम से रिवायत है कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि जब पाखानों को जाओ तो किब्ले को न मुँह करो और न पीठ और उज्वे तनासुल ( पेशाब की जगह ) को दाहिने हाथ से इस्तिन्जा करने से मना फरमाया ।*_

_*📚हदीस न . 9 : - अबू दाऊद , तिर्मिज़ी और नसई अनस रदियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम जब बैतुलखला को जाते तो अगूंठी उतार लेते कि उसमें नामे मुबारक खुदा था ।*_

_*📚हदीस न . 10 : - अबू दाऊद और तिर्मिज़ी ने उन्हीं से रिवायत की कि जब हुजूर कज़ाये हाजत का इरादा फरमाते तो कपड़ा न हटाते जब तक कि ज़मीन से करीब न हो जाते ।*_

_*📚हदीस न . 11 : - अबू दाऊद जाबिर रदियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत करते हैं कि हुजूर जब कज़ाये हाजत को तशरीफ ले जाते तो इतनी दूर जाते कि उन्हें कोई न देखता ।*_

_*📚हदीस न . 12 : - हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने मसऊद रदियल्लाहु तआला अन्हु से तिर्मिजी और नसई ने रिवायत की कि हुजुर अकदस सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फ़रमाया कि गोबर और हड्डियों से इस्तिन्जा न करो कि वह तुम्हारे भाईयों जिन्नों की खुराक है और अबू दाऊद की एक रिवायत में कोयले से भी इस्तिन्जा मना फरमाया ।*_

_*📚हदीस न 13 : - अबू दाऊद तिर्मिज़ी और नसई अब्दुल्लाह इब्ने मिगफल रदियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि कोई गुस्लखाने में पेशाब न करे फिर उसमें नहाये या वुजू करे कि अक्सर वसवसे उसी से होते हैं ।*_

_*📚हदीस न14 : - अबू दाऊद और नसई अब्दुल्लाह इब्ने सरजिस रदियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत करते हैं कि हुजूर ने सूराख में पेशाब करने से मना फरमाया ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 91*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 116)*_
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_*💦इस्तिन्जे का बयान💦*_ 

_*🕋अल्लाह तआला फरमाता है :*_

_*📝तर्जमा : - " उस मस्जिद यानी मस्जिदे कुबा शरीफ में ऐसे लोग हैं जो पाक होने को पसन्द रखत हैं और अल्लाह दोस्त रखता है पाक होने वालों को ।*_

_*📚हदीस न . 1 - इब्ने माजा में अबू अय्यूब , जाबिर और अनस रदियल्लाहु तआला अन्हुम से रिवायत है कि जब यह आयत शरीफ नाज़िल हुई तो रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि ऐ गिरोहे अनसार अल्लाह तआला ने तहारत ( पाकी ) के बारे में तुम्हारी तारीफ की तो बताओ तुम्हारी तहारत क्या है ? उन्होंने अर्ज किया कि नमाज के लिये हम वुजू करते हैं , जनाबत से गुस्ल करते हैं और हम पाखाना करके पहले तीन ढेलों से जगह को पाक करते हैं उसके बाद फिर पानी से इस्तिन्जा करते हैं । फरमाया तो वह यही है इसको करते रहो ।*_

_*📚हदीस न . 2 : - अबू दाऊद और इब्ने माजा जैद इब्ने अरकम रदियल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि यह पाखाने ( लैट्रीने ) जिनों और शैतानों के हाज़िर रहने की जगह हैं तो जब कोई पाखाने को जाये तो यह दुआ पढ़ ले :*_
اَعُوْذُ بِاللّٰهِ مِنَ الْخُبُپِ وَ الْخَبَائِثِ
_*" अऊजु बिल्लाहि मिनल खुबसि वल खबाइसि*_

_*📝तर्जमा - मैं अल्लाह की पनाह माँगता हूँ पलीदी और शैतानों से ।*_

_*📚हदीस न . 3 : - बुखारी शरीफ और मुस्लिम शरीफ में यह दुआ इस तरह है :*_
اَللّٰہُمَّ اِنّ‌‌ِیْ اَعُوْذَ بِکَ مِنَ الْخُبُثِ وَلْخَبَائِثِ
_*अल्लाहुम्मा इन्नी अऊजु बिका मिनल खुबसि वल खबाइसि*_

_*📝तर्जमा : - ऐ अल्लाह मैं तेरी पनाह माँगता हूँ पलीदी और ( नापाकी ) और शैतानों से ।*_

_*📚हदीस न4 : - अमीरुल मोमिनीन हज़रते अली रदियल्लाहु तआला अन्हु से इस तरह रिवायत है कि जिन्नात की आँखों और औलादे आदम के सतर में पर्दा यह है , कि जब पाखाने को जाये तो कह ले:*_
*_بِسْمِ اللّٰهِ الرَّحْمٰنِ الرَّحِیْم_*
_*बिस्मिल्लाहिर्रहमानिर्रहीम*_

_*📚हदीस न . 5 : - तिर्मिजी इब्ने माजा और दारमी उम्मुल मोमिनीन सिददीका रदियल्लाह तआला अनहा से रिवायत करते हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम जब बैतुलखला से बाहर आते तो यूँ फरमाते :*_ 
_*غُفْرَا انَکَ गुफरानाका*_

_*📝तर्जमा : - अल्लाह से मगफिरत का सवाल करता हूँ ।*_ 

_*📚हदीस न . 6 : - इब्ने माजा की रिवायत हजरते अनस रदियल्लाहु तआला अन्हु से इस तरह है । जब हुजूर बैतुलखला से तशरीफ लाते तो यह फरमाते :*_
اَلْحَمْدُ لِلّٰهِ الَّذِیْ اَذْھَبَ عَنّ‌ِی الْاَذٰی وَعَافَانِیْ
_*अललहम्दु लिल्लाहिल लजी अजहबा अन्निल अज़ा व आफानी*_

_*📝तर्जमा : - " हम्द है अल्लाह के लिए जिसने अजीयत ( तकलीफ ) की चीज मुझ से दूर कर दी और मुझे आफियत ( आराम ) दी ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 90/91*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 115)*_
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_*🩸नजिस चीजों के पाक करने का तरीका*_

