Wednesday, December 26, 2018



     _*सरकार गौसे पाक का बयान (पार्ट- 01)*_
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_*📖सवाल- हजरत गौसुल आजम दस्तगीर रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि के वलिदे ग्रामी का इस्मे ग्रामी बताईये?*_

_*✍🏻जवाब- हजरत मूसा अबू सालेह जंगी दोस्त रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- सरकार गौसे पाक रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि के नाना का इसमें ग्रामी बताईये?*_
 
_*✍🏻जवाब- हजरत अब्दुल्लाह सुमई रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- सरकार गौसे पाक रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि की वालिदा का इस्मे ग्रामी बताईये?*_

_*✍🏻जवाब- हजरत फातेमा सानी उम्मुल खैर रहमतुल्लाह तआला अलैहि।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- सरकार गौसे पाक रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि की हयाते पाक में बग़दाद के खलीफा कौन लोग हये?*_

_*✍🏻जवाब- अल कादिर बिल्लाह अबुल आस, अल काइम बिअमरिल्लाह अबू जअफर अब्बासी।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- सरकार गौसे पाक रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि का अस्ल नाम बताइये?*_

_*✍🏻जवाब- सय्यदुना शैख अब्दुल कादिर मुहय्युह्दीन जीलानी रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- सरकार गौसे पाक के वालिद का अस्ल नाम क्या है?*_

_*✍🏻जवाब- हजरत मूसा रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- सरकार गौसे पाक रहमतुल्लाह अलैह के वलिदे ग्रामी की कुन्नियत क्या थी?*_

_*✍🏻जवाब- अबू सलेम।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- सरकार गौसे पाक रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि की विलादत कब हुई?*_

_*✍🏻जवाब- यकुम रमजानुल मुबारक बरोज़ जुमा 470 हिजरी को।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- उस अजीम हस्ती का इस्मे ग्रामी बताइये जिन्हों ने बिस्मिल्लाह ख्वानी के मौका पर उस्ताद को मुकम्मल 17 पारे सुना दिये?*_

_*✍🏻जवाब- शैख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- शैख अब्दुल कादिर जीलानी रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि का रौजा कहाँ वाके है?*_

_*✍🏻जवाब- बगदाद शरीफ"इराक"में।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- सरकार गौसे पाक रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि किस लकब से मशहूर है?*_

_*✍🏻जवाब- गौसुल आजम, पीराने पीर, मुहय्युह्दीन, महबूब सुबहानी, बड़े पीर, दस्तगीर रोशन जमीर वगैरह से।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- फुतूहुल कुलूब गुनिय्यतुत्तलिबीन किस की तसनीफ है?*_

_*✍🏻जवाब- हुजूर गौसे पाक रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि की।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📖सवाल- फिकह में ज्यादह तर्जुमानी किस इमाम की जानिब थी?*_

_*✍🏻जवाब- हजरत इमाम अहमद बिन हंबल रहमतुल्लाह त‌आलख अलैहि की तरफ आप मसलके हंबली मुकल्लिद थे।*_

_*📕 सुन्नी काइज़ सरकार गौसे आज़म*_

_*📮जारी रहेगा......*_
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     _*सरकार गौसे पाक का बयान (पार्ट- 02)*_
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_*📖सवाल- पीराने पीर ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि के मुरिदों को कौनसी बशारत मिली है?*_

