Thursday, September 27, 2018


         
              *_पेशावर औरते (वेश्याए)_*
―――――――――――――――――――――

 _*🔘अक्सर नौजवान अपनी जवानी पर काबु नही रखते है! गलत संगत और सोहबत मे पडकर अपनी हवस को मिटाने के लिये पेशावर (वेश्याओ) का सहारा लेते है! और कुछ शादी-शुदा भी अपनी बिवी के होते हुए पेशावर औरतो के पास जाना नही छोडते!*_

_*अगर एक ही (प्लेट) मे तरह -तरह के खाने खट्टा, मिठ्ठा, तेज और कडवा सब मिलाकर रख दिया जाए तो यकीनन उसमे बदबु और किडे पड ही जाएंगे! बस इन पेशावर औरतो की मिसाल इसी (प्लेट) की मानींद है! एक वक्त की जरा सी लज्जत के लिये उस (प्लेट) से एक बार भी कुछ चखा नही के वह एक ऐसी दलदल मे फंस जाता है, के जितना बाहर निकलने की कोशीश करता है, उतना ही और दलदल मे फंसता चला जाता है! नतीजा उसकी उम्र भर की सेहत, तंदरुस्ती, इज्जत, शौहरत, दौलत, आराम, सुकुन व चैन सब कुछ बर्बाद होकर रह जाता!*_

*_हमारा रब तबारक तआला इर्शाद फर्माता है..._*

*قُلۡ لِّلۡمُؤۡمِنِیۡنَ یَغُضُّوۡا مِنۡ  اَبۡصَارِہِمۡ وَ یَحۡفَظُوۡا فُرُوۡجَہُمۡ ؕ ذٰلِکَ اَزۡکٰی لَہُمۡ ؕ اِنَّ اللّٰہَ خَبِیۡرٌۢ  بِمَا یَصۡنَعُوۡنَ ﴿۳۰*

*_मुसलमान मर्दो को हुक्म दो, अपनी निगाहे कुछ निची रखे! और अपनी शर्मगाहो की हिफाजत करे! यह इनके लिये बहुत सुथरा है! बेशक अल्लाह को इनके कामो की खबर गै!_*

*_और अल्लाह तआला इर्शाद फरमाता है.._*

*اَلۡخَبِیۡثٰتُ لِلۡخَبِیۡثِیۡنَ وَ الۡخَبِیۡثُوۡنَ لِلۡخَبِیۡثٰتِ ۚ وَ الطَّیِّبٰتُ لِلطَّیِّبِیۡنَ وَ الطَّیِّبُوۡنَ لِلطَّیِّبٰتِ ۚ*

*_गंदियॉं गंदो के लिये, और गंदे गंदीयों के लिये और सुथरीयॉ सुथरो के लिये, और सुथरे सुथरीयो के लिये!_*

*_📕 तर्जुमा : कुरआन कंजुल इमान सुर ए नुर आयत नं. 30 और 20_*

_*इन आयतो की तफ्सीर मे उलमा ए किराम इर्शाद फर्माते है की..*_

*_"बदकार और गंदी औरते, गंदे और बदकार मर्दो के लायक है! इसी तरह बदकार और गंदे मर्द इसी काबील है के उनका ताल्लुक उन जैसे ही गंदी और बदकार औरतो से हो! जबकी सुथरे (पाक), नेक मर्द सुथरी (पाक), और नेक औरतो के लायक है! इसी तरह सुथरी, नेक औरत सुथरे और नेक मर्द के लायक है! और सुथरे, नेक का रिश्ता सुथरी, नेक औरतो से और सुथरी और नेक औरत का रिश्ता सुथरे और नेक मर्द से ही किया जा सकता है!_*

_*हदीस : हमारे प्यारे मदनी आका ﷺ इर्शाद फर्माते है..*_

*_"जिसने जिना किया या शराब पी अल्लाह तआला उसमे से ईमान को ऐसे निकालता है, जैसे इंसान सर से अपना कुर्ता निकालता है!_*

_*इस हदीस पाक से वह लोग दिल से सोचे जो पेशेवर औरतो के पास जाते है, और जिना जैसे खबीस गुनाह का इर्तीकाब करते है!*_

_*ताज्जुब है कोई मुसलमान होकर जिना करे! खुदारा ऐसे लोग अब भी होश मे आ जाए मौत के आने से पहले! बाद मे होश भी आया तो किस काम का!*_