_*💫मसअला : - नापाक तेल के पाक करने का तरीका यह है कि उसमें उतना ही पानी डालकर खूब हिलाये फिर ऊपर से तेल निकाल लें और पानी फेंक दें यूँ ही तीन बार करें या उस बर्तन में नीचे तरीकों में से के पाक करना नहीं तो कि सूराख कर दें कि पानी बह जाये और तेल रह जाये ऐसे भी तीन बार में पाक हो जायेगा या ऐसा करें कि उतना ही पानी डाल कर उस तेल को पकायें यहाँ तक कि पानी जल जाये और तेल रह जाये यूँही तीन बार में पाक हो जायेगा और ऐसे भी कर सकते है कि पाक तेल या पानी दूसरे बर्तन में रखकर इस नापाक और उस पाक दोनों की धार मिलाकर ऊपर से गिरायें मगर इसमें यह जरूर ध्यान रखें कि नापाक की धार उसकी धार से किसी वक़्त अलग न हो और न उस बर्तन में कोई नापाक कतरा पहले से पहुँचा हो और न बाद को नहीं तो फिर नापाक हो जायेगा । बहती हुई आम चीजें घी वगैरा के पाक करने के भी यही तरीके है । और अगर घी जमा हो उसे पिघलाकर उन्हीं तरीकों में से किसी तरीके पर पाक करें और एक तरीका इन चीजों के पाक करने का यह भी है कि परनाले के नीचे कोई बरतन रखें और छत पर से उसी जिन्स की पाक चीज़ पानी के साथ इस तरह मिलाकर बहायें कि परनाले से दोनों धारें एक हो कर गिरें सब पाक हो जायेगा या उसी जिन्स या पानी से उबाल लें पाक हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - जानमाज में हाथ पांव पेशानी और नाक रखने की जगह का नमाज पढ़ने में पाक होना जरूरी है बाकी जगह अगर निजासत हो नमाज में हरज नहीं । हाँ नमाज़ में नजासत के कुर्ब से बचना चाहिए ।*_

_*💫मसअला : - किसी कपड़े में निजासत लगी और वह निजासत उसी तरफ रह गई दूसरी तरफ उसने असर नहीं किया तो उसको लौट कर दूसरी तरफ जिधर नजासत नहीं लगी है नमाज़ नहीं पढ़ सकते अगर्चे कितना ही मोटा हो मगर जबकि वह नजासत मवाजेए सूजूद ( सजदे वाली जगहों ) से अलग हो तो पढ़ सकते हैं ।*_

_*💫मसअला : - जो कपड़ा दो तह का है अगर एक तह उसकी नजिस हो जाए तो अगर दोनों मिलाकर सी लिए गए हों तो दूसरी तह पर नमाज़ जाइज नहीं और अगर सिले न हों तो जाइज़ है ।*_

_*💫मसअला : - लकड़ी का तख्ता एक रुख से नजिस हो गया तो अगर इतना मोटा है कि मोटाई में चिर सके तो लौट कर उस पर नमाज़ पढ़ सकते हैं वर्ना नहीं ।*_

_*💫मसअला : - जो ज़मीन गोबर से लेसी गई अगर्चे सूख गई हो उस पर नमाज़ जाइज नहीं । हाँ अगर वह सूख गई और उस पर कोई मोटा कपड़ा बिछा लिया तो उस पर नमाज पढ़ सकते हैं अगर्चे कपड़े में तरी हो मगर इतनी तरी न हो कि जमीन भीग कर उस को तर कर दे कि इस सूरत में यह कपड़ा नजिस हो जायेगा और नमाज़ न होगी ।*_

_*💫मसअला : - आँखों में नापाक सुर्मा या काजल लगाया या फैल गया तो धोना वाजिब है और अगर आँखों के अन्दर ही हो बाहर न लगा हो तो मुआफ है ।*_

_*💫मसअला : - किसी दूसरे मुसलमान के कपड़े में निजासत लगी देखी और गालिब गुमान है कि उस को खबर करेगा तो पाक कर लेगा तो खबर करना वाजिब है ।*_

_*💫मसअला : - फासिकों के इस्तेअमाली कपड़े जिनका नजिस होना मालूम न हो पाक समझे जायेंगे मगर बेनमाजी के पाजामे वगैरा में एहतियात यही है कि रुमाली पाक कर ली जाए क्यूंकि अकसर बेनमाजी पेशाब करके वैसे ही पाजामा बांध लेते हैं और कुफ्फार के इन कपड़ों के पाक करने में तो बहुत ख्याल करना चाहिए ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 88/89*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 114)*_
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_*🩸नजिस चीजों के पाक करने का तरीका*_

_*💫मसअला : - उपले जलाकर खाना पकाने को लोग मकरूह कहते हैं मगर ऐसा नहीं है बल्कि उपले जलाकर खाना पकाना जाइज है । जो चीज़ सूखने या रगड़ने से पाक हो गई उसके बाद भीग गई तो नापाक न होगी ।*_

_*💫मसअला : - सुअर के अलावा हर जानवर चाहे वह हलाल या हराम हो जब कि जिबह करने के काबिल हो और बिस्मिल्लाह कह कर जिबह किया गया हो तो उसका गोश्त और खाल पाक है कि नमाज़ी के पास अगर वह गोश्त है या उसकी खाल पर नमाज़ पढ़ी तो नमाज़ हो जायेगी मगर हराम जानवर जिबह करने से हलाल न होगा बल्कि हराम ही रहेगा ।*_

_*💫मसअला : - सुअर के सिवा हर मुर्दार जानवर की खाल सुखाने से पाक हो जाती है चाहे उसको खारी नमक वगैरा किसी दवा से पकाया हो या सिर्फ धूप या हवा में सुखा लिया हो और उसकी तमाम रतूबत खत्म होकर बदबू जाती रही हो तो इन दोनों सूरतों में पाक हो जायेगी और उस पर नमाज जाइज होगी ।*_

_*💫मसअला : - दरिन्दे की खाल अगर्चे पकाली गई हो , न तो उस पर बैठना चाहिए और न उस पर नमाज पढ़नी चाहिये क्योंकि इससे मिजाज में सख्ती और गुरूर पैदा होता है । बकरी और मेंढे की खाल पर बैठने और पहनने से मिज़ाज में नर्मी और आजिजी पैदा होती है । कुत्ते की खाल अगर्च पकाली गई हो या वह ज़िबह कर लिया गया हो इस्तिअमाल में न लाना चाहिए कि इमामों का इस में इख्तिलाफ़ और लोगों को इस से नफरत है इसलिए इस से बचना ही ठीक है ।*_

_*💫मसअला : - रूई का अगर इतना हिस्सा नजिस है कि उसे धुनने से उड़ जाने का सही गुमान हो तो रूई धुनने से पाक हो जायेगी नहीं तो बिना धोये पाक न होगी । हाँ अगर यह पता न हो कि रूई कितनी नजिस है तो भी धुनने से पाक हो जायेगी ।*_