_*✍🏻जवाब- हज़रत सुहैल बिन अब्दुल्लाह तुसतरी रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि से मनकूल है कि एक दिन सरकार ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि बग़दाद वालों की नज़र से ग़ायब हो ग‌ए जब लोगों ने तलाश किया तो आपको दरयाए दजला के किनारे पाया तो देखा कि मछलियां ब-कसरत आप की खिदमत में आती हैं और दसते मुबारक को बोसा देती है उसी असना में ज़ोहर का वक़्त हो गया एक मुसल्ला हज़रत सुलैमान अलैहिस्सलाम के तख्त की तरह हवा में मुअल्लक हो कर बिछ गया और बहुत से नूरानी शक़्ल के लोग आये और मुहल्ले पर सफ़ में खड़े हो गए और सरकार बड़े पीर दस्तागीर रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि मुसल्ला पर आगे तशरीफ़ ले गए और नमाज़ पढ़ाई उस वक़्त अज़ीब व ग़रीब समां था जब हुज़ूर ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि तस्बीह पढ़ते तो सातों आसमान के फ़रिश्ते भी आप के साथ तस्बीह पढ़ते जब हुज़ूर ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि ने दोनों हाथों को दुआ के लिए बारगाहे रब्बुल आलमीन में उठाकर अर्ज किया ऐ अल्लाह में तेरी बारगाहे बेनियाजी में तेरे प्यार महबूब हज़रत मुहम्मद मुस्तफा सल्लल्लाहु त‌आला अलैहि वसल्लम के वसीले से तालिब हूं और दुआ करता हूं कि तू मेरे मुरीदों को और मेरे मुरीदों के मुरीदों को सुबह क़यामत तक मौत न दे मगर पर यानी मेरे मुरीदों पर खातमा नसीब फरमा हज़रत सुहैल रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि फरमाते है कि हमने आपकी मुबारक दुआ पर फ़रिश्तों कि एक बहुत बड़ी जमाअत को आमीन कहते हुए सुना जब हुज़ूर ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि दुआ पुरी कर चुके तो हमने ग़ैब से एक निदा सुनी कि ऐ अब्दुल कादिर जीलानी मेरे महबूब सुबहानी तुमको बशारत हो खुशखबरी हो कि हमने आपकी दुआ क़ुबूल फ़रमा ली।*_

_*📕 तलख़ीस बहुजतुल असरार सफ़्हा 269*_

_*📖सवाल-हुज़ूर ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि और शैतान का वकिया क्या है?*_

_*✍🏻जवाब- आपके फ़रज़न्द श़ैख मूसा रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि का बयान है कि आपने अपनी सयाहत के दौरान एक मर्तबा किसी ऐसे जंगल में चले गये जहां पानी का नामो निशान तक न था क‌ई दिन आप पर प्यास का सख़्त ग़लबा रहा अचानक एक दिन आपके सरे मुबारक पर बादल का टुकड़ा आ गया और बारिश होने लगी जिससे आप खुब सैराब हो ग‌ए फिर उस बादल से एक रौशनी ज़ाहिर हुई उसने पुकार कर कहा ऐ अब्दुल कादिर में तुम्हारा रब हूं मैं ने तुमपर तमाम हराम चीज़ो को तुम पर हलाल कर दिया यह आवाज़ सुनकर मेरे प्यारे आका हुज़ूर ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि ने" अऊज़ु बिल्लाहि मिनश्शैतानिर्रजीम" पड़ा और फ़रमाया ऐ मरदूद तू दूर होजा और वह रौशनी गायब हो गई और वह सूरत धुएं की तरह फ़ैल गई फिर उससे आवाज़ आई ऐ अब्दुल कादिर आज तुम अपने इल्म कि खातिर मेरे फ़रेब से बच गये वर्ना इसके पहले इसी मैदान में 70 औलियाए तरीक़त को मैं ग़ुमराह कर के उन की विलायत को ग़ारत व बरबाद कर चुका हूं हुज़ूर ग़ौसे आज़म रहमतुल्लाह त‌आला अलैहि ने फ़रमाया ऐ शैतान मेरा इल्म भला क्या बचा सकता है जब तेरा इल्म तुझको नहीं बचा सका ऐ शैतान मरदूद खुब गौर से सुन ले मेरे इल्म ने नहीं बल्कि मेरे रब के फ़ज़्ल व करम ने मुझे तेरे शर से बचा लिया।*_

_*📕 क़लाइदुल जवाहिर सफ़्हा 20*_

_*तुझसे दर दर से संग और संग से है मुझको निसबत*_
_*मेरी गर्दन में भी है दुर का डोरा तेरा।*_

_*इस निशानी के जो संग है नहीं मारे जाते*_
_*हश्र तक मेरे गले में रहे पट्टा तेरा।*_

_*📮पोस्ट खत्म......*_
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Saturday, December 22, 2018



