Showing posts with label ज़िना (Sex) का बयान. Show all posts
Showing posts with label ज़िना (Sex) का बयान. Show all posts

Friday, September 28, 2018



                   *_ज़िना का बयान - 01_*
―――――――――――――――――――――

*_🔘यक़ीनन ज़िना गुनाहे अजीम (बडा) और  बहुत बड़ी बला है! यह इन्सान की दुनिया और आखिरत को तबाह व बर्बाद कर देता है!_* 

*_वह नौजवान जो काफीरों   (नास्तीको) की लड़कियों से  नाज़ाइज़ ताल्लुक़ात रखते है! (और यह समझते है के यह कोई गुनाह नही इसलिये के वह काफीरा (नास्तीक) है!) यह सख़्त जेहालत है! काफीरा (नास्तीक) लड़की से मुबाशरत (सोहबत) भी ज़िना ही कहलाएगी!_*

*_इसी तरह  काफीर, (नास्तीक)मजुसी, बुत परस्त, सितारा परस्त,  उन  से  निकाह किया तो निकाह ही नही होंगा बल्की वह भी महज जिना मे ही शुमार होंगा!_*

*_इसी तरह   जितने भी दीन से फिरे हुए बदमजहब  बातील फिर्के है!  उन  से  निकाह किया तो निकाह ही नही होंगा बल्की वह भी महज जिना ही कहलाएंगा जब तक की वह अकाइद ए बातीला से सच्ची तौबा न करे!_*

_*हदीस : अल्लाह के रसूल ﷺ ने इर्शाद फर्माया..*_

*_"शिर्क के बाद अल्लाह के नज़्दीक इस गुनाह से बड़ा कोई गुनाह नही की, एक शख्स किसी ऐसी औरत से सोहबत करे जो उस की बीवी नही!_*

_*और फर्माते है हमारे प्यारे आका हुजुर ﷺ*_

*_"जब कोई मर्द और औरत ज़िना करते है तो ईमान उन के सीने से निकल कर सर पर साए की तरह ठहर जाता है"।_*

*_📕मुका़शीफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 168_*

_*हदीस : हज़रत इकरमा ने हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास [रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा]से पूछा..*_

_*"ईमान किस तरह निकल जाता है"..? हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास ने अपने एक हाथ की उंगलियॉ दुसरे हाथ की उंगलियो मे डाली और फिर निकाल ली और फर्माया "इस तरह !"*_

*_📕बुखारी शरीफ,  जिल्द नं 3, बाब नं 968, हदीस नं 1713, सफा नं 614, अशअ़तुल लम्आत, जिल्द नं 1, सफा नं 287_*

_*हदीस : हज़रत अबूह़ुरैरा व इब्ने अब्बास [रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा] से रिवायत है कि ताजदार ए मदिना ﷺ ने इर्शाद फर्माया..*_

*_"मोमिन होते हुए तो कोई ज़िना कर ही नही सकता"!_*

*_📕 बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 968, हदीस नं 1714, सफा नं 614_*

_*हज़रत इमाम ग़ज़ाली [रदि अल्लाहु तआला अन्हु] रिवायत करते है..*_

*_" जिसने किसी गैर शादी-शुदा औरत का बोसा लिया, उसने गोया सत्तर कुवांरी लडकियों से जिना किया! और जिसने कुवांरी लडकी से जिना किया, तो गोया उसने सत्तर हजार शादी-शुदा औरतों से जिना किया!"_*

 *_📕 मुका़शीफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 169_*

 _*हज़रत इमाम ग़ज़ाली और हजरत इमाम अबुल्लैस समरकंदी  [रदि अल्लाहु तआला अन्हुमा] नकल करते है की..*_

_*"बाज सहाब-ए-किराम, से मरवी है कि ज़िना से बचो  इस में  ("छह" 6) मुसीबतें है जिन मे से तीन का तअ़ल्लुक़ दुनिया से और तीन का आख़िरत से है। दुनिया की मुसीबतें यह है..*_

1⃣ *_ज़िन्दगी मुख़्तसर (कम) हो जाती है।_*

2⃣ *_दुनिया में रिज़्क़ कम हो जाता है।_*

 3⃣ *_चेहरे से रौनक (नुरानियत) ख़त्म हो जाती है।_*

*_📌और आख़िरत की मुसीबतें येह है कि..!_*

4⃣ *_आख़िरत में खुदा की नाराज़गी_*

 5⃣ *_आख़िरत में सख़्त पूछ ताछ होगी।_*

 6⃣ *_ज़हन्नम में जाएगा और सख़्त अज़ाब़ पाएंगा!_*

*_📕 तंबीहुल गाफेलीन सफ 381, मुका़शीफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 168_*

_*रिवायत : हजरत मुसा अलैहिस्सलाम ने अल्लाह अज्जा व जल्ल से जिना करने वाले की सजा के बारे मे पुछा, तो रब तबारक व तआला ने इर्शाद फर्माया.*_

*_"ऐ मुसा! जिना करने वाले को मै आग की जिरह (आग का लिबास) पहनाऊंगा! जो ऐसा वजनी है की अगर बहुत बडे पहाड पर रख दिया जाएंगा तो वह (पहाड) भी रेजा-रेजा हो जाए"_*