_*💫मसअला : - गल्ला जब पैर में हो और उसके निकालते वक़्त बैलों ने उस पर पेशाब किया तो अगर गल्ला चन्द शरीकों में तकसीम हुआ या उसमें से मज़दूरी दी गई या खैरात की तो सब पाक हो गया और अगर गल्ला सब का सब उसी तरह मौजूद है तो नापाक है अगर उसमें से इस कद्र धोकर पाक कर लें कि जिसमें यह एहतेमाल ( शक ) हो सके कि इससे ज्यादा नजिस न होगा तो सब पाक हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - रांग और सीसा पिघलाने से पाक हो जाता है ।*_

_*💫मसअला : - जमे हुए घी में चूहा गिर कर मर गया तो चूहे के आस पास का घी निकाल डालें बाकी पाक है उसे खा सकते हैं और अगर पतला है तो सब नापाक हो गया उसका खाना जाइज नहीं अलबत्ता उसे ऐसे काम में ला सकते हैं कि जिसमें नजिस चीज़ों का इस्तेमाल मना न हो और तेल का भी यही हुक्म है ।*_

_*💫मसअला : - शहद नापाक हो जाये तो उसके पाक करने का तरीका यह है कि उससे ज्यादा पानी डालकर इतना जोश दें कि शहद जितना था उतना ही रह जाये तीन बार ऐसा ही करें पाक हो जायेगा ।*_


_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 88*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 113)*_
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_*🩸नजिस चीजों के पाक करने का तरीका*_

_*💫मसअला : - बदन में अगर मनी लग जाये तो भी इसी तरह पाक हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - पेशाब कर के तहारत न की पानी से न ढ़ेले से और मनी उस जगह पर गुज़री जहाँ पेशाब लगा हुआ है तो यह मलने से पाक न होगी बल्कि धोना जरूरी है अगर तहारत कर चुका था या मनी जस्त करके यानी कूद कर निकली कि उस नजासत की जगह पर न गुज़री तो मलने से पाक हो जायेगी ।*_

_*💫मसअला : - जिस कपड़े को मलकर पाक कर लिया अगर वह पानी से भीग जाये तो नापाक न होगा ।*_

_*💫मसअला : - अगर मनी कपड़े में लगी है और अब तक तर है तो धोने से पाक होगा मलना काफी नहीं । यानी जब मनी सूख जाए तो मल कर पाक कर सकते हैं और तर होने की हालत में कपड़ा या बदन पाक करना है तो धोना जरूरी है ।*_

_*💫मसअला : - चमड़े वाले मोजे या जूते में दलदार नजासत लगी जैसे पाखाना गोबर या मनी तो अगर्च वह नजासत तर हो खुरचने और रगड़ने से पाक हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - और अगर पेशाब की तरह कोई पतली नजासत चमड़े वाले जूते या चमड़े वाले मोजे में लगी हो और उस पर मिट्टी या राख या रेता वगैरा डाल कर रगड़ डालें जब भी पाक हो जायेगी और अगर ऐसा न किया यहाँ तक कि वह नजासत सूख गई तो अब बे - धोये पाक न होगी ।*_

_*💫मसअला : - अगर नापाक ज़मीन सूख जाये और नजासत का असर यानी रंग और बू जाती रहे तो पाक हो जायेगी चाहे वह हवा से सूखी हो या धूप या आग से मगर उससे तयम्मुम करना जाइज़ नहीं अलबत्ता उस पर नमाज़ पढ़ सकते हैं ।*_

_*💫मसअला : - जिस कुँए में नापाक पानी हो और वह कुँआ सूख जाये तो पाक हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - पेड़ , पौधे , घास , दीवार और ऐसी ईंट जो ज़मीन में जड़ी हो सूखने के बाद पाक हो जाती है और अगर ईंट जड़ी न हो तो सूखने से पाक न होगी बल्कि धोना ज़रूरी हैं । इसी तरह नापाक दरख्त या नापाक घास सूखने से पहले काट लीं तो पाक करने के लिए धोना जरूरी है ।*_

_*💫मसअला : - अगर पत्थर ऐसा हो कि ज़मीन से जुदा न हो सके तो खुश्क होने से पाक है नहीं तो धोने की ज़रूरत है ।*_

_*💫मसअला : - चक्की का पत्थर सूख जाने से पाक हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - कंकरी जो ज़मीन के ऊपर है सूखने से पाक न होगी , और जो जमीन में चिपकी हुई हो वह ज़मीन के हुक्म में है ।*_

_*💫मसअला : - जो चीज़ जमीन से लगी हुई थी और नजिस हो गई फिर सूखने के बाद अलग की गई तो अब भी पाक ही है ।*_

_*💫मसअला : - अगर किसी ने नापाक मिट्टी से बर्तन बनाये तो जब तक कच्चे हैं नापाक हैं लेकिन पकाने के बाद पाक हो जायेंगे ।*_

_*💫मसअला : - तन्दूर या तवे पर नापाक पानी का छींटा डाला और आँच से उसकी तरी जाती रही अब उसमें जो रोटी पकाई गई पाक है ।*_


_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 87*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 112)*_
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_*🩸नजिस चीजों के पाक करने का तरीका*_

_*💫मसअला : - नापाक बर्तन को मिट्टी से माँझ लेना बेहतर है ।*_

_*💫मसअला : - पकाया हुआ चमड़ा अगर नापाक हो गया तो अगर उसे निचोड़ सकते हैं तो निचोड़ें नहीं तो तीन बार धोयें और हर बार इतनी देर तक छोड़ दें कि पानी टपकना बन्द हो जाये ।*_

_*💫मसअला : - दरी टाट या कोई नापाक कपड़ा बहते पानी में रात भर पड़ा रहने दें तो पाक हो जायेगा और अस्ल यह है कि जितनी देर में यह गालिब गुमान हो जाये कि पानी से नजासत बह गई तो पाक हो गया बहते पानी से पाक करने में निचोड़ना शर्त नहीं ।*_

_*💫मसअला : - कपड़े का कोई हिस्सा नापाक हो गया और यह याद नहीं कि वह कौन सी जगह है तो बेहतर यही है कि पूरा ही धो डालें ( यानी जब बिल्कूल न मालूम हो कि किस हिस्से में नापाकी लगी है और अगर मालूम है कि जैसे आस्तीन या कली नजिस हो गई मगर यह नहीं मालूम कि आस्तीन या कली का कौन सा हिस्सा है तो आस्तीन या कली का धो लेना ही पूरे कपड़े का धोना है ) और अगर अन्दाज़ से सोचकर उसका कोई हिस्सा धो लें जब भी पाक हो जायेगा और जो बिला सोचे हुये कोई टुकड़ा धो लिया जब भी पाक है मगर इस सूरत में अगर चन्द नमाजें पढ़ने के बाद मालूम हो कि नजिस हिस्सा नहीं धोया गया तो फिर धोये और नमाजें लौटाये और जो सोच कर धो लिया था और बाद को गलती मालूम हुई तो अब धो ले लेकिन नमाजों के लौटाने की जरूरत नहीं ।*_