   _*औरतों की मजारात पर हाजिरी देना कैसा*_
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_*📖सवाल - इस्लामी बहने कब्रिस्तान या मजाराते औलिया पर जा सकती है या नही..?*_

_*✍🏻जवाब - औरतो के लिए बाज उलमा मे जियारते कुबुर को जाईज बताया दुर्रे मुख्तार मे यही कौल इख्तियार किया*_

_*मगर अजीजो की कुबुर पर जाएगी तो जजअ व फजअ यानी रोना पीटना करेगी लिहाजा मना है*_

_*सालिहीन की कुबुर पर बरकत के लिए जाए तो बुढीयो के लिए हर्ज नही और जवानो के लिए मना*_

_*📕 दुर्रे मुख्तार जिल्द-3, सफा-178*_

_*अल्लामा मुफ्ती मुहम्मद अमजद अली आजमी अलैही रहमतुल्लाह फरमाते है :*_

_*और अस्लम यानी सलामती का रास्ता यह है कि औरते मुत्लकन मना की जाए कि अपनो की कुबुर की जियारत मे तो वह जजअ व फजअ यानी रोना पीटना है*_

_*और सालिहीन की कुबुर पर या ताजीम मे हद से गुजर जाएगी या बे अदबी करेगी तो औरतो मे यह दोनो बाते कसरत से पाई जाती है*_

_*📕 बहारे शरीअत, जिल्द अव्वल, सफा 849*_

_*मेरे आला हजरत अजीमुल बरकत मुजदद्दीदे दीनो मिल्लत ने औरतो को मजारात पर जाने की जाब जा बजा मुमा न अत फरमाई चुनान्चे*_

_*एक मकाम पर फरमाते है इमाम काजी रहमतूल्लाह तआला अलैही से इस्तिफ्ता सवाल हुआ कि*_

_*औरतो का मकबिर को जाना जाईज है या नही..!*_

_*तो आप ने फरमाया ऐसी जगह जवाजे व आदमे जवाज यानी जाईज व ना जाईज का नही पुछते यह पुछो कि*_

_*📍औरत पर कितनी लानत पडती है*_

_*जब घर से कुबुर की तरफ चलने का इरादा करती है अल्लाह तआला और फरिश्तो की लानत होती है*_

_*जब घर से बाहर निकलती है सब तरफो से शैतान उसे घेर लेते है*_

_*जब कब्र तक पहुचती है मय्यत की रूह उस पर लानत करती है जब तक वापस आती है अल्लाह तआला की लानत मे होती है.!*_

_*📕 फतावा रजविया, जिल्द 9, सफा 557*_

_*🕋अल्लाह तआला हमारे माँ बहनो को इन सब बातों पर अमल करने की तौफिक बख्शे..!*_
_*🌹आमीन सुम्मा आमीन*_
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Friday, December 21, 2018

_*📚 HADEES E MUSTAFA ﷺ*_

_*💫ilm E Deen Chupane Wale Par Har Chiz Lanat Karti Hai*_

_*Hazrat E Abu Hurairah (Radiallahu Ta'ala Anhu) Se Riwayat Hai :*_

_*🌹Huzoor Nabi E Kareem (Sallallahu Ta'ala Alaihi Wasallam) Ne Irsad Farmaya Jis Sakhs Se ilm Ki O Baat Puchi Gai Jo O Janta Ho Fir O Usko Chupaye Yani Naa Bataye To Qayamat Ke Deen Uske Mooh Me Aag Ki Lagam Lagai Jayegi.*_

_*📕 Miskat Sarif, Safa No-34*_

_*📚 HADEES E MUSTAFA ﷺ*_

_*Hazrat E Abu Sayeed Khudri (Radiallahu Ta'ala Anhu) Se Riwayat Hai :*_

_*Huzoor Nabi E Kareem (Sallallahu Ta'ala Alaihi Wasallam) Ne Irsad Farmaya ilm E Deen Chupane Wale Par Har Chiz Lanat Karti Hai Yaha Tak Ke Machli (Fish) Pani Me Aur Chidiya (Birds) Hawa Me.*_