*_📕 मुका़शीफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 168_*

_*📮जारी रहेगा.....!*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


                   *_ज़िना का बयान - 02_*
―――――――――――――――――――――

*_अल्लाह तबारक तआला इर्शाद फ़र्माता है!.._*

*وَ الَّذِیۡنَ لَا یَدۡعُوۡنَ مَعَ اللّٰہِ  اِلٰـہًا اٰخَرَ  وَ لَا یَقۡتُلُوۡنَ النَّفۡسَ الَّتِیۡ حَرَّمَ اللّٰہُ  اِلَّا بِالۡحَقِّ وَ لَا یَزۡنُوۡنَ ۚ وَ مَنۡ یَّفۡعَلۡ  ذٰلِکَ  یَلۡقَ  اَثَامًا ﴿ۙ۶۸﴾*

*_तर्जुमा : और वह लोग अल्लाह के साथ किसी दुसरे माबूद को नही पुजते, और इस जान को जिसकी अल्लाह ने हुरमत रखी नाहक नही मारते, और बदकारी नही करते, और जो यह काम करे वह सजा पाएंगा..! (यानी ज़िना करने वाले असाम में डाले जाएंगे..!)_*

*_📕 तर्जुमा :  क़ुरआन कंजुल इमान सूर ए फ़ुरक़ान, आयत नं 68_*

*_असाम के बारे में उलमा-ए-किराम ने कहा कि वह ज़हन्नम का एक ग़ार है, जब उस का मुँह खोला जाएगा तो उस की बदबू से तमाम ज़हन्नमी चीख उठेंगे ।_*

*_📕मुका़शफतुल क़ुलूब, बाब नं 22, सफा नं 167_*

*_हदीस : अल्लाह के रसुल ﷺ इर्शाद फरमाते है.._*

*_"सातों आसमान और सातों जमीन और पहाड़ (उम्र दराज) ज़िनाकार पर लानत भेजते है और क़ियामत के दिन ज़िनाकार मर्द व औरत की शर्मगाह से इस कद्र बदबू आती होगी के ज़हन्नम मे जलने वालों को भी उस (बदबु) से तकलीफ़ पहुँचेगी।_*

*_📕 बहारे शरीअ़त, जिल्द नं 1,  हिस्सा 9, सफा 43_*

_*यह तमाम सज़ाए तो आख़िरत मे मिलेगी लेकिन ज़िना करने वाले पर शरीअ़त ने दुनिया में भी सज़ा मुक़र्रर की है। इस्लामी हुकूमत हो तो बादशाहे वक्त़ या फिर क़ाज़ी शरअ पर ज़रूरी है कि जानी  (ज़िना करने वाले ) पर जुर्म साबित हो जाने पर शरीअ़त के हुक़्म के तहत सजा दे! हदीसे पाक में है कि अगर किसी को  दुनिया में सज़ा न मिल सकी (सजा से बच गया) तो आख़िरत मे उस को सख़्त अज़ाब़ दिया जाएगा, और अगर दुनिया में सज़ा मिल गई तो फिर अल्लाह चाहे तो उसे मुआ़फ फरमा दे।*_

_*दुनिया में सज़ा : अल्लाह और उसके रसूल ﷺ ने ज़िनाकार  मर्द और औरत को सज़ा का हुक़्म दिया और उस पर रसुलुल्लाह ﷺ ने अमल भी करवाया। चुनांचे कुरआन ए पाक मे*_

*_अल्लाह तबारक तआला इर्शाद फ़र्माता है!.._*

*اَلزَّانِیَۃُ وَ الزَّانِیۡ فَاجۡلِدُوۡا کُلَّ وَاحِدٍ مِّنۡہُمَا مِائَۃَ جَلۡدَۃٍ ۪ وَّ لَا  تَاۡخُذۡکُمۡ بِہِمَا رَاۡفَۃٌ  فِیۡ  دِیۡنِ اللّٰہِ  اِنۡ کُنۡتُمۡ تُؤۡمِنُوۡنَ بِاللّٰہِ وَ الۡیَوۡمِ الۡاٰخِرِ ۚ وَ لۡیَشۡہَدۡ عَذَابَہُمَا طَآئِفَۃٌ مِّنَ الۡمُؤۡمِنِیۡنَ ﴿۲﴾*
             
*_तर्जुमा : जो औरत बदकार हो, और जो मर्द तो, इन मे हर एक को सौ (100) कोडे लगाओ, और तुम्हे उन पर तरस न आए! अल्लाह के दीन मे अगर तुम ईमान लाते हो, अल्लाह और पिछले दीन पर! और चाहीए की उनकी सजा के वक्त मुसलमानो का एक गिरोह हाजीर हो!_*

*_📕 तर्जुमा :  क़ुरआन कंजुल इमान , सूर ए नुर आयत नं 2_*

*_(यह सजा गैर शादी-शुदा (जिसकी शादी न हुई हो..!) मर्द और औरत के लिये मुकर्रर है..!)_*

*_हुजुर  ﷺ इर्शाद फरमाते है..!_*

*_हदीस : ज़िना करने वाले शादी शुदा है तो खुले मैदान में संगसार किया जाए! (यानी पत्थरों से मार-मार कर जान से खत्म कर दिया जाए!) और गै़र शादी शुदा हो तो सौ (100) दुर्रे (कोडे, चाबुक) मारे जाए_*