_*💫मसअला : - यह जरूरी नहीं कि एक दम तीनों बार धोयें बल्कि अलग - अलग वक़्तों बल्कि अलग - अलग दिनों में यह तादाद पूरी की जाये जब भी पाक हो जायेगा । मसअला : - लोहे की चीज़ जैसे चाकू तलवार और छुरी वगैरा जिसमें न जंग हो और न बेल , बूटे बने हों अगर उसमें नजासत लग जाये तो अच्छी तरह पोंछ डालने से वह छुरी या इस किस्म की दूसरी चीजें पाक हो जायेंगी और इस सूरत में नजासत के दलदार या पतली होने में कुछ फर्क नहीं । इसी तरह चाँदी , सोने , पीतल , गिलट और हर किस्म की धात की चीजें पोंछने से पाक हो जाती हैं । मगर शर्तः यह है कि नकशी न हों और अगर नकशी हों या लोहे में जंग हो तो धोना जरूरी है पोछने से पाक न होगी ।*_

_*💫मसअला : - आईना और शीशे की तमाम चीजें और चीनी के बर्तन या मिट्टी के रोगनी बर्तन या पालिश की हई लकड़ी गर्ज कि वह तमाम चीजें जिनमें सुराख न हों कपड़े या पत्ते से इस कद्र पोछ ली जाये कि नजासत का असर बिल्कुल जाता रहे तो पाक हो जाती हैं ।*_

_*💫मसअला : - मनी अंगर कपड़े में लग कर सूख जाये तो सिर्फ मलकर झाड़ने और साफ करने से कपड़ा पाक हो जायेगा अगर्चे मलने के बाद उसका कुछ असर कपड़े में बाकी रह जाये इस मसले में औरत , मर्द , इन्सान हैवान तन्दुरुस्त और जिरयान के मरीज़ सब की मनी का एक ही हुक्म है ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 86/87*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 111)*_
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_*🩸नजिस चीजों के पाक करने का तरीका*_

_*💫मसअला : - अगर नजासत पतली हो तो तीन बार धोने और तीन बार ज़ोर से निचोड़ने से पाक होगा और जोर के साथ निचोड़ने का मतलब यह है कि वह शख्स अपनी ताकत भर इस तरह निचोड़े कि अगर फिर निचोड़े तो उससे कोई कतरा न टपके अगर कपड़े का ख्याल करके अच्छी तरह नहीं निचोड़ा तो पाक न होगा ।*_

_*💫मसअला : - अगर धोने वाले ने अच्छी तरह निचोड़ लिया मगर अभी ऐसा है कि अगर कोई दूसरा शख्स जो ताकत में उससे ज्यादा है निचोड़े तो दो एक बूंद टपक सकती है तो धोने वाले के हक में पाक और इस दूसरे के हक में नापाक है इस दूसरे की ताकत का एअतेबार नहीं है हाँ अगर यह धोता और उसी कद्र निचोड़ता तो पाक न होता ।*_

_*💫मसअला : - पहली और दूसरी बार निचोडने के बाद हाथ पाक कर लेना ज़रूरी है और जो कपड़े में इतनी तरी रह गई हो कि निचोड़ने से एक आध बूंद टपकेगी तो कपड़ा और हाथ दोनों नापाक हैं ।*_

_*💫मसअला : - पहली या दूसरी बार हाथ पाक नहीं किया और उसकी तरी से कपड़े का पाक हिस्सा भीग गया तो यह भी नापाक हो गया फिर अगर पहली बार निचोड़ने के बाद भीगा है तो उसे दो बार धोना ज़रूरी है और दूसरी बार निचोड़ने के बाद हाथ की तरी से भीगा है तो एक बार धोया जाये । यूँही उस से जो एक बार धोकर निचोड़ लिया गया है कोई पाक कपड़ा भीग जाये तो यह दूसरा कपड़ा दो बार धोया जाये और अगर दूसरी बार निचोड़ने के बाद उससे वह कपड़ा भीगा तो एक बार धोने से पाक हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - कपड़ा कि तीन बार धोकर हर बार खूब निचोड़ लिया है कि अब निचोड़ने से न टपकेगा फिर उसको लटका दिया और उससे पानी टपका तो यह पानी पाक है और अगर खूब नहीं निचोड़ा था तो यह पानी नापाक है ।*_

_*💫मसअला : - दूध पीते लड़के और लड़की का एक ही हुक्म है कि उनका पेशाब कपडे या बदन में लगा है तो तीन बार धोना और निचोड़ना पड़ेगा ।*_

_*💫मसअला : - जो चीज निचोड़ने के काबिल नहीं है ( जैसे चटाई , बर्तन और जूता वगैरा ) उसको धोकर छोड़ दें कि पानी टपकना रुक जाये यँही दो मरतबा और धोयें तीसरी मरतबा जब पानी टपकना बन्द हो गया तो वह चीज़ पाक हो गई । उसे हर बार धोने के बाद सुखाना जरूपी नहीं , यूँही जो कपड़ा बहुत नाजुक होने की वजह से निचोड़ने के काबिल नहीं उसे भी ऐसे ही पाक किया जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - अगर ऐसी चीज़ हो कि उस में नजासत जज्ब न हुई जैसे चीनी के बर्तन या मिटटी का पुराना इस्तेमाली चिकना बर्तन या लोहे ताँबे पीतल वगैरा धातों की चीजें तो उसे सिर्फ तीन बार धो लेना काफी है इसकी भी जरूरत नहीं कि उसे इतनी देर छोड़ दें कि पानी टपकना रुक जाये ।*_


_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 85/86*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 110)*_
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_*🩸नजिस चीजों के पाक करने का तरीका*_

_*💫मसअला : - इस्तेमाल किये पानी और चाय से धोये तो पाक हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - थूक से अगर नजासत दूर हो जाये पाक हो जायेगा जैसे बच्चे ने दूध पीकर पिस्तान पर कै की फिर कई बार दूध पिया यहाँ तक कि उसका असर जाता रहा तो पाक हो गया और शराबी के मुँह का मसला ऊपर गुज़र चुका ।*_

_*💫मसअला : - दूध , शोंरबा और तेल से धोने से पाक न होगा कि उनसे नजासत दूर न होगी ।*_

_*💫मसअला : - नजासत अगर दलदार हो ( जैसे पाखाना , गोबर और खून वगैरा ) तो धोने में गिनती की कोई शर्त नहीं बल्कि उसको दूर करना ज़रूरी है तब पाक होगा अगर एक बार धोने से नापाकी दूर हो जाए तो एक ही मरतबा धोने से पाक हो जाएगा और अगर चार पाँच बार धोने से दूर हो तो चार पाँच बार धोना पड़ेगा हाँ अगर तीन मर्तबा से कम धोने में नजासत दूर हो जाये तो तीन बार पूरा कर लेना मुस्तहब है ।*_

_*💫मसअला : - अगर नजासत दूर हो गई मगर उसका कुछ असर रंग या बू बाकी है तो उसे भी दूर करना जरूरी है । हाँ अगर उसका असर मुश्किल से जाये तो असर दूर करने की ज़रूरत नहीं तीन बार धो लिया पाक हो गया । साबुन खटाई या गर्म पानी से धोने की ज़रूरत नहीं ।*_

_*💫मसअला : - कपड़े या हाथ में नजिस रंग लगा या नापाक मेंहदी लगाई तो इतनी बार धोयें कि साफ पानी गिरने लगे तो पाक हो जायेगा अगर्चे कपडे या हाथ पर रंग बाकी हो ।*_

_*💫मसअला : - जाफरान या रंग कपड़ा रंगने के लिये घोला था उसमें किसी बच्चे ने पेशाब कर दिया या और कोई नजासत पड़ गई तो उस से अगर कपडा रंग लिया तो तीन बार कपड़ा धो डालें तो पाक हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - गोदना कि सुई चुभोकर उस जगह सुर्मा भर देते हैं तो अगर खुन इतना निकला कि बहने के काबिल हो तो ज़ाहिर है कि वह खुन नापाक है और सुर्मा जो उस पर डाला गया वह भी नापाक हो गया फिर उस जगह को धो डालें पाक हो जायेगी अगर्चे नापाक सुर्मे का रंग भी बाका रहे यूँही जख्म में राख भर दी फिर धो लिया तो पाक हो गया अगर्चे रंग बाकी हो ।*_

_*💫मसअला : - कपड़े या बदन में नापाक तेल लगा था तो तीन बार धो लेने से पाक हो जायेगा अगर्चे तेल की चिकनाई मौजूद हो । इस तकल्लुफ की ज़रूरत नहीं कि साबुन या गर्म पानी से धोयें लेकिन अगर मुदीर की चरबी लगी थी तो जब तक उसकी चिकनाई न जाये पाक न होगा ।*_


_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 84/85*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 109)*_
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_*🩸नजिस चीजों के पाक करने का तरीका*_

_*✨जो चीजें ऐसी हैं कि वह खुद नजिस हैं ( जिनको नापाकी और नजासत कहते ) हैं जैसे शराब या गलीज ऐसी चीजें जब तक अपनी अस्ल को छोड़कर कुछ और न हो जायें पाक नहीं हो सकतीं शराब जब तक शराब है नजिस ही रहेगी और सिरका हो जाये तो अब पाक है ।*_

_*💫मसअला - जिस बर्तन में शराब थी और सिरका हो गई तो वह बर्तन भी अन्दर से उतना पाक हो गया जहाँ तक उस वक़्त सिरका है । अगर बर्तन के मुहँ पर शराब की छीटें पड़ी थीं वह शराब के सिरका होने से पाक न होंगी यँही अगर शराब मुहँ तक भरी फिर कुछ गिर गई कि बर्तन थोड़ा खाली हो गया उसके बाद सिरका हुई तो बर्तन के ऊपर का हिस्सा जो पहले नापाक हो चुका था पाक न होगा अगर सिरका उससे उंडेला जायेगा तो वह सिरका भी नापाक हो जायेगा क्यूँकि बर्तन के ऊपर का हिस्सा नापाक है हाँ अगर पली , चमचा वगैरा से निकाल लिया जाये तो पाक है और अगर प्याज लहसुन शराब में पड़ गये थे तो सिरका होने के बाद पाक हो गये ।*_

_*💫मसअला : - शराब में चूहा गिर कर फूल , फट गया तो सिरका होने के बाद भी पाक न होगा और अगर फूला फटा नहीं था तो अगर सिरका होने से पहले निकाल कर फेंक दिया उसके बाद सिरका हुई तो पाक है और अगर सिरका होने के बाद निकाल कर फेंका तो सिरका भी नापाक है ।*_


_*💫मसअला : - शराब में पेशाब का कतरा गिर गया या कुत्ते ने मुँह डाल दिया या नापाक सिरका मिला दिया तो सिरका होने के बाद भी हराम और नजिस है ।*_

_*💫मसअला : - मुसलमान के लिये शराब को खरीदना , मंगाना , उठाना या रखना हराम है अगर्चे सिरका करने की नियत से हो ।*_

_*💫मसअला : - नजिस जानवर नमक की खान में गिर कर नमक हो गया तो वह नमक पाक और हलाल है ।*_

_*💫मसअला : - उपले की राख पाक है और अगर राख होने से पहले बुझ गया तो नापाक है ।*_

_*💫मसअला : - जो चीजें ज़ाती तौर पर नजिस नहीं बल्कि किसी नजासत के लगने से नापाक हई उनके पाक करने के मुख्तलिफ तरीके हैं ।*_

_*💦पानी और हर बहने वाली पतली चीज़ से जिस से नजासत दूर हो जाये धो कर नजिस चीज़ को पाक कर सकते हैं जैसे सिरका और गुलाब कि उनसे नजासत दूर कर सकते हैं तो बदन या कपड़ा उन से धोकर पाक कर सकते हैं ।*_

_*📍फायदा : - बगैर ज़रूरत गुलाब और सिरके वगैरा से पाक करना नाजाइज है इसलिये कि फुजूलखर्ची है ।*_


_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 83/84*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 108)*_
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_*💠नजासतों के मुतअल्लिक अहकाम💠*_

_*💫मसअला : - उपले का धुआँ अगर रोटी में लगे तो रोटी नापाक न हई ।*_

_*💫मसअला : - कोई नजिस चीज़ दह - दर - दह पानी में फेंकी और उस फेंकने की वजह से पानी की छीटे कपड़े पर पड़ी तो कपड़ा नजिस न होगा । हाँ अगर मालूम हो कि यह छीटें उस नजिस चीज की हैं तो इस सूरत में नजिस हो जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - अगर पाखाने पर से मक्खियाँ उड़ कर कपड़े पर बैठीं तो कपड़ा नजिस न होगा ।*_

_*💫मसअला : - रास्ते की कीचड़ पाक है जब तक उसका नजिस होना मालूम न हो तो अगर पाँव या कपड़े में लगी और बे धोये नमाज पढ़ ली तो हो गयी मगर धो लेना बेहतर है ।*_