*_इससे पहले भी यह बयान हो चुका है के पेशावर (वेश्याओ) से मुबाशरत जिना ही कहलाएगी, हॉलांकी वह इस काम के रुपए लेती है, और इस काम के पर राजी भी होती है! लेकीन फरीखैन की आपसी रजा भी इस काम को जिना से अलग न कर पाएंगी! जिना के बारे मे बहुत सारी हदीसे "जिना" के बाब (Chapter) मे पहले ही बयान हो चुकी है!_*

*_बदकार को नेक बनाने के लिये अमल :अगर किसी औरत का मर्द बदचलन हो और दुसरी औरतो के साथ हरामकारी करता हो! ऐसी औरत अपने बदकार मर्द से सोहबत से पहले बावुजु ग्यारह (11) "अल-वलीयो" पढे! अव्वल आखीर एक-एक मर्तबा दरुद शरीफ पढे! फिर शैहर से मुबाशरत करे! (यह अमल हर बार जब भी उसका शौहर उससे सोहबत करना चाहे कर लिया करे) इंशा अल्लाह तआला वह मर्द परहेजगार हो जाएंगा! इसी तरह किसी शख्स की औरत बदचलन हो या बदकारी करती हो तो वह भी अपनी औरत से सोहबत करने से पहले यह अमल हर बार कर लिया करे! इंशा अल्लाह तआला  वह औरत नेक व परहेजगार बन जाएंगी!_*

*_📕 वजाइफे रज्वीया सफा नं. 219_*
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


                  *_जानवरों से सोहबत_*
―――――――――――――――――――――

*_🔘क्या आप ने जानवरों से भी बढ़ कर हैवान देखे है? यह वोह लोग है जिन्होंने शर्म व हया  कानून की हर जंजीर को तोड़ा है! इन्हें कुछ नहीं मिलता तो जानवरों को ही अपनी हवस का शिकार बनाते है!और यह सुबूत फरहाम करते है के हम देखने मे तो वैसे इन्सान ही नज़र आते है लेकिन हवस और  दरिन्दागी के मामले मे जानवरों से भी बढ़ कर है।_*
*_ऐसे लोग जो इस काम मे मुब्तिला है! इस हदीस शरीफ को पढ कर यकीनन खौफ़े ए  खुदा से डर कर सहम जाएंगे!._*
*_हदीस : हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदि अल्लाहु तआला अन्हु से रिवायत है कि नबी  ए करीम ﷺ ने इर्शाद फ़र्माया.._*

*_"जो शख़्स जानवर से सोहबत करे, उसे और उस जानवर दोनों को क़त्ल कर दो"_*
*_📕 अबूूदाऊद शरीफ, जिल्द नं 3, बाब नं 349, हदीस नं 1052, सफा नं 376, इब्नेमाज़ा, जिल्द नं 2, बाब नं 143, हदीस नं 334, सफा नं 108_*
*_लोगों ने हज़रत अब्दुल्लाह इब्ने अब्बास रदि अल्लाहु तआला अन्हु से पूछा कि...... "जानवर ने क्या बिगाड़ा है" ? तो उन्होंने ... "इसका सबब तो मैने  रसूलुल्लाह ﷺ से नही सुना मगर हुज़ूर ने ऐसा ही किया बल्कि उस जानवर का गोश्त तक खाना पसन्द न फ़र्माया"।_*
*_गालीबन  हुज़ूर ﷺ ने जानवर को क़त्ल करने का हुक़्म इस लिए दिया हो कि  जब भी उसे कोई देखेगा तो गुनाह का मंजर याद आएगा! दूसरी हिक़्मत इस में यह भी हो कि उम्मत को यह तालीम देना मक़्सूद है कि यह काम किस कद्र बुरा है की उसको करने वाले को क़त्ल किया जाए और जिस से यह काम किया गया इसमे किस कद्र बुराई आ गई की इसे भी  क़त्ल कर दिया जाए।  (वल्लाहु तआला आलम )_*_
*_अभी हाल ही में जदीद तहकीक से  साबित हुआ है कि जो मर्द या औरत जानवर से अपनी ख्वाहिश पूरी करते है! उन्हे एड्स (AIDS) की ना काबीले इलाज बीमारी हो जाती है!  याद रहे  एड्स (AIDS) का दूसरा नाम मौत है_*
*_मसअला : किसी नाबालिग़ ने बकरी, गाय, भैंस, (या और किसी जानवर) के साथ सोहबत की तो उसे डाँट डपट कर सख़्ती से समझाया जाए । और अगर बालिग़ ने ऐसा काम किया तो उसे इस्लामी हुकुमत हो तो उसे इस्लामी सज़ा दी जाएगी! जिसका इख़्तियार इस्लामी बादशाह को है, वह जानवर जिब्ह करके दफ़्न कर दिया जाए!_*

