_*करामात*_
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_*27 ज़िल हिज्जा*_
_*हज़रत सय्यदना अबु बक्र शिब्ली रज़ियल्लाहु तआला अन्हु*_
_*29 ज़िल हिज्जा*_
_*हज़रत सय्यद शाह इस्माईल क़ादरी, कर्नाटक*_
_*🔘 करामाते फारूक़े आज़म - हज़रत उमर फारूक़े आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने एक लश्कर निहावंद (ईरान) भेजा, जिसका सिपाह सालार हज़रत सारिया रज़ियल्लाहु तआला अन्हु को बनाया, एक दिन आपने जुमे का खुत्बा छोड़कर 3 मर्तबा 'या सारियल जबल' फरमाया यानि ऐ सारिया पहाड़ की पनाह ले, बाद नमाज़ के अब्दुर्रहमान बिन औफ रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने माजरा पूछा तो आपने फरमाया कि मैंने मुसलमानों को देखा कि वो लड़ रहे हैं कि अचानक काफिर एक तरफ से आगे बढ़े तो मुझसे रहा ना गया और मैंने सारिया को पहाड़ का सहारा लेने को कहा, चन्द रोज़ के बाद एक क़ासिद जंग का हाल लेकर वापस आया तो उसने बताया कि हम जंग हार रहे थे फिर किसी आवाज़ देने वाले ने हमको पहाड़ की तरफ जाने को कहा तो हमने ऐसा ही किया और अल्लाह ने दुश्मनों को शिकस्त दी और हमारी फतह हुई*_
_*📕 मिश्कात, बाबुल करामात, सफह 546*_
_*ⓩ हज़रत उमर फारूक़े आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु सैकड़ों मील की दूरी से ना ही मुसलमानों को सिर्फ देख रहे थे बल्कि मुसीबत मे देखकर उन्हें आवाज़ भी दे रहें हैं जो सैकड़ों मील की दूरी होने के बावजूद वहां पहुचीं जिसे हज़रत सारिया रज़ियल्लाहु तआला अन्हु ने बखूबी सुना और उस पर अमल भी किया, ये करामत सहाबी की है और हदीस से साबित है मगर इसके खिलाफ वहाबियों का अक़ीदा देखिये वहाबियों के एक गुरु घंटाल इस्माईल देहलवी ने लिखा कि*_
_*वहाबी - अगर कोई दूरो नज़दीक से किसी ग़ैरुल्लाह को पुकारे और ये अक़ीदा रखे कि उसको खबर हो गई,ये शिर्क है*_
_*📕 तक़वियातुल ईमान, सफह 21*_
_*ⓩ इन वहाबियों की अक़्ल मे कोढ़ हो गया है लिहाज़ा जितना हो सके इनसे दूर रहें कि इसी मे ईमान की भलाई है*_
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