_*हदीस : हजरत शोअबी रदि अल्लाहु तआला अन्हु ने हजरत अली रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत की है की..*_

*_हजरत अली ने जुमा के रोज एक जानी औरत को संगसार किया तो फर्माया की मैने उसे रसुलुल्लाह ﷺ की सुन्नत के मुताबीक संगसार किया है!_*

*_📕बुखारी शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 968, 980, हदीस नं 1715, सफा नं 615, 625_*

*_शादी शुदा जानी मर्द व औरत को संगसार करने और गैर शादी-शुदा जानी (जिनाकार) मर्द व औरत को सौ कोडे लगाने का हुक्म स्याहे सित्ता के अलावा अहादीस की तकरीबन सभी किताबो मे मौजुद है! जिससे इंकार की कोई गुंजाइश नही! यहा पर (Topic)  के लंबाई के खौफ से बुखारी शरीफ की उपर की दो हदिसों पर ही इत्तेफाक किया जाता है!_*

_*📮जारी रहेगा.....!*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


                   *_ज़िना का बयान - 03_*
―――――――――――――――――――――

*_🔘 जिना कैसे साबीत होंगा?_*

*_अल्लाह तबारक तआला इर्शाद फ़र्माता है..!_*

*وَ الَّذِیۡنَ یَرۡمُوۡنَ اَزۡوَاجَہُمۡ وَ لَمۡ  یَکُنۡ لَّہُمۡ شُہَدَآءُ  اِلَّاۤ  اَنۡفُسُہُمۡ فَشَہَادَۃُ اَحَدِہِمۡ  اَرۡبَعُ شَہٰدٰتٍۭ بِاللّٰہِ ۙ اِنَّہٗ  لَمِنَ الصّٰدِقِیۡنَ ﴿۶﴾*

*وَ الۡخَامِسَۃُ اَنَّ لَعۡنَتَ اللّٰہِ عَلَیۡہِ  اِنۡ کَانَ مِنَ  الۡکٰذِبِیۡنَ ﴿۷﴾*

*وَ یَدۡرَؤُا  عَنۡہَا الۡعَذَابَ اَنۡ تَشۡہَدَ اَرۡبَعَ شَہٰدٰتٍۭ بِاللّٰہِ ۙ اِنَّہٗ لَمِنَ الۡکٰذِبِیۡنَ ۙ﴿۸﴾*

*وَ الۡخَامِسَۃَ  اَنَّ غَضَبَ اللّٰہِ عَلَیۡہَاۤ  اِنۡ  کَانَ مِنَ  الصّٰدِقِیۡنَ ﴿۹﴾*

*_तर्जुमा आयत नं 6 : और वह जो अपनी औरतो को ऐब लगाए, और इनके पास अपने बयान के सिवा गवाह न हो तो, ऐसे किसी की गवाही यह है के,चार बार गवाही दे अल्लाह के नाम से के वह सच्चा है!_*

*_तर्जुमा आयत नं 7 : और पॉंचवी यह के अल्लाह की लानत हो इस पर अगर झुठा हो!_*

*_तर्जुमा आयत नं 8 : और औरत से युं सजा टल जाएंगी के वह अल्लाह का नाम लेकर चार बार गवाही दे के मर्द झुठा है!_*

*_तर्जुमा आयत नं 9 : और पॉंचवी युं के औरत पर गजब अल्लाह का अगर मर्द सच्चा हो!_*

*_📕 तर्जुमा :  क़ुरआन कंजुल इमान सूर ए नुर आयत नं, 6, 7, 8 और 9_*

*_किन लोगो की गवाही मोतब्बर मानी जाएंगी..?_*

_*जिना का सुबुत बाशरअ, नमाजी, परहेजगार, मुत्तकी, जो न कोई गुनाहे कबीरा करते हो, न किसी गुनाहे सगीरह पर इसरार रखते हो, न कोई बात खिलाफे मुरव्वत छिछोरे पन की करते हो, और न ही बाजारो मे खाते पिते हो, और न ही सडको पर पेशाब करते हो, ऐसे चार मर्दो की गवाही से जिना साबीत होता है! या जिना करने वाले के चार मर्तबा इकरार कर लेने से, फिर भी इमाम बार बार सवाल करेंगा और दर्याफ्त करेंगा की........ तेरी जिना से मुराद क्या है? कहॉं किया..? किससे किया? कब किया..? अगर इन सबको बयान कर दिया तो जिना साबीत होंगा वर्ना नही!*_

_*झुठी गवाही देने वालो की सजा : और गवाहो को खुल कर साफ साफ अपना चश्मदीद मुआइना बयान करना होंगा की हमने मर्द का बदन औरत के बदन के अंदर खास इस तरह देखा (जैसे  सुरमे दानी मे सलाई) अगर इन बातो मे से कोई भी बात कम होंगी मसलन चार गवाहो से कम हो या उन मे एक आला दर्जा का न हो, या मर्द तीन हो और औरते दस-बिस ही क्यो न हो, इन सब सुरतो मे यह गवाहिंयॉ नही मानी जाएंगी! अगर्चे इस किस्म की सौ दो सौ गवाहियॉ गुजरी हरगिज जिना का सुबुत न होंगा और ऐसी तोहमत लगाने वाले खुद ही सजा पाएंगे! और उन्हे बतौर सजा अस्सी कोडे लगाए जाएंगे!*_

*_📕 फतावा रज्वीया, जिल्द 5 सफा नं. 974_*

 *وَ الَّذِیۡنَ یَرۡمُوۡنَ الۡمُحۡصَنٰتِ ثُمَّ لَمۡ یَاۡتُوۡا بِاَرۡبَعَۃِ  شُہَدَآءَ فَاجۡلِدُوۡہُمۡ ثَمٰنِیۡنَ جَلۡدَۃً  وَّ لَا تَقۡبَلُوۡا لَہُمۡ شَہَادَۃً  اَبَدًا ۚ وَ اُولٰٓئِکَ ہُمُ  الۡفٰسِقُوۡنَ ۙ﴿۴﴾*

*_तर्जुमा: जो लोग पाक दामन औरतो पर जिना की तोहमत (इल्जाम) लगाए, फिर चार गवाह न पेश कर सके, तो इन्हे 80 कोडे लगाओ, और कभी भी इनकी गवाही कबुल न करो यह फासीक (झुठे) लोग है!_*

*_📕 तर्जुमा :  क़ुरआन कंजुल इमान सूर ए नुर आयत न. 4_*

_*आला हजरत इमाम अहमद रजा कादरी और हजरत सदरूल-अफाजील अल्लामा नईमुद्दीन मुरादाबादी रहमतुल्लाह अलैही ("फतावा रज्वीया") और तफ्सीर कुरआने करीम "खजाएनुल-इर्फान" मे गैर शादी-शुदा जानी मर्द और जानी औरत के सजा के बारे मे नक्ल  करते है..*_

*_"जानी मर्द को कोडे लगाते वक्त खडा किया जाए! और उसके तमाम बदन के कपडे उतार दिये जाए, सिवाए लुंगी के और उसके तमाम बदन पर कोडे लगाए जाए सिवाए चेहरा और शर्मगाह के! और औरत को कोडे लगाते वक्त खडा न किया जाए न उसके कपडे उतारे जाए अगर पोस्तीन या रूईदार कपडे पहने हुए हो तो उतार लिया जाए!"_*

_*📮पोस्ट ख़त्म.....!*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

Thursday, September 27, 2018


         
              *_पेशावर औरते (वेश्याए)_*
―――――――――――――――――――――

 _*🔘अक्सर नौजवान अपनी जवानी पर काबु नही रखते है! गलत संगत और सोहबत मे पडकर अपनी हवस को मिटाने के लिये पेशावर (वेश्याओ) का सहारा लेते है! और कुछ शादी-शुदा भी अपनी बिवी के होते हुए पेशावर औरतो के पास जाना नही छोडते!*_

_*अगर एक ही (प्लेट) मे तरह -तरह के खाने खट्टा, मिठ्ठा, तेज और कडवा सब मिलाकर रख दिया जाए तो यकीनन उसमे बदबु और किडे पड ही जाएंगे! बस इन पेशावर औरतो की मिसाल इसी (प्लेट) की मानींद है! एक वक्त की जरा सी लज्जत के लिये उस (प्लेट) से एक बार भी कुछ चखा नही के वह एक ऐसी दलदल मे फंस जाता है, के जितना बाहर निकलने की कोशीश करता है, उतना ही और दलदल मे फंसता चला जाता है! नतीजा उसकी उम्र भर की सेहत, तंदरुस्ती, इज्जत, शौहरत, दौलत, आराम, सुकुन व चैन सब कुछ बर्बाद होकर रह जाता!*_

*_हमारा रब तबारक तआला इर्शाद फर्माता है..._*

*قُلۡ لِّلۡمُؤۡمِنِیۡنَ یَغُضُّوۡا مِنۡ  اَبۡصَارِہِمۡ وَ یَحۡفَظُوۡا فُرُوۡجَہُمۡ ؕ ذٰلِکَ اَزۡکٰی لَہُمۡ ؕ اِنَّ اللّٰہَ خَبِیۡرٌۢ  بِمَا یَصۡنَعُوۡنَ ﴿۳۰*

*_मुसलमान मर्दो को हुक्म दो, अपनी निगाहे कुछ निची रखे! और अपनी शर्मगाहो की हिफाजत करे! यह इनके लिये बहुत सुथरा है! बेशक अल्लाह को इनके कामो की खबर गै!_*

*_और अल्लाह तआला इर्शाद फरमाता है.._*

*اَلۡخَبِیۡثٰتُ لِلۡخَبِیۡثِیۡنَ وَ الۡخَبِیۡثُوۡنَ لِلۡخَبِیۡثٰتِ ۚ وَ الطَّیِّبٰتُ لِلطَّیِّبِیۡنَ وَ الطَّیِّبُوۡنَ لِلطَّیِّبٰتِ ۚ*

*_गंदियॉं गंदो के लिये, और गंदे गंदीयों के लिये और सुथरीयॉ सुथरो के लिये, और सुथरे सुथरीयो के लिये!_*

*_📕 तर्जुमा : कुरआन कंजुल इमान सुर ए नुर आयत नं. 30 और 20_*

_*इन आयतो की तफ्सीर मे उलमा ए किराम इर्शाद फर्माते है की..*_

*_"बदकार और गंदी औरते, गंदे और बदकार मर्दो के लायक है! इसी तरह बदकार और गंदे मर्द इसी काबील है के उनका ताल्लुक उन जैसे ही गंदी और बदकार औरतो से हो! जबकी सुथरे (पाक), नेक मर्द सुथरी (पाक), और नेक औरतो के लायक है! इसी तरह सुथरी, नेक औरत सुथरे और नेक मर्द के लायक है! और सुथरे, नेक का रिश्ता सुथरी, नेक औरतो से और सुथरी और नेक औरत का रिश्ता सुथरे और नेक मर्द से ही किया जा सकता है!_*

_*हदीस : हमारे प्यारे मदनी आका ﷺ इर्शाद फर्माते है..*_

*_"जिसने जिना किया या शराब पी अल्लाह तआला उसमे से ईमान को ऐसे निकालता है, जैसे इंसान सर से अपना कुर्ता निकालता है!_*

_*इस हदीस पाक से वह लोग दिल से सोचे जो पेशेवर औरतो के पास जाते है, और जिना जैसे खबीस गुनाह का इर्तीकाब करते है!*_

_*ताज्जुब है कोई मुसलमान होकर जिना करे! खुदारा ऐसे लोग अब भी होश मे आ जाए मौत के आने से पहले! बाद मे होश भी आया तो किस काम का!*_

*_इससे पहले भी यह बयान हो चुका है के पेशावर (वेश्याओ) से मुबाशरत जिना ही कहलाएगी, हॉलांकी वह इस काम के रुपए लेती है, और इस काम के पर राजी भी होती है! लेकीन फरीखैन की आपसी रजा भी इस काम को जिना से अलग न कर पाएंगी! जिना के बारे मे बहुत सारी हदीसे "जिना" के बाब (Chapter) मे पहले ही बयान हो चुकी है!_*

*_बदकार को नेक बनाने के लिये अमल :अगर किसी औरत का मर्द बदचलन हो और दुसरी औरतो के साथ हरामकारी करता हो! ऐसी औरत अपने बदकार मर्द से सोहबत से पहले बावुजु ग्यारह (11) "अल-वलीयो" पढे! अव्वल आखीर एक-एक मर्तबा दरुद शरीफ पढे! फिर शैहर से मुबाशरत करे! (यह अमल हर बार जब भी उसका शौहर उससे सोहबत करना चाहे कर लिया करे) इंशा अल्लाह तआला वह मर्द परहेजगार हो जाएंगा! इसी तरह किसी शख्स की औरत बदचलन हो या बदकारी करती हो तो वह भी अपनी औरत से सोहबत करने से पहले यह अमल हर बार कर लिया करे! इंशा अल्लाह तआला  वह औरत नेक व परहेजगार बन जाएंगी!_*

*_📕 वजाइफे रज्वीया सफा नं. 219_*
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


                  *_जानवरों से सोहबत_*
―――――――――――――――――――――

*_🔘क्या आप ने जानवरों से भी बढ़ कर हैवान देखे है? यह वोह लोग है जिन्होंने शर्म व हया  कानून की हर जंजीर को तोड़ा है! इन्हें कुछ नहीं मिलता तो जानवरों को ही अपनी हवस का शिकार बनाते है!और यह सुबूत फरहाम करते है के हम देखने मे तो वैसे इन्सान ही नज़र आते है लेकिन हवस और  दरिन्दागी के मामले मे जानवरों से भी बढ़ कर है।_*
*_ऐसे लोग जो इस काम मे मुब्तिला है! इस हदीस शरीफ को पढ कर यकीनन खौफ़े ए  खुदा से डर कर सहम जाएंगे!._*
*_हदीस : हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि नबी  ए करीम ﷺ ने इर्शाद फ़र्माया.._*

*_"जो शख़्स जानवर से सोहबत करे, उसे और उस जानवर दोनों को क़त्ल कर दो"_*
*_📕 अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 349, हदीस नं 1052, सफा नं 376, इब्नेमाज़ा, जिल्द नं 2, बाब नं 143, हदीस नं 334, सफा नं 108_*
*_लोगों ने हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदि अल्लाहु तआला अन्हु से पूछा कि...... "जानवर ने क्या बिगाड़ा है" ? तो उन्होंने ... "इसका सबब तो मैने  रसूलुल्लाह ﷺ से नही सुना मगर हुज़ूर ने ऐसा ही किया बल्कि उस जानवर का गोश्त तक खाना पसन्द न फ़र्माया"।_*
*_गालीबन  हुज़ूर ﷺ ने जानवर को क़त्ल करने का हुक़्म इस लिए दिया हो कि  जब भी उसे कोई देखेगा तो गुनाह का मंजर याद आएगा! दूसरी हिक़्मत इस में यह भी हो कि उम्मत को यह तालीम देना मक़्सूद है कि यह काम किस कद्र बुरा है की उसको करने वाले को क़त्ल किया जाए और जिस से यह काम किया गया इसमे किस कद्र बुराई आ गई की इसे भी  क़त्ल कर दिया जाए।  (वल्लाहु तआला आलम )_*_
*_अभी हाल ही में जदीद तहकीक से  साबित हुआ है कि जो मर्द या औरत जानवर से अपनी ख्वाहिश पूरी करते है! उन्हे एड्स (AIDS) की ना काबीले इलाज बीमारी हो जाती है!  याद रहे  एड्स (AIDS) का दूसरा नाम मौत है_*
*_मसअला : किसी नाबालिग़ ने बकरी, गाय, भैंस, (या और किसी जानवर) के साथ सोहबत की तो उसे डाँट डपट कर सख़्ती से समझाया जाए । और अगर बालिग़ ने ऐसा काम किया तो उसे इस्लामी हुकुमत हो तो उसे इस्लामी सज़ा दी जाएगी! जिसका इख़्तियार इस्लामी बादशाह को है, वह जानवर जिब्ह करके दफ़्न कर दिया जाए!_*

*_📕 दुर्रे मुख्तार बहवाला फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 5, सफा नं 983_*
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

Wednesday, September 26, 2018



                     _*ज़िना की तोहमत*_
―――――――――――――――――――――

_*हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने जिन 7 हलाकत खेज़ गुनाहों से बचने को कहा है.*_
_*1). शिर्क करना*_
_*2). जादू करना*_
_*3). क़त्ल करना*_
_*4). यतीम का माल खाना*_
_*5). सूद खाना*_
_*6). मैदाने जंग से भागना,उसमे एक ये भी है कि*_
_*7). किसी पाक दामन औरत पर इलज़ाम लगाना*_

_*📕 बुखारी,जिल्द 1,सफह 388*_
_*📕 मुस्लिम,जिल्द 1,सफह 66*_

_*अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुरान में इरशाद फरमाता है कि "और वो लोग जो पाक दामन औरतों पर इलज़ाम लगाते हैं फिर इस पर वो 4 गवाह ना लायें तो उनको 80 कोड़े मारो और उनकी गवाही कभी भी क़ुबूल ना करो कि वो लोग फासिक हैं" कुछ आगे इरशाद फरमाता है कि "बेशक वो लोग जो पाक दामन औरतों पर इलज़ाम लगाते हैं उन पर दुनिया और आखिरत में लाअनत भेजी गयी है और उनके लिए बड़ा अज़ाब है*_

_*📕 पारा 18, सूरह नूर, आयत 4-23*_

_*ये बीमारी तो आजकल बड़ी आम है जहां किसी लड़की को किसी से बात-चीत करते देखा फौरन उस पर इल्ज़ाम तराशी शुरू हो गई, फलां का फलां से चक्कर है फलां तो आवारा है फलां बदचलन है वगैरह वगैरह,इस्लाम के किसी भी मसले में अगर गवाही की ज़रूरत पड़ेगी तो 2 गवाह काफी हैं चाहे किसी के क़त्ल का मुक़दमा हो या कुछ भी, लेकिन अगर औरत पर ज़िना का इलज़ाम लगाया तो अब 2 गवाहों से काम नहीं चलेगा 4 गवाह चाहिये और चारों ने उस औरत को किसी मर्द के साथ इस तरह देखा हो जैसे सुई में धागा, अगर चारों ने इसी तरह मर्द व औरत को देखा तो जब तो वो ज़ानी होंगे और सज़ा के मुस्तहिक़,ज़िना की सजा ये है कि अगर ज़िना करने वाले शादी शुदा हैं तो संगसार कर दिया जाये यानि दोनों को पत्थर मार मारकर मार डाला जाये और अगर कुंवारे हों तो 100,100 कोड़े मारे जायें, ये सज़ा तब क़ायम होगी जब कि इस्लामी हुकूमत हो चूंकि हिंदुस्तान में इस्लामी हुकूमत नहीं है लिहाज़ा यहां सज़ा नहीं दी जा सकती ऐसे लोग तौबा करें,ये तो हुई ज़ानी की सज़ा और जिसने इलज़ाम लगाया अगर वो 4 गवाह ना पेश कर सका या गवाह तो आये मगर चारों ने मर्द व औरत को उस तरह नहीं देखा जिस तरह बयान किया गया तो इलज़ाम लगाने वाला झूठा साबित होगा और उस पर हद क़ायम होगी यानि 80 कोड़े उसको मारे जायेंगे, चूंकि सज़ा उसको भी नहीं दी जा सकती मगर वो हुक़ूक़ुल इबाद में गिरफ्तार हुआ तो उसका गुनाह सिर्फ तौबा से माफ ना होगा बल्कि उससे भी माफी मांगनी होगी जिस पर इलज़ाम लगाया है,हदीसे पाक में है कि*_

_*बेशक आदमी ज़बान की बदौलत जहन्नम में इतना गिरता है कि जितना मशरिक और मग़रिब के दर्मियान फासला है*_

_*📕 अत्तरगीब वत्तरहीब,जिल्द 3, सफह 537*_

_*ईमान वालों को चाहिये कि अच्छी बात बोलें या खामोश रहें*_

_*📕 मजमउज़ ज़वायेद,जिल्द 10, सफह 32*_

_*याद रहे औरत अगर बदकार भी है जब भी उस पर इल्ज़ाम नहीं लगा सकते जब तक कि उसकी बदकारी को साबित करने के लिए 4 गवाह ना हों, लिहाज़ा मुसलमानों बात बात में किसी को ज़ानी या किसी को हरामी या किसी भी लड़के या लड़की पर ज़िना का इलज़ाम लगाना अगर चे मज़ाक में भी कहे जब भी हराम है गुनाहगार होगा लिहाज़ा तौबा करे और उससे माफी भी मांगे, हां मगर किसी को हराम ज़ादा कहने पर सरकारे आलाहज़रत फरमाते हैं कि "हराम ज़ादा कहने पर हद क़ायम नहीं होगी क्योंकि यहां इस लफ्ज़ से मुराद शरारती होता है मगर लड़की को हराम ज़ादी ना कहे*_

_*📕 अलमलफूज़,हिस्सा 4,सफह 14*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


                   _*ज़िना और लिवातत*_
―――――――――――――――――――――

_*ज़िना इतना ज़्यादा बुरा और घिनौना जुर्म है कि किसी भी मज़हब में इसको जायज़ नहीं रखा गया,और इस्लाम में तो इस पर बहुत सख्त हुक्म है,मौला फरमाता है कि*_

_*ज़िना के पास ना जाओ यक़ीनन वो बे हयाई और बहुत बुरी राह है*_

_*📕 पारा 15,बनी इस्राइल,आयत 32*_

_*और जो ये काम (ज़िना) करेगा वो सज़ा पायेगा*_

_*📕 पारा 19,फुरक़ान,सफह 68*_

_*और मेरे आक़ा सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि*_

_*जब कोई ज़िना करता है तो ईमान उसे निकलकर उसके सर पर साये की तरह मुअल्लक़ हो जाता है*_

_*📕 मिश्कात, सफह 18*_

_*दुनिया में इसकी क्या सज़ा है इसके बारे में मौला तआला क़ुर्आन में इरशाद फरमाता है कि*_

_*जो औरत ज़िनाकार हो और जो मर्द ज़िनाकार हों तो हर एक को 100 कोड़े मारो,और तुम्हे उन पर तरस ना आये अल्लाह के दीन में अगर तुम ईमान लाते हो अल्लाह और क़यामत पर,और चाहिए कि उनकी सज़ा के वक़्त मुसलमानों का एक गिरोह हाज़िर रहे*_

_*📕 पारा 18,नूर,सफह 12*_

_*ये हुक्म तो उस ज़ानी का है जो कि कुंवारे हों वरना शादी शुदा ज़ानी का हुक्म तो ये है कि उन्हें पत्थर मार मार कर मार डाला जाए और इसका हुक्म रज्म की आयत से है जो कि मनसूखुत तिलावत है मगर हुक्म अब भी बाकी है,और क़यामत में ज़ानियों की क्या सज़ा है ये भी पढ़ लीजिये हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि*_

_*कुछ नंगे मर्द और नंगी औरतें जहन्नम के अंदर एक तन्नूर में ठुसे होंगे जो कि ऊपर से तंग और नीचे से फैला होगा,जब आग भड़केगी तो ये शोलो के साथ ऊपर तक आ जायेंगे और फिर उसी के साथ उसी गर्त में पहुंच जायेंगे और ऐसा हमेशा होता रहेगा*_

_*📕 बुखारी,जिल्द 1,सफह 185*_

_*हां मगर इन सब सज़ाओं से बचा जा सकता है पहला तो ये कि या तो इन सब बदतरीन गुनाहों के करीब ही ना जाया जाए या फिर माज़ अल्लाह अगर ये जुर्म कर चुका है तो सच्चे दिल से तौबा करले और आईन्दा के लिए कभी इस गुनाह के करीब भी ना जाए,एक अहम बात कुछ नादान लोग ये समझते हैं कि ज़िना सिर्फ ज़बरदस्ती का नाम है नहीं बल्कि निकाह के अलावा किसी भी तरह से चाहे वो कीमत देकर या फिर लिव इन रिलेशन के नाम पर अगर औरत के साथ सेक्स किया तो ये ज़िना ही कहलायेगा,इसी तरह लिवातत या इगलाम बाज़ी यानि औरत के पीछे के मक़ाम में सोहबत करना या मर्द से सोहबत करना हराम और जहन्नम में जाने का रास्ता है,ये क़बीह फेअल सबसे पहले हज़रत लूत अलैहिस्सलाम की उम्मत में शुरू हुआ जिसकी सज़ा में उन पर पत्थरों की बारिश हुई और सबके सब हलाक़ हो गए,हदीसे पाक में है कि*_

_*वो शख्स लाअनती है जो औरत से हालते हैज़ में या पीछे के मक़ाम में सोहबत करे और अगर उसे जायज़ जाने जब तो काफिर है*_

_*📕 तिर्मिज़ी,जिल्द 1,सफह 19*_
_*📕 अलइतहाफ,जिल्द 5,सफह 375*_

_*हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने 3 बार उस मर्द पर लाअनत फरमाई जो मर्द से सोहबत करे*_

_*📕 अलमुअज्जमुल कबीर,जिल्द 11,सफह 218*_

_*हज़रते अबु बक्र सिद्दीक़ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने हज़रत अली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के मशवरे से उस ज़माने के एक बदफेल शख्स को आग में जलवा दिया जिसे हज़रत खालिद बिन वलीद रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने जलाया*_

_*📕 अत्तरगीब वत्तर्हीब,जिल्द 3,सफह 289*_

_*नबी करीम सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया जिसने अपने गुनाहों से सच्ची तौबा कर ली तो वो ऐसा है जैसे आज ही पैदा हुआ हो*_

_*📕 मुकाशिफातुल क़ुलूब,सफह 76*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

Tuesday, September 25, 2018



              _*ज़िना का मुख्तसर बयान*_
―――――――――――――――――――――

_*अल्लाह तआला इरशाद फरमाता है।*_

_*तर्जुमा क़ुराने पाक - जो शख्स ज़िना करता है उससे असाम में डाला जाएगा।*_

_*📕 क़ुराने मजीद पारा 19 सूरए फुरकान आयत 68*_

_*वज़ाहत - असाम के बारे में उलमा ऐ किराम ने कहा है कि यह वोह जहन्नम का एक गार है जब उसका मुँह खोला जाएगा तो उसकी बदबू से तमाम जहन्नमी चीख़ उठेंगे।*_

_*📕 मुक़शेफतुल कुलुब सफ़्हा 167*_

_*हदीस शरीफ में है - के अल्लाह के रसूल ﷺ ने इरशाद फ़रमाया की शिर्क के बाद अल्लाह के नज़दीक इस गुनाह से बड़ा कोई गुनाह नही के एक शख़्स किसी ऐसी औरत से सोहबत करे जो उसकी बीबी नही।*_

_*📕 करीना-ए-ज़िन्दगी सफ़्हा 132*_

_*हदीसे पाक में है - कि रसूल ﷺ ने फ़रमाया जब कोई मर्द और औरत ज़िना करता है तो ईमान उनके सीने से निकल कर सर पर साए की तरह ठहर जाता है।*_

_*📕 मुक़सफहातुल कुलूब सफ़्हा 168*_

_*हदीसे पाक में है - ज़िना करने वाले शादी शुदा होतो खुले मैदान में पत्थरों से मार डाला जाए और गैर शादी शुदा होतो सौ दुर्रे (चाबुक जिस के सिरे पर नोकिला किला हो उससे) मरे जाए।*_

_*📕 बुख़ारी शरीफ़ ज़िल्द 3 सफ़्हा 615 से 625 हदीस नम्बर 1715*_

_*हदीस शरीफ - हज़रत इकरेमा ने हज़रते अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास (रदियल्लाहोतआला अन्हुमा) से पुछा ईमान किस तरह निकल जाता है हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास ने फ़रमाया इस तरफ और आपने एक हाथ की ऊँगलियाँ दूसरे हाथ की ऊँगलीयों में डाली और फिर निकाल ली और फ़रमाया देखो इस तरफ।*_

_*📕 बुख़ारी शरीफ ज़िल्द 3 सफ़्हा 614 हदीस नम्बर 1713*_

_*वाकिया - हज़रत अब्दुल्लाह बिन उमर रादियल्लाहु तआला अन्हुमा घर से बाहर बैठे थे की एक हसीन लकड़ा (अम्रद) आता हुआ नजर आया आप दौड़ कर घर में घुस गए और दरवाज़ा बन्द कर लिया कुछ देर बाद पूछा की फितना चलागया या नही लोगों ने कहा चला चलागया तब आप बाहर तशरीफ़ लाए और फ़रमाया फरमाने नबी सल्लल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम है इनकी तरफ देखना गुफ़्तुगू करना और इनके पास बैठना हराम है।*_

_*📕 मुकाशफतुल कुलुब सफ़्हा 158 से 159*_

_*हज़रते क़ाज़ी इमाम रहमतुल्लाही तआला अलैह का कौल है मैने बाज़ मशाइख़ से सुना है कि औरत के साथ एक शैतान और हसीन लड़के के साथ अठ्ठारह शैतान होंते हैं रिवायत है जिसने शहवत के साथ जिसने शहवत के सात किसी लड़के को बोसा दिया वह पाँन सौ साल जहन्नम में जालेगा, और जिसने किसी औरत को बोसा दिया उसने गोया सत्तर बदकिरा औरतों से ज़िना किया और किसी ने किसी बदकिरा औरत से ज़िना किया उसने गोया सत्तर हज़ार शादी शुदा औरतों से ज़िना किया।*_

_*📕 मकाशफतुल कुलुब सफ़्हा 159*_

_*अवाम में तो आज कल यह बात आम हो गही है ख़ुसूसन नॉजवानो में की जिसकी गर्ल फ्रैंड नही है उसका जीना ही बेकार है आजकल लोग ज़िना को करते है और आशिके रसूल (सल्लाल्लाहु तआला अलैहि वसल्लम) होने का सच्चा पक्का दावा करते हैं आप लोग खुद गोर की गिये की कितना बड़ा गुनाह है ज़िना।*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

Al Waziftul Karima 👇🏻👇🏻👇🏻 https://drive.google.com/file/d/1NeA-5FJcBIAjXdTqQB143zIWBbiNDy_e/view?usp=drivesdk 100 Waliye ke wazai...