_*📕 Kanzul Umaal, Jild -10, Safa No-109*_

_*📚 HADEES E MUSTAFA ﷺ*_

_*Hazrat E Ibn E Masood (Radiallahu Ta'ala Anhu) Se Riwayat Hai :*_

_*Huzoor Nabi E Kareem (Sallallahu Ta'ala Alaihi Wasallam) Ne Irsad Farmaya Jis Sakhs Ko Allah ﷻ Ne ilm Diya Aur O Usko Chupaye To Allah ﷻ Qayamat Ke Deen Uske Mooh Me Aag Ki Lagam Lagayega.*_

_*📕 Kanzul Umaal, Jild -10, Safa No -109*_
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_*ILM-E-DEEN SIKHNE AUR SIKHANE KI FAZILATE*_
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_*🌹Hazrate Abdullah ibne Abbas Radiallahu Anhu Se Marwi Hai. "Jo Shaks Meri Ummat Tak Koi Islami Baat Pahunchaye Taki Usse Sunnat Kayam Ki Jaye Ya Usse Bad Mazhabi Door Ki Jaye. To Wo Jannati Hai.*_

_*📕 Kanzul Umaal Ibne isakar*_
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Thursday, December 13, 2018



        _*📸 जानदार की तस्वीर हराम है 📸*_
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_📌 एक बार पढ़ लीजिये अल्लाह और रसुले पाक का हुक्म यानी शरीयत का हुक्म सिर्फ मोमीनो के लिए है_

       _*📷 🔥तस्वीर की हुरमत का बयान*_

_*हदीस पाक 👉🏻 हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया :-*_

_*📷 हर तस्वीर बनाने वाला जहन्नमी है अल्लाह तआला हर एक तस्वीर (Photo) के बदले जो उसनें बनाईं है।*_

_*एक मखलूक पैदा करता है कि वो  उसको दोजख में अजाब दे।*_

_*📕 सही मुस्लिम*_

_*हदीस 👉🏻 हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहे वसल्लम ने फरमाया कयामत में सबसे ज्यादा अजाब तस्वीर (Photo) बनाने वाले को होगा।*_

_*📕 सही बुखारी, सही मुस्लिम*_

_*हदीस 👉🏻 हुज़ूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया :- तस्वीर बनाने वाले को (Photographar) को अजाब होगा उस वक्त तक कि वो अपने बनाये हुए फोटो में रूह न फूंक दे और ये उसके बस की बात नहीं।*_

_*📕 सही बुखारी*_

_*हदीस 👉🏻 हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने फरमाया:- कयामत में दोजख से एक गर्दन निकलेगी जिस की 2 आँखें जिनसे वो देखेगी और 2 कान होंगे जिनसे वो  सुनेगी और एक जबान होगी जिनसे बोलेगी वो कहेगी मैं 3 शख्स पर  मुसल्लत (भारी) होगी।*_
_*1 :- मुशरीक*_
_*2 :- सरकश*_
_*3 :- तस्वीर बनाने वाला Photographar*_

_*📕 सूनन तीरमीजी*_

_*कयामत के दिन अल्लाह तआला की बारगाह में सबसे ज्यादा सख्त तरीन अजाब उन तस्वीर बनाने वालों पर है जो खुदा के बनाएं हुए कि नकल करें।*_

_*📕 बुखारी शरीफ*_

_*हजरत  अब्बास रदीयल्लाहो अन्हु ने फरमाया:-" कि अगर तुम्हारे लिए ऐसा करना जरूरी हो जाए तो शजर व हजर जैसी शक्ल बनाओं*_
_*जिसमें रूह ओर जान न हो।*_

_*📕 मिशकात शरीफ-बाबे तस्वीर फस्ले अव्वल*_

_*हुजूर सल्लल्लाहो अलैहि वसल्लम ने ईरशाद फरमाया :-जिस घर में कुत्ता और तस्वीर (जानदार) हो, उस घर में रहमत के फरिश्ते दाखिल नहीं होते।*_

_*📕 फतवाए रजवीया जिल्द 9 सफा 143*_

_*फिर है कि अहदीस इस बारे में ततवीर पर है की जिसका कसदन इनकार करने वाला कमसकम गुमराह बद दीन है।*_

_*ताजदारे अम्बीया सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम ने ईरशाद फरमाया :-*_

_*गिरजाघर में न जाओ कि वहां तस्वीर होती है और जो तस्वीर बनाते है वो बदतरीन मखलूक है।*_

_*📕 बुखारी शरीफ जिल्द1,सफा 62,मुस्लिम1/201,*_
_*📕 फतवाए रजवीया 8/146*_

_*📝नोट 👉🏻 मेरे अजिज दोस्तों इन हदीसे पाक कृ पङने के बाद उन लोगों को सोचना चाहिए जो अपनी प्रोफाइल में अपनी खुद की या किसी जानदार की फोटो रखते है।*_

_*📜मकसद : सिर्फ और सिर्फ इसलाह की है,, किसी का दिल दुखा हो तो माफ करना।*_
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_*🕋अल्लाह के नबीयों और वलीयों के मज़ार पर जाना और उनसे मदद मांगना क़ुरआन व हदीस से साबित है*_

_*दोस्तो ​किसी भी नबी और वली की क़ब्र पर इमारत बना देना ही मज़ार कहलाता है,*_

_*​मज़ार बनाना​👇🏻*_

_*🕋अल्लाह तआला इरशाद फ़रमाता है तर्जमा👇🏻*_

_*1) तो बोले उनकी ग़ार पर इमारत बनाओ उनका रब उन्हें खूब जानता है वह बोले जो इस काम मे ग़ालिब रहे थे क़सम है कि हम तो उन पर मस्जिद बनायेंगे*_

_*📕 पारा 15, सूरह कहफ, आयत 21*_

_*📖तफसीर : असहाबे कहफ 7 मर्द ए मोमिन हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की उम्मत के लोग थे बादशाह दक़्यानूस के ज़ुल्म से तंग आकर ये एक ग़ार मे जाकर छिप गये जहां ये 300 साल तक सोते रहे 300 साल के बाद जब ये सोकर उठे और खाने की तलाश में बाहर निकले तो उनके पास पुराने सिक्के देखकर दुकानदारों ने उन्हें सिपाहियों को दे दिया उस वक़्त का बादशाह बैदरूस नेक और मोमिन था जब उस को ये ख़बर मिली तो वो उनके साथ ग़ार तक गया और बाक़ी तमाम लोगो से भी मिला असहाबे कहफ सबसे मिलकर फिर उसी ग़ार मे सो गये जहां वो आज तक सो रहें हैं हर साल दसवीं मुहर्रम को करवट बदलते हैं और हज़रत इमाम मेंहदी रज़िअल्लाहु तआला अन्ह के दौर मे उठेंगे और आपके साथ मिलकर जिहाद करेंगे बादशाह ने उसी ग़ार पर इमारत बनवाई और हर साल उसी दिन उसी तारीख़ में वहां तमाम लोगों को जाने का हुक्म दिया*_

_*📕 तफसीर ए खज़ाइनुल इर्फान,सफह 354*_

_*इस आयत और तफ़सीर से मालूम हुआ के बुज़ुर्गों यानी अल्लाह के वलीयों की मज़ार के करीब मस्जिद बनाना अहले ईमान का क़दीम (पुराना) तरीक़ा है और क़ुरआन ए करीम में इसका ज़िक्र फ़रमाना और उसको मना न करना इस फ़ैल (काम) के दुरुस्त होने की क़वी तरीन (पावरफुल) दलील है,*_

_*इससे ये भी मालूम हुआ के बुज़ुर्गों के जवार (क़रीब) में बरकत हासिल होती है इसीलिए अहले अल्लाह के मज़ारात पर लोग हुसूले बरकत के लिए जाया करते हैं और इसीलिए क़बरों की ज़ियारत सुन्नत और मोजिबे सवाब है,*_

_*​मज़ार पर जाना​👇🏻*_

_*2) हदीस शरीफ़ - हुज़ूर सल्लल्लाहू तआला अलैहि वसललम इरशाद फरमाते हैं कि*_

_*मैंने तुम लोगों को क़ब्रों की ज़ियारत से मना किया था अब मैं तुम को इजाज़त देता हूं कि क़ब्रों की ज़ियारत किया करो,*_