*_📕 दुर्रे मुख्तार बहवाला फ़तावा-ए-रज़्वीया, जिल्द नं 5, सफा नं 983_*
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


             *_अपने हाथों अपनी बर्बादी_*
―――――――――――――――――――――

*_जब एक बच्चा होश की मंजील को छुता है, तो वह अपने घर (TV और मोबाईल) के जरीए वह सब कुछ देखता और जान लेता है जो इस उम्र मे नही जानना चाहीये! जब होश संभीलते ही एक मर्द और औरत के बीच के खास तअल्लुकात को देखता है तो उसमे भी फितरी तौर पर वही सब कुछ करने की ख्हाहिश पैदा होने लगती है! फिर यह ख्वाहिश तरक्की करके उम्र के साथ साथ ज्यादा बढती जाती है! और वह खुद को उम्र से पहले ही जवान समझने लगता है! मुसीबत बालाए मुसीबत की स्कुल, कॉलेज, बाजार और सडको पर फैशन की नुमाईश उसको जज्ब ए शहवत को जुनुन की हद तक पहुंताने मे आग पर पेट्रोल का काम करती है! और जब वह इस नफ्सानी ख्वहिश को पुरा करने के असबाब नही पाता है तो, (वह गलत तरीको का इस्तेमाल करने लगता है!) जब भी वह तन्हा होता है, तो यह जिंसी ख्वाहिश उसे परेशान करने लगती है! फिर वह तस्कीन के लिये अपने ही हाथो अपनी कुव्वत को बर्बाद करके मजा हासील करने की बुरी आदत मे मुब्तीला हो जाता है!_*

*_हाथो की यह हरकत (उज्वे तनासुल) को कमजोर बना देती है! और ऐसा शख्स इस करतुत के सबब औरत के काबील नहीं रहता!_*

*_📌याद रखीये यह वह किमती खजाना है जो खुन से बनता है, और खुन भी वह जो तमाम बदन को गिजा पहुंचाने के बाद बचा, बस अगर इस मनी के खजाने को इस तेजी के साथ बर्बाद किया गया तो दिल कमजोर होंगा! और दिल पर तमाम इंसानी जिस्म का दारोमदार है! जिस्म को खुन नही पहुंचा यानी यह आदत इस हद तक पहुंच चुकी के खुन बनने भी न पाया था की निकालने की नौबत आ गयी तो जिगर का काम खराब हुआ!_*

*_एक  तजरूबेकार डॉक्टर ने अपनी तहकीक मे लिखा है.._*

*_"एक हजार तपेदीक (TB) के मरीजो को देखने के बाद साबीत हुआ की एक सौ छियास्सी (186) मरीज औरतो से ज्यादा सोहबत करने की वजह से इस मर्ज मे मुब्तला है! और चार सौ चौदह (414) सिर्फ अपने हाथो अपनी कुव्वत को बर्बाद करने की वजह से और बाकी दुसरे मरीजो की बिमारी की वजह दुसरी थी! हमने एक सौ चौबीस (124) पागलो का मुआयना किया, उनके मुआयना करने से मालुम हुआ की उनमे चौबीस (24) सिर्फ अपने हाथो अपनी कुव्वत को बर्बाद करने की वजह से पागल हुए है, और बाकी एक (100) सौ पागल दुसरी वुजुहात से!"_*

*_📕 जवानी की हिफाजत अज मौलाना शाह मुहम्मद अब्दुल हलीम अलैहिर्रहमा सफा नं. 67_*

*_इंसानी दौलत का अनमोल खजाना अगर इंसानी जिस्म की संदुक मे चंद दिनो तक अमानत रहे, तो दुबारा खुन  मे जज्ब होकर खुन को कुव्वत देने वाला, सेहत को दुरुस्त और बदन को मजबुत बनाने वाला, रुआब और हुस्न व जमाल को बढाने वाला और कव्वत ए बाह मे चार चॉंद लगाने वाला साबीत होंगा! दिमाग की तेजी तरक्की पाएंगी, याद दाश्त तेज होंगी, ऑंखो मे सुर्खी दौडेंगी, हिम्मत और बुलंद हौसला की सर बुलंदी इस दौलत मे इजाफा की अलामत होंगी! कुछ हकीमो ने कहा है.._*