_*💫मसअला : - सड़क पर पानी छिड़का जा रहा था और जमीन से छीटें उड़ कर कपड़े पर पड़ी तो कपड़ा नजिस न हुआ मगर धो लेना बेहतर है ।*_

_*💫मसअला : - आदमी की खाल अगर्चे नाखून बराबर थोड़े पानी ( यानी दह - दर - दह से कम में ) पड़ जाये तो वह पानी नापाक हो गया और खुद नाखून गिर जाये नापाक नहीं ।*_

_*💫मसअला : - पेशाब पाखाने के बाद ढेले से इस्तिन्जा कर लिया फिर उस जगह से पसीना निकल कर कपड़े या बदन में लगा तो बदन और कपड़े नापाक न होंगे ।*_

_*💫मसअला : - अगर पाक मिट्टी में नापाक पानी मिलाया तो नजिस हो गई ।*_

_*💫मसअला : - अगर पाक मिट्टी में नापाक भुस मिलाया तो अगर थोड़ा हो पाक है और जो ज्यादा हो तो जब तक सूख न जाये नापाक है ।*_

_*💫मसअला : - कुत्ता बदन या कपड़े से छू जाये तो अगर्चे उसका जिस्म तर हो बदन और कपड़ा पाक है हाँ अगर उस के बदन पर नजासत लगी हो तो और बात है और अगर उसका लुआब लगे नापाक कर देगा ।*_

_*💫मसअला : - कुत्ता वगैरा किसी ऐसे जानवर ने जिसका लुआब नापाक है आटे में मुहँ डाला तो अगर गुंधा हुआ था तो जहाँ उसका मुहँ पड़ा उसको अलग कर दें और बाकी पाक है और सूखा तो जितना तर हो गया वह फेंक दें ।*_

_*💫मसअला : - इस्तिमाल किया हुआ पानी पाक है और नौसादर भी पाक है ।*_

_*💫मसअला : - सूअर के अलावा तमाम जानवर की वह हड्डी जिस पर मुदीर की चिकनाई न लगी हो पाक है और उनके बाल और दाँत भी पाक हैं ।*_

_*💫मसअला : - औरत के पेशाब की जगह से जो रतूबत निकले पाक है । अगर कपड़े या बदन में लगे तो धोना जरूरी नही हाँ बेहतर है ।*_

_*💫मसअला : - जो गोश्त सड़ गया और उस में से बदबू पैदा हो गई उसका खाना हराम है अगर्चे नजिस नहीं ।*_


_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 82/83*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 107)*_
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_*💠नजासतों के मुतअल्लिक अहकाम💠*_

_*💫मसअला : - रुई का कपड़ा उधेड़ा गया और उसके अन्दर चूहा सूखा हुआ मिला तो अगर उसमें सूराख है तो तीन दिन तीन रातों की नमाजें लौटाये और न हो तो जितनी नमाजें उससे पढ़ी है सब को लौटाये ।*_

_*💫मसअला : - किसी कपड़े या बदन पर चन्द जगह नजासते गलीज़ा लगी और किसी जगह दिरहम के बराबर नहीं मगर सब को मिलाकर दिरहम के बराबर है तो दिरहम के बराबर समझी जायेगी और ज्यादा है तो ज्यादा और नजासते खफीफा में भी मजमुआ ( कुल ) पर ही हुक्म दिया जायेगा ।*_

_*💫मसअला : - हराम जानवरों का दूध नजिस है अलबत्ता घोड़ी का दूध पाक है मगर खाना जाइज़ नहीं ।*_

_*💫मसअला : - चूहे की मेंगनी गेहूँ में मिलकर पिस गई या तेल में पड़ गई तो आटा और तेल पाक और हाँ अगर मजे में फर्क आ जाये तो नजिस है और अगर रोटी के अन्दर मिली तो उसके आस पास से थोड़ी सी अलग कर दें बाकी में कोई हर्ज नहीं ।*_

_*💫मसअला : - रेशम के कीड़े की बीट और उसका पानी पाक है ।*_

_*💫मसअला : - नापाक कपड़े में पाक कपड़ा या पाक में नापाक कपड़ा लपेटा और उस नापाक कपडे से यह पाक कपड़ा नम हो गया तो नापाक न होगा बशर्ते कि नजासत का रंग या बू उस पाक कपडे में जाहिर न हो वर्ना नम हो जाने से भी नापाक हो जायेगा । हाँ अगर भीग जाये तो नापाक हो जायेगा और यह उसी सूरत में है कि यह नापाक कपड़ा पानी से तर हुआ हो और अगर पेशाब या शराब की तरी उसमें है तो वह पाक कपड़ा नम हो जाने से भी नजिस हो जायेगा और अगर नापाक कपडा सूखा था और पाक तर था और उस पाक की तरी से वह नापाक तर हो गया और उस नापाक को इतनी तरी पहुँची किं उससे छूट कर इस पाक को लगी तो यह नापाक हो गया वर्ना नहीं ।*_

_*💫मसअला : - भीगे हुए पाँव नजिस जमीन या बिछौने पर रखे तो नापाक न होंगे अगर्चे पाँव की तरी का उस पर धब्बा मालूम हो अगर उस ज़मीन या बिछौने को इतनी तरी पहूँची कि उसकी तरी पाव को लगी तो पाँव नजिस हो जायेंगे ।*_

_*💫मसअला : - भीगी हुई नापाक ज़मीन या नजिस बिछौने पर सूखे हये पाँव रखे और पाँव में तरी आ गई तो नजिस हो गये और सील है तो नहीं ।*_

_*💫मसअला : - जिस जगह को गोबर से लेसा और वह सूख गई तो भीगा कपड़ा उस पर रखने से नजिस न होगा जब तक कपड़े की तरी उसे इतनी न पहुँचे कि उससे छूट कर कपड़े को लगे ।*_

_*💫मसअला : - नजिस कपड़ा पहनकर या नजिस बिछौने पर सोया और पसीना आया अगर पसीने से कपडे की वह नापाक जगह भीग गई फिर उससे बदन तर हो गया तो नापाक हो गया वरना नहीं ।*_

_*💫मसअला : - नापाक चीज पर हवा होकर गुजरी और बदन या कपड़े को लगी तो नापाक न होगा ।*_

_*💫मसअला : - नापाक चीज़ का धुआँ कपड़े या बदन को लगे तो नापाक नहीं ऐसे ही नापाक चीज के जलाने से जो धुंए ( भाप ) उठे उनसे भी नजिस न होगा अगर्चे उनसे कपड़ा भीग जाये । हाँ अगर नजासत का असर उसमें जाहिर हो तो नजिस हो जायेगा ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 82*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 106)*_
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_*💠नजासतों के मुतअल्लिक अहकाम💠*_

_*💫मसअला : - छिपकली या गिरगिट का खून नजासते गलीजा है ।*_

_*💫मसअला : - अंगूर का शीरा कपड़े पर पड़ा तो अगर्चे कई दिन गजर जायें कपड़ा पाक है ।*_

_*💫मसअला : - हाथी की सूंड की रतूबत और शेर , कुत्ते , चीते और दूसरे दरिन्दे चौपायों का लुआब नजासते गलीज़ा है ।*_

_*💫मसअला : - जिन जानवरों का गोश्त हलाल है जैसे गाय , बैल , भैंस बकरी और ऊँट वगैरा उनका पेशाब और घोड़े का पेशाब और जिस परिन्द का गोश्त हराम है चाहे शिकारी हों या नहीं जैसे कौआ , चील शिकरा , बाज़ बहरी उसकी बीट नजासते खफीफा है ।*_

_*💫मसअला : - चमगादड़ की बीट और पेशाब दोनों पाक हैं ।*_

_*💫मसअला : - जो परिन्द हलाल ऊँचे उड़ते हैं जैसे कबूतर , मैना , मुर्गाबी और काज़ उनकी बीट पाक है ।*_

_*💫मसअला : - हर चौपाये की जुगाली का वही हुक्म है जो उसके पाखाने का है ।*_

_*💫मसअला : - हर जानवर के पित्ते का वही हुक्म है जो उसके पेशाब का है । हराम जानवरों का पित्ता नजासते गलीज़ा और हलाल जानवरों का नजासते ख़फीफा है ।*_

_*💫मसअला : - नजासते गलीज़ा अगर खफीफा में मिल जाये तो कुल गलीज़ा है ।*_

_*💫मसअला : - मछली और पानी के दूसरे जानवरों और खटमल और मच्छर का खून और खच्चर और गधे का लुआब और पसीना पाक है ।*_

_*💫मसअला : - पेशाब की निहायत बारीक छींटे सुई की नोंक बराबर की बदन या कपड़े पर पड़ जायें तो कपड़ा और बदन पाक रहेगा ।*_

_*💫मसअला : - जिस कपड़े पर ऐसी ही पेशाब की बारीक छींटें पड़ गई अगर वह कपड़ा पानी में पड़ गया तो पानी भी नापाक न होगा ।*_

_*💫मसअला : - जो खून जख्म से बहा न हो वह पाक है ।*_

_*💫मसअला : - गोश्त , तिल्ली और कलेजी में जो खून बाकी रह गया पाक है और अगर यह चीजें बहते खून में सन जायें तो नापाक हैं , बगैर धोये पाक न होंगी ।*_

_*💫मसअला : - जो बच्चा मुर्दा पैदा हुआ हो उसको गोद में लेकर नमाज़ पढ़ी अगर्चे उसको गुस्ल दे लिया हो नमाज़ न होगी और अगर जिन्दा पैदा होकर मर गया और बे नहलाये गोद में लेकर नमाज़ पढ़ी जब भी न होगी । हाँ अगर उसको गुस्ल दे कर गोद में लिया था तो हो जायेगी मगर मुस्तहब के खिलाफ है । यह बातें उस वक़्त हैं कि मुसलमान का बच्चा हो और काफ़िर का मुर्दा बच्चा है तो किसी हाल में नमाज़ न होगी गुस्ल दिया हो या नहीं ।*_

_*💫मसअला : - अगर नमाज़ पढ़ी और जेब वगैरह में शीशी है और उसमें पेशाब या खून या शराब है तो नमाज़ न होगी और जेब में अंडा है और उसकी ज़र्दी खून हो चूकी है तो नमाज़ हो जायेगी ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 81*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 105)*_
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_*💠नजासतों के मुतअल्लिक अहकाम💠*_

_*💫मसअला : - नजासते गलीजा और खफीफा के जो अलग - अलग हुक्म बताये गये यह उसी वक़्त है कि बदन या कपड़े में लगे और अगर किसी पतली चीज़ जैसे पानी या सिरका में गिरे तो चाहे गलीजा हो या खफीफा कुल नापाक हो जायेगा अगर्चे एक कतरा गिरे जब तक वह पतली चीज कसरत की हद पर यानी दह - दर - दह न हो । दह - दर - दह का मतलब यह है कि लम्बाई दस हाथ और चौड़ाई दस हाथ . हो ( यानी जिसका क्षेत्रफल सौ हाथ हो ) और गहराई इतनी हो कि जमीन न खुले ।*_

_*💫मसअला : - इन्सान के बदन से जो ऐसी चीज़ निकले कि उससे गुस्ल या वुजू वाजिब हो नजासते गलीजा है जैसे पाखाना , पेशाब बहता खून , पीप , भर मुँह कै , हैज़ निफास , इस्तिहाज़ा का खून , मनी , मजी और वदी ।*_

_*💫मसअला : - शहीदे फिकही ( यानी वह शहीद जिसे गुस्ल नहीं दिया जाता ) उसका खून जब तक उसके बदन से जुदा न हो पाक है ।*_

_*💫मसअला : - दुखती आँख से जो पानी निकले नजासते गलीज़ा है यूँही नाफ या पिस्तान से दर्द के साथ पानी निकले नजासते गलीज़ा है ।*_

_*💫मसअला : - बलगमी रतूबत नाक या मुँह से निकले नजिस नहीं अगर्चे पेट से चढ़े या बीमारी के सबब हो ।*_

_*💫मसअला : - दूध पीते लड़के लड़की का पेशाब नजासते गलीज़ा है । यह जो अक्सर अवाम में मशहूर है कि दूध पीते बच्चों का पेशाब पाक है बिल्कुल गलत है ।*_

_*💫मसअला : - दूध पीने वाले बच्चे ने दूध डाल दिया अगर भर मुँह है तो नजासते गलीजा है ।*_

_*💫मसअला : - खुश्की के हर जानवर का बहता खून , मुर्दार का गोश्त और चर्बी ( यानी वह जानवर जिसमें बहता हुआ खून होता है अगर शरई तौर पर ज़िबह किये बगैर मर जाये मुर्दार है अगर्चे जिबह किया गया हो जैसे मजूसी या बुत परस्त या मुरतद का ज़बह किया हुआ जानवर अगर्चें उसने हलाल जानवर जैसे बकरी वगैरह को जिबह किया हो उसका गोश्त पोस्त सब नापाक हो गया और अगर हराम जानवर शरई तौर पर ज़बह कर लिया गया तो उसका गोश्त पाक हो गया अगर्चे खाना हराम है खिन्जीर कि वह नजिसुल ऐन है किसी तरह पाक नहीं हो सकता । ) हराम चौपाये जैसे कुत्ता , शेर , लोमड़ी , बिल्ली , चूहा , गधा , खच्चर , हाथी और सुअर का पाखाना , पेशाब और घोड़े की लीद और हर हलाल चौपाय का पाखाना जैसे गाय भैंस का गोबर , बकरी ऊँट की मेगनी और जो परिन्दा कि ऊँचा न उड़े उसकी बीट जैसे मुर्गी और बत्तख चाहे छोटी हो या बड़ी और हर किस्म की शराब और नशा लाने वाली ताड़ी और सेंधी और साँप का पाखाना पेशाब और उस जंगली साँप और मेंढक का गोश्त जिनमें बहता खून होता है अगर्चे ज़िबह किये गये हों यूँही उनकी खाल अगर्चे पका ली गई हो और सुअर का गोश्त हड्डी और बाल अगर्चे ज़िबह किया गया हो यह सब नजासते गलीजा हैं ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 80/81*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 104)*_
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_*💠नजासतों के मुतअल्लिक अहकाम💠*_

_*✨नजासत दो किस्म की हैं । एक वह जिसका हुक्म सख्त है उसको गलीजा कहते हैं । दूसरी वह जिसका हुक्म हल्का है उसे खफ़ीफ़ा कहते है ।*_

_*💫मसअला : - नजासते गलीज़ा का हुक्म यह है कि अगर कपड़े या बदन में एक दिरहम से ज्यादा लग जाये तो उसका पाक करना फ़र्ज़ है अगर बे पाक किये नमाज़ पढ़ ली तो होगी ही नहीं और अगर जान बूझकर पढ़ी तो गुनाह भी हुआ और अगर इस्तिकाफ ( हलका समझना ) की नियत से है तो कुफ्र है । और अगर दिरहम के बराबर है तो पाक करना वाजिब है अगर बे पाक किये नमाज़ पढ़ी तो मकरूहे तहरीमी हुई यानी ऐसी नमाज़ का लौटाना वाजिब है और जान बूझ कर पढ़ी तो गुनाहगार भी हुआ अगर दिरहम से कम है तो पाक करना सुन्नत है कि बे पाक किये नमाज़ हो गई मगर सुन्नत के खिलाफ है और उसका लौटाना बेहतर है ।*_

_*💫मसअला : - अगर नजासत गाढ़ी है जैसे पाखाना लीद या गोबर तो दिरहम के बराबर या कम या ज़्यादा के मना यह हैं कि वज़न में उस के बराबर या कम या ज़्यादा हो और दिरहम का वज़न इस जगह शरीअत में साढ़े चार माशे और ज़कात में तीन माशा 1-1-5 रत्ती है और अगर पतली है जैसे आदमी का पेशाब और शराब तो दिरहम से मुराद उसकी लम्बाई चौड़ाई है और शरीअत ने उसकी मिकदार हथेली की गहराई के बराबर बताई यानी हथेली खूब फैला कर बराबर रखें और उस पर आहिस्ता से इतना पानी डालें कि उससे ज्यादा पानी न रुक सके अब पानी का जितना फैलाव है उतना बड़ा दिरहम समझा जाये और उसकी मिकदार तकरीबन यहाँ के 10 रुपये के सिक्के के बराबर है ।*_

_*💫मसअला : - नजिस तेल कपडे पर गिरा और उस वक़्त दिरहम के बराबर न था फिर फैल कर दिरहम के बराबर हो गया तो उस में उलमा को बहुत इख्तिलाफ है लेकिन तरजीह इस बात में । कि पाक करना वाजिब हो गया ।*_

_*💫मसअला : - नजासते खफीफा का यह हक्म है कि कपड़े के जिस हिस्से या बदन के जिस उज्व में नजासत लगी है अगर उसकी चौथाई से कम है ( जैसे दामन में लगी है तो दामन की चौथा से कम , आस्तीन में लगी है तो आस्तीन की चौथाई से कम और ऐसे ही हाथ में हाथ की चौथाई से कम है ) तो माफ है कि उस से नमाज़ हो जायेगी और अगर पूरी चौथाई में हो तो बे धोये नमाज़ न होगी ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 79/80*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 02 (पोस्ट न. 103)*_
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_*💠नजासतों का बयान 💠*_

_*📚हदीस न . 1 : - सहीह बुखारी व मुस्लिम में असमा बिन्ते अबू बक्र रदियल्लाहु तआला अन्हुमा से मरवी कि एक औरत ने अर्ज की कि या रसूलल्लाह ! हम में जब किसी के कपड़े को हैज़ का खून लग जाये तो क्या करें ? फरमाया जब तुम में से किसी के कपड़े को हैज़ का खून लग जाये तो उ खुर्चे फिर पानी से धोये तब उसमें नमाज पढे ।*_

_*📚हदीस न . 2 : - सहीहैन में हैं  कि उम्मुल मोमिनीन सिददीका रदियल्लाह तआला अन्हा फ़रमाती हैं के रसलल्लह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के कपड़े से मनी को मैं धोती फिर हुजूर नमाज़ को तशरीफ ले जाते और धोने का निशान उसमें होता ।*_


_*📚हदीस न . 3 : - मुस्लिम शरीफ में है कि सिद्दीक़ा रदियल्लाह तआला अन्हा फरमाती हैं कि मैं रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम के कपड़े को मल डालती फिर हजुर उसमें नमाज़ पढ़ते ।*_

_*📚हदीस न4 : - सहीह मुस्लिम शरीफ़ में अब्दुल्ला इब्ने अब्बास रदियल्लाहु तआला अन्हुमा से मरवी हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं चमड़ा जब पका लिया जाए , पाक हो जाएगा ।*_

_*📚हदीस न . 5 : - इमामे मालिक उम्मुल मोमिनीन सिद्दीका रदियल्लाहु तआला अन्हा से रावी हैं कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने हुक्म फरमाया कि मुदीर की खालें जब कि पका ली जायें तो उन्हें काम में लाया जाये ।*_

_*📚हदीस न . 6 : - इमामे अहमद , अबू दाऊद और नसई ने रिवायत की कि रसूलुल्लाह सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम ने दरिन्दों की खाल से मना फ़रमाया है ।*_

_*📚हदीस न . 7 : - दूसरी रिवायत में है कि उनके पहनने और उन पर बैठने से मना फ़रमाया है ।*_

_*📕बहारे शरिअत हिस्सा 2, सफा 78/79*_

_*📮जारी रहेगा इन्शाअल्लाह.....*_
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Al Waziftul Karima 👇🏻👇🏻👇🏻 https://drive.google.com/file/d/1NeA-5FJcBIAjXdTqQB143zIWBbiNDy_e/view?usp=drivesdk 100 Waliye ke wazai...