_*📕 मुस्लिम, जिल्द 1, हदीस नं. 2158*_

_*3). हदीस शरीफ़ - खुद हुज़ूर सल्लललाहू तआला अलैही वसल्लम हर साल शुहदा ए उहद की क़ब्रो पर तशरीफ़ ले जाते थे और आपके बाद तमाम खुल्फा का भी यही अमल रहा,*_

_*📕 शामी, जिल्द 1, सफह 604*_
_*📕 मदारिजुन नुबुव्वत, जिल्द 2, सफह 135*_

_*दोस्तो ​जब हमारे आक़ा अलैहिस्सलाम अपने उम्मती की क़ब्र पर जा सकते हैं तो फिर हम उम्मती अपने नबी या किसी वली की क़ब्र पर क्यों नहीं जा सकते, ज़रूर जा सकते हैं,*_

_*​मज़ार पर हाज़िरी​👇🏻*_

_*4). मसअला - आलाहज़रत अज़ीमुल बरकत फरमाते हैं कि साहिबे मज़ार के पांव की जानिब से दाखिल हो और मज़ार से 4 हाथ पीछे हटकर खड़ा हो हाथ बांधकर जो कुछ सही अदायगी से पढ़ सकता हो पढ़े और उसका सवाब तमाम अम्बिया व औलिया सिद्दिक़ीन व सालेहीन व साहिबे मज़ार और तमाम मुसलमान मुर्दों को बख्शे और इसी तरह वापस निकल आये, ना तो मज़ार को हाथ लगाये और ना चादर चूमे लेकिन अगर कोई चूम भी लेता है तो ये कोई नाजाइज़ और हराम भी नहीं है, और मज़ार पर औरतों का जाना बिल्कुल नाजाइज़ और हराम है बल्कि फरमाते हैं कि जब तक वो औरत अपने घर वापस नहीं आ जाती तब तक अल्लाह और उसके फरिश्ते और साहिबे मज़ार सब की लानत में गिरफ्तार रहती है*_

_*📕 अलमलफूज़, हिस्सा 2, सफह 107*_

_*मज़ार पर हाज़िर होकर मांगने का 3 तरीका है पहला ये कि मौला तआला की बारगाह में युं अर्ज़ करे के ऐ मौला मैं तुझसे इस वली के सदक़े में फलां हाजत (ज़रूरत) तलब करता हूं मेरी हाजत पूरी फरमा दूसरा ये के साहिबे मज़ार से युं अर्ज़ करे के ऐ अल्लाह के मुक़द्दस बन्दे मेरी फलां इल्तिजा रब की बारगाह में पेश कर दीजिये कि मेरी हाजत पूरी फरमा दे और तीसरा तरीक़ा वो है जिस पर बन्दे का अमल है वो ये कि सीधे सीधे साहिबे मज़ार की बारगाह में युं इस्तेगासा पेश करे और कहे कि ऐ अल्लाह के वली मेरी फलां हाजत पूरी फरमाइये ऐसा इसलिए क्योंकि अल्लाह ने अपने वलियों को पूरी क़ुदरत अता फ़रमाई है वो जिसे जो चाहें अता कर सकते हैं, और अगर डायरेक्ट वली से मांगने की बात किसी को हज़म नहीं हो रही हो तो वो इस मिसाल से समझ ले, मान लीजिये कि आपको 10,000 रू रूपये की ज़रूरत है आप अपने अब्बा के पास पहुंचे और युं कहें कि ऐ मौला मुझे 10,000 रू की ज़रूरत है मेरे बाप से मुझे 10,000 दिलवादे या फिर युं कहें कि ऐ अब्बा मुझे 10,000 रू की ज़रूरत है आप रब से दुआ कर दीजिए कि मुझे 10,000 रू अता कर दिया जाए या फिर युं कहें कि ऐ अब्बा मुझे फलां काम आ गया है मुझे 10,000 रू चाहिए,*_

_*ख्याल रहे कि अगर वली गैरुल्लाह हैं और गैरुल्लाह से कुछ मांगना शिर्क है तो फिर अपने बाप से मां से भाई बहन से दोस्तों अज़ीज़ों से भी डायरेक्ट मांगना शिर्क होना चाहिए क्योंकि वो भी गैरुल्लाह हैं या फिर वहाबी देवबंदी अपने अज़ीज़ो अक़ारिब को खुदा समझकर अपनी ज़रूरत की चीज़ें मांगता होगा जब ही तो उनसे मांगना उनके नज़दीक शिर्क नहीं और नबी और वली से मांगना शिर्क है और अगर ये शिर्क नहीं है तो फिर नबी और वली से मांगना भी शिर्क नहीं है, क्योंके नबी और वली अपनी क़बरों में ज़िन्दा हैं,*_

_*इसीलिए आलाहज़रत फ़रमाते हैं👇🏻*_

_*🌹तू ज़िन्दा है वल्लाह तू ज़िन्दा है वल्लाह*_
_*मेरे चश्मे आलम से छुप जाने वाले 🌹*_

_*वलियों से डायरेक्ट मांगने की बहुत सारी रिवायतें मौजूद हैं इन्शा अल्लाहुर्रहमान फिर कभी मौक़ा मिलने पर सुबूत पेश किए जाएंगे,*_

_*​मज़ार पर चादर चढ़ाना​👇🏻*_

_*5) हदीस शरीफ़ - हुज़ूर सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम की मज़ारे अक़दस पर सुर्ख यानि लाल रंग की चादर डाली गई थी*_

_*📕  सही मुस्लिम, जिल्द 1, सफह 677*_

_*6) हदीस शरीफ़ - हुज़ूर सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम एक जनाज़े मे शामिल हुए बाद नमाज़ ए जनाज़ा व दफ़न एक कपड़ा मांगा और उसकी क़ब्र पर डाल दिया*_

_*📕 तफसीरे क़ुर्बती, जिल्द 1, सफह 26*_

_*​मज़ार पर फूल डालना​👇🏻*_

_*7) हदीस शरीफ़ - हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का गुज़र दो क़ब्रो के क़रीब से हुआ तो आपने फरमाया कि इन दोनों पर अज़ाब हो रहा है और किसी बड़े गुनाह की वजह से नहीं बल्कि मामूली गुनाह की वजह से, एक तो पेशाब की छींटों से नहीं बचता था और दूसरा चुगली करता था, फिर आपने एक तर शाख🌿 तोड़ी और आधी आधी करके दोनो क़ब्रों पर रख दी और फरमाया कि जब तक ये शाख तर रहेंगी तस्बीह करती रहेंगी जिससे कि मय्यत के अज़ाब में कमी होगी*_

_*📕 बुखारी, जिल्द 1, हदीस 218*_

_*इस हदीस शरीफ़ से साबित हुआ के तर शाख अल्लाह तआला की तस्बीह करती है ​जब तर शाख तस्बीह करती है तो फिर फूल भी करेगा क्योंके वो भी तर और ख़ुशबू दार होता है और जब इनकी बरक़त से अज़ाब में कमी हो सकती है तो एक मुसलमान के क़ुरआन की तिलावत व दुरूद व वज़ाइफ से तो और भी ज़्यादा सवाब पहुंचेगा, याद रहे साहिबे मज़ार पर यक़ीनन अज़ाब नहीं होता क्योके वो अल्लाह तआला के नेक मक़बूल बंदे हैं मगर फूलों की तस्बीह से साहिबे मज़ार ख़ुश  होते हैं और दुरूद व फ़ातिहा से उनके दरजात बुलंद होते हैं,*_

_*​मुर्दो का सुनना​*_

_*8). अल्लाह तआला फ़ररमाता है👇🏻*_

_*📝तर्जमा : तो सालेह ने उनसे मुंह फेरा और कहा एै मेरी क़ौम बेशक मैंने तुम्हें अपने रब की रिसालत पहुंचा दी*_

_*📕 पारा 8, सुरह एराफ, आयात 79*_

_*📖तफसीर - हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम क़ौमे समूद की तरफ नबी बनाकर भेजे गए,क़ौमे समूद के कहने पर आपने अपना मोअजज़ा दिखाया कि एक पहाड़ी से ऊंटनी ज़ाहिर हुई जिसने बाद में बच्चा भी जना, ये ऊंटनी तालाब का सारा पानी एक दिन खुद पीती दुसरे दिन पूरी क़ौम, जब क़ौमे समूद को ये मुसीबत बर्दाश्त न हुई तो उन्होंने इस ऊंटनी को क़त्ल कर दिया, तो आपने उनके लिए अज़ाब की बद्दुआ की जो के क़ुबूल हुई और वो पूरी बस्ती ज़लज़ले से तहस नहस हो गयी, जब सारी क़ौम मर गई तो आप उस मुर्दा क़ौम से मुखातिब होकर अर्ज़ करने लगे जो के ऊपर आयत में गुज़रा*_

_*📕 तफसीरे सावी, जिल्द 2, सफह 73*_

_*9) हदीस शरीफ़ - जंगे बद्र के दिन हुज़ूर सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम ने बदर के मुर्दा कुफ्फारों का नाम लेकर उनसे ख़िताब किया, तो हज़रत उमर फारूक़े आज़म ने हैरत से अर्ज़ किया कि क्या हुज़ूर मुर्दा बेजान जिस्मों से मुखातिब (बात करते) हैं तो सरकार सल्लललाहू तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि ऐ उमर खुदा की क़सम ज़िंदा लोग इनसे ज़्यादा मेरी बात को नहीं समझ सकते'*_

_*📕 बुखारी, जिल्द 1, सफह 183*_

_*​ज़रा सोचिये कि जब काफिरों के मुर्दो में अल्लाह ने सुनने की सलाहियत दी है तो फिर अल्लाह के मुक़द्दस बन्दे नबी और वली हमारी आवाज़ों को क्यों नहीं सुन सकते​, ज़रूर सुन सकते हैं*_

_*​क़ब्र वालों का मदद करना​👇🏻*_

_*10). अल्लाह तआला फ़रमाता है👇🏻*_

_*📝तर्जमा : और अगर जब वो अपनी जानों पर ज़ुल्म करें तो ऐ महबूब तुम्हारे हुज़ूर हाज़िर हों फिर अल्लाह से माफी चाहें और रसूल उनकी शफाअत फरमायें तो ज़रूर अल्लाह को बहुत तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान पायेंगे,*_

_*📕 पारा 5, सूरह निसा, आयत 64*_

_*11). हदीस शरीफ़ - हुज़ूर सल्लललाहू तआला अलैही वसल्लम की वफात के बाद एक ऐराबी आपकी मज़ार शरीफ़ पर हाज़िर हुआ और रौज़ा ए अनवर की खाक़ अपने सर पर डाली और क़ुरान की यही आयत पढ़ी फिर बोला कि हुज़ूर मैने अपनी जान पर ज़ुल्म किया अब मै आपके सामने अपने गुनाह की माफी चाहता हूं हुज़ूर मेरी शफाअत कराइये तो रौज़ा ए अनवर से आवाज़ आती है कि जा तेरी बख़्शिश हो गई*_

_*📕 तफसीर खज़ाइनुल इर्फान, सफह 105*_

_*12). क़ौल - हज़रते इमाम शाफई रज़िअल्लाहु तआला अन्ह फरमाते हैं जब भी मुझे कोई हाजत (ज़रुरत) पेश आती है तो मैं हज़रते इमाम ए आज़म रज़िअल्लाहु तआला अन्ह की क़ब्र पर आता हूं, 2 रकत नफ्ल पढता हूं और रब की बारगाह में दुआ करता हूं तो मेरी हाजत बहुत जल्द पूरी हो जाती है,*_

_*📕 रद्दुल मोहतार, जिल्द 1, सफह 38*_
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Al Waziftul Karima 👇🏻👇🏻👇🏻 https://drive.google.com/file/d/1NeA-5FJcBIAjXdTqQB143zIWBbiNDy_e/view?usp=drivesdk 100 Waliye ke wazai...