*_"जिसे हद से ज्यादा दुबला, और कमजोर, वहशीयाना (डरावनी) शक्ल व सुरत का पाओ, जिसकी ऑंखो मे गढे पड गये हो, ऑंखो की पुतलियॉं फैल गई हो, हद से ज्यादा शर्मीला हो, तन्हाई पसंद करता हो, उसके बारे मे यकीन करलो की उसने अपने हाथो खुन (अपने हाथो खुद को बर्बाद किया है) बहाया है!"_*

*_💫आज लोगो से छिपकर यह बुराई कर रहे हो, माना की तुम्हारी इस बुरी हरकतो को किसी ने नहीं देखा! लेकीन यह तो सोचो की जाहीर व बातीन का जानने वाला अल्लाह तआला तुम्हारे इस करतुत को देख रहा है! अल्लाह तआला ने जिना की सजा बताई अगर यह सजा जिनाकार दुनियॉ मे पा जाए तो आखीरत के अजाब से बच जाए! लेकीन अपने हाथो इस अनमोल खजाने को बर्बाद करना सख्त गुनाह है!_*

*_📍अगर खुदा न ख्वास्ता कोई नसीब का दुश्मन इस बुरी आदत का शिकार हो तो उसे दर्दमंदाना मशवरा है की, खुदारा इश्तेहारी दवाओ की तरफ न जाए! पहले सच्चे दिल से तौबा करे! और किसी अच्छे तजरुबेकार, तालीम याफ्ता हकीम या डॉक्टर के पास जाए, और बगैर किसी शर्म व झिजक के उसे पुरी बात बताए! जब तक वह कहे बाकायदा पुरे परहेज के साथ उसके इलाज पर अमल करे!_*
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


          _*क्या वहाबियों से निकाह होगा.❓*_
―――――――――――――――――――――

_*🔘वहाबियों से निकाह करने के मुताअ़ल्लिक इमाम इश्क़ो मुहब्बत मुजद्दिदे दीन व मिल्लत अज़ीमुल बरक़त आला हज़रत अश्शाह इमाम अहमद रज़ा खाँ (रदिअल्लाहो तआला अन्हो) अपनी "मलफ़ूज़ात" मे इरशाद फरमाते है।*_

_*💫इरशाद : सुन्नी मर्द या औरत का शिया, वहाबी, देवबन्दी, नेचरी, कादयानी, जितने भी दीन से फिरे लोग है उनकी औरत या मर्द से निकाह नहीं होगा। अगर निकाह किया तो निकाह न हो कर सिर्फ़ ज़िना होगा। और औलाद ज़ायज़ न होकर नाज़ायज़ व हरामी कहलाएगी फ़तावा-ए-आलमगीरी मे है*_

*لا یجوز النکاح المرتد*
*مع مسلمة ولا كافرة اصلية ولا مرتدة وكذالایجوز نكاح المرتدة مع احد*

_*👆🏻👆🏻गर कहीं  लिखने मे गल़ती (Mistake) हो तो जरूर बताएं*_

_*📕 अ़लमलफ़ूज़ जिल्द नं 2, सफा नं 105*_

_*अक्सर हमारे कुछ कम अक़्ल- न समझ सुन्नी मुसलमान जिन्हें दीन की माअ़लूमात व ईमान की अ़हमियत माअ़लूम नही होती वोह वहाबियों से आपस में रिश्ते जोड़ते है। कुछ बदनसीब सब जानने के बावजूद वहाबियों से आपस में रिश्ता करते हैं!*_
     
_*✍🏻 कुछ सुन्नी हज़रात ख्याल करते हैं। कि वहाबी अ़क़ीदे की लड़की अपने घर ब्याह कर ला लो। फिर वोह हमारे माहौल में रहकर खुद ब खुद सुन्नी हो जाएगी अव्वल तो यह निकाह ही नही होता क्यों कि जिस वक्त यह निकाह हुआ उस वक्त तक लड़का सुन्नी और लड़की वहाबी अ़क़ीदे पर क़ायम थी। लिहाजा सिरे से ही येह निकाह ही नही हुआ,*_

_*सैंकड़ो जगह तो येह देखा गया है कि किसी सुन्नी ने वहाबी घराने मे येह सोचकर रिश्ता किया कि हम समझा बुझा कर हम अपने माहौल में रखकर वहाबी से सुन्नी बना लेंगे लेकिन वह समझा कर सुन्नी बना पाते इससे पहले ही उस वहाबी रिश्तेदारों ने उन्हें कुछ ज़्यादा ही समझा दिया और अपना हम ख़्याल बनाकर सुन्नी से वहाबी बना डाला (अल्लाह की पनाह) सारी होश़ियारी धरी की धरी रह गयी और दीन व दुनिया दोनों बर्बाद हो गये*_

_*📍यह बात हमेशा याद रखिए एक ऐसे शख्स को समझाया जा सकता है तो वहाबियों के बारे में हक़ीक़त से वाकिफ न हो लेकिन ऐसे शख्स को समझा पाना मुम्क़िन ही नही जो सबकुछ जानता और समझता है। औलमा -ए- देवबन्द [ वहाबियों ] की हुज़ूर ﷺ अम्बिया-ए-किराम, बुजुरगाने दीन, की शाने अ़क्दस में गुस्ताख़ियों को समझता है। उनकी किताबों में येह सब गुस्ताख़ाना बातों को पढ़ता है लेकिन इस सबके बावजूद येह कहता है कि येह (वहाबी) तो बहुत अच्छे लोग हैं इन्हें बुरा नहीं कहना चाहिए। ऐसे लोगों को समझा पाना हमारे बस में नहीं।*_

_*📖 आयत : अल्लाह तआला---ऐसे लोगों के मुत्अ़ल्लिक़ इरशाद फरमाता है,*_

_*तर्जुमा : अल्लाह ने उनके दिलों पर और कानो पर मुहर कर दी और उनकी आँखों पर  घटा टूप है और उनके लिए बड़ा अज़ाब़ है*_

_*📕 तर्जुमा : कन्जुल इमान पारा 1, सूरह ए बखरा, आयत नं 7*_

_*📌लिहाजा जरूरी व अहम फर्ज है कि ऐसे लोगों से जिनके दिलों पर अल्लाह ने मोहर (Seal छाप) लगा दी हो उनसे रिश्ता न क़ायम करें वर्ना शादी शादी न होकर ज़िना रह जाएगी।*_
   
_*अल्हमदुलिल्लाह आज दुनिया में सुन्नी लड़कियों और लड़कों की कोई कमी नहीं है। और इन्शा अल्लाह तआला अहले सुन्नत व ज़माअत के मानने वाले क़यामत तक बड़ी तादाद में शानो शौक़त के साथ क़ायम रहेंगे*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


                      *_सुन्नी और मज़ार_*
―――――――――――――――――――――

*_किसी की क़ब्र पर इमारत बना देना ही मज़ार कहलाता है, अल्लाह के मुक़द्दस बन्दों की मज़ार बनाना और उनसे मदद लेना जायज़ है, पढ़िये_*

*_मज़ार बनाना_*

*_1) तो बोले उनकी ग़ार पर इमारत बनाओ उनका रब उन्हें खूब जानता है वह बोले जो इस काम मे ग़ालिब रहे थे कसम है कि हम तो उन पर मस्जिद बनायेंगे_*

_*📕 पारा 15, सूरह कहफ, आयत 21*_

*_तफसीर_*

*_असहाबे कहफ 7 मर्द मोमिन हज़रत ईसा अलैहिस्सलाम की उम्मत के लोग थे बादशाह दक़्यानूस के ज़ुल्म से तंग आकर ये एक ग़ार मे छिप गये जहां ये 300 साल तक सोते रहे 300 साल के बाद जब ये सोकर उठे और खाने की तलाश मे बाहर निकले तो उनके पास पुराने सिक्के देखकर दुकानदारो ने उन्हे सिपाहियों को दे दिया उस वक़्त का बादशाह बैदरूस नेक और मोमिन था जब उस को ये खबर मिली तो वो उनके साथ ग़ार तक गया और बाकी तमाम लोगो से भी मिला असहाबे कहफ सबसे मिलकर फिर उसी ग़ार मे सो गये जहां वो आज तक सो रहें हैं हर साल दसवीं मुहर्रम को करवट बदलते हैं हज़रत इमाम मेंहदी रज़ियल्लाहु तआला अन्हु के दौर मे उठेंगे और आपके साथ मिलकर जिहाद करेंगे बादशाह ने उसी ग़ार पर इमारत बनवाई और हर साल उसी दिन वहां तमाम लोगों को जाने का हुक्म दिया_*

_*📕 तफसीर खज़ाएनुल इर्फान, सफह 354*_

_*मज़ार पर जाना*_

*_2) हुज़ूर सल्लल्लाहो तआला अलैहि वसललम इरशाद फरमाते हैं कि मैंने तुम लोगों को क़ब्रों की ज़ियारत से मना किया था अब मैं तुम को इजाज़त देता हूं कि क़ब्रों की ज़ियारत किया करो_*

_*📕 मुस्लिम, जिल्द 1, हदीस 2158*_

*_3) खुद हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैही वसल्लम हर साल शुहदाये उहद की क़ब्रो पर तशरीफ़ ले जाते थे और आपके बाद तमाम खुल्फा का भी यही अमल रहा_*

_*📕 शामी, जिल्द 1, सफह 604*_
_*📕 मदारेजुन नुबुव्वत, जिल्द 2, सफह 135*_

*_जब एक नबी अपने उम्मती की क़ब्र पर जा सकता है तो फिर एक उम्मती अपने नबी की या किसी वली की क़ब्र पर क्यों नहीं जा सकता_*

*_मज़ार पर चादर चढ़ाना_*

*_4) खुद हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की मज़ारे अक़दस पर सुर्ख यानि लाल रंग की चादर डाली गई थी_*

_*📕 सही मुस्लिम, जिल्द 1, सफह 677*_

*_5) हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम एक जनाज़े मे शामिल हुए बाद नमाज़ को एक कपड़ा मांगा और उसकी क़ब्र पर डाल दिया_*

_*📕 तफसीरे क़ुर्बती, जिल्द 1, सफह 26*_

_*मज़ार पर फूल डालना*_

*_6) हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम का गुज़र दो क़ब्रो पर हुआ तो आपने फरमाया कि इन दोनों पर अज़ाब हो रहा है और किसी बड़े गुनाह की वजह से नहीं बल्कि मामूली गुनाह की वजह से, एक तो पेशाब की छींटों से नहीं बचता था और दूसरा चुगली करता था, फिर आपने एक तार शाख तोड़ी और आधी आधी करके दोनो क़ब्रों पर रख दी और फरमाया कि जब तक ये शाख तर रहेगी तस्बीह करती रहेगी जिससे कि मय्यत के अज़ाब में कमी होगी_*

_*📕 बुखारी, जिल्द 1, हदीस 218*_

*_तो जब तर शाख तस्बीह पढ़ती है तो फूल भी पढ़ेगा और जब इनकी बरक़त से अज़ाब में कमी हो सकती है तो एक मुसलमान के तिलावतो वज़ायफ से तो ज़्यादा उम्मीद की जा सकती है और मज़ार पर यक़ीनन अज़ाब नहीं होता मगर फूलों की तस्बीह से साहिबे मज़ार का दिल ज़रूर बहलेगा_*

_*मुर्दो का सुनना*_

*_7) तो सालेह ने उनसे मुंह फेरा और कहा एै मेरी क़ौम बेशक मैंने तुम्हें अपने रब की रिसालत पहुंचा दी_*

_*📕 पारा 8, सुरह एराफ, आयात 79*_

*_तफसीर_*

*_हज़रत सालेह अलैहिस्सलाम क़ौमे समूद की तरफ नबी बनाकर भेजे गए, क़ौमे समूद के कहने पर आपने अपना मोजज़ा दिखाया कि एक पहाड़ी से ऊंटनी ज़ाहिर हुई जिसने बाद में बच्चा भी जना, ये ऊंटनी तालाब का सारा पानी एक दिन खुद पीती दुसरे दिन पूरी क़ौम, जब क़ौमे समूद को ये मुसीबत बर्दाश्त न हुई तो उन्होंने इस ऊंटनी को क़त्ल कर दिया, तो आपने उनके लिए अज़ाब की बद्दुआ की जो कि क़ुबूल हुई और वो पूरी बस्ती ज़लज़ले से तहस नहस हो गयी, जब सारी क़ौम मर गