_*मुहर्रम - 07 फज़ाइले आशूरह*_
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_*फुक़्हा - आशूरह यानि दसवीं मुहर्रम का रोज़ा पिछले एक साल के गुनाहों का कफ्फारह है और तमाम अंबिया ये रोज़ा रखा करते थे बल्कि वहशी और ज़हरीले जानवर तक रोज़ा रखा करते हैं*_
_*📕 बहारे शरीयत, हिस्सा 5, सफह 136*_
_*📕 जामेय सग़ीर, जिल्द 4, सफह 215*_
_*📕 नुज़हतुल मजालिस, जिल्द 1, सफह 145*_
_*हदीस - रमज़ान के बाद सबसे अफज़ल रोज़ा मुहर्रम यानि आशूरह का और फर्ज़ नमाज़ों के बाद सबसे अफज़ल नमाज़ तहज्जुद की है*_
_*📕 मुस्लिम, जिल्द 1, सफह 823*_
_*हदीस - सियह सित्तह की हदीसे पाक है कि जब हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम मदीना शरीफ तशरीफ लायें तो आपने आशूरह के दिन यहूदियों को रोज़ा रखते हुए देखा तो उनसे पूछा कि तुम लोग ये रोज़ा क्यों रखते हो तो उन्होंने कहा कि इस दिन अल्लाह ने मूसा अलैहिस्सलाम को निजात दी और फिरऔन को लश्कर समेत दरिया में डुबो दिया तो बतौर शुकराने में हज़रत मूसा अलैहिस्सलाम ने इस दिन रोज़ा रखा तो हम भी उनके मानने वाले हैं तो हम भी रोज़ा रखते हैं, तो हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम फरमाते हैं कि मूसा अलैहिस्सलाम की मुआफिक़त करने में हम तुमसे कहीं ज़्यादा हक़दार और उनके ज़्यादा करीब हैं, तो हुज़ूर सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम ने खुद भी इस दिन रोज़ा रखा और सहाबा को भी हुक्म दिया तब सहाबा ने अर्ज़ की कि या रसूल अल्लाह सल्लललाहु तआला अलैहि वसल्लम इस दिन की ताज़ीम में तो यहूद रोज़ा रखते हैं तो आप फरमाते हैं कि ठीक है अगर हम अगले साल रहे तो इन शा अल्लाह 9वीं मुहर्रम का भी रोज़ा रखेंगे ताकि उनसे मुशाबेहत ना हो मगर इसी साल आपका विसाल हुआ*_
_*📕 अबु दाऊद, जिल्द 2, सफह 256*_
_*ⓩ लिहाज़ा 9 और 10 दोनों दिन रोज़ा रखा जाये, 9-10 को इलाहाबाद में 4:30 पर खत्मे सहर है तो जिसको रोज़ा रखना हो वो इससे पहले सहरी खा ले, एक और बात जिन लोगों का रमज़ान का कोई भी रोज़ा कभी का भी छूटा हुआ हो तो वो नियत रमज़ान के क़ज़ा की ही करें इस तरह उनका रमज़ान का रोज़ा भी अदा हो जायेगा और मौला ने चाहा तो मुहर्रम के दिन रोज़ा रखने का भी सवाब पायेंगे*_
_*फुक़्हा - जो आशूरह के दिन अपने घर वालों पर ज़्यादा खर्च करेगा उसको अल्लाह तआला साल भर तक कुशादगी अता करेगा*_
_*📕 ग़ुनियतुत तालिबीन, जिल्द 2, सफह 54*_
_*📕 फैज़ुल क़दीर, जिल्द 6, सफह 236*_
_*फुक़्हा - जो शख्स आशूरह के दिन यतीम के सर पर हाथ फेरेगा तो मौला उसे हर बाल के बदले 1 नेकी और जन्नत में 1 दर्जा बुलन्दी अता फरमायेगा*_
_*📕 ग़ुनियतुत तालिबीन, जिल्द 2, सफह 53*_
_*फुक़्हा - जो आशूरह के दिन सुर्मा लगायेगा तो उसकी आंखे ना दुखेगी*_
_*📕 12 माह के फज़ायल, सफह 266*_
_*फुक़्हा - जो आशूरह के दिन ग़ुस्ल करेगा तो साल भर तक किसी मर्ज़ में मुब्तेला ना होगा*_
_*📕 ग़ुनियतुत तालिबीन, जिल्द 2, सफह 53*_
_*फुक़्हा - जो आशूरह के दिन किसी बीमार की इयादत करेगा तो तमाम बनी आदम की इयादत का सवाब मिलेगा, जिसने आशूरह के दिन किसी को पानी पिलाया तो उसने उतनी देर अल्लाह की नाफरमानी नहीं की*_
_*📕 ग़ुनियतुत तालिबीन, जिल्द 2, सफह 54*_
_*फुक़्हा - जो आशूरह को 1 रुपया खर्च करेगा तो अल्लाह उसे 1000 रूपया अता करेगा*_
_*📕 नुज़हतुल मजालिस, जिल्द 1, सफह 147*_
_*ⓩ एक शख्स ने आशूरह के दिन 7 दरहम खर्च किये और साल भर तक इंतज़ार करता रहा मगर कुछ ना मिला तो अगले साल इसका मुनकिर हो गया, रात को ख्वाब देखता है कि एक शख्स 7000 दरहम देकर कहता है कि ले ऐ बेसब्र अगर तू क़यामत तक इंतज़ार करता तो ये तेरे हक़ में कहीं ज़्यादा बेहतर होता*_
_*फुक़्हा - जो आशूरह के दिन 4 रकात नमाज़ 2-2 करके इस तरह पढ़े कि चारों में सूरह फातिहा के बाद सूरह इखलास 11-11 बार तो उसके 50 साल के गुनाह अल्लाह माफ फरमा देगा और उसके लिए नूर का मिम्बर बिछाया जायेगा*_
_*📕 नुज़हतुल मजालिस, जिल्द 1, सफह 181*_
_*फुक़्हा - दुआये आशूरह ऊपर भेजी है उसे पढ़ने का तरीक़ा भी उसमें लिखा है, जो ये दुआ पढ़ लेगा इन शा अल्लाह तआला अगले आशूरह तक ज़िंदा रहेगा और अगर क़ज़ा आनी ही है तो ये दुआ हरगिज़ ना पढ़ पायेगा*_
_*📕 मजमुआ आमाले रज़ा, जिल्द 2, सफह 112*_
_*हदीस - आशूरह के दिन काले कपड़े पहनना, मातम करना, सीना पीटना, घर में झाड़ू ना देना, खाना ना पकाना, यह सब काम नाजायज़ो हराम है*_
_*📕 मिश्कात, सफह 150*_
_*जारी रहेगा....*_
_*✒ जेब न्यूज, जमात रज़ा ए मुस्तफ़ा, इलाहाबाद (यु.पी.)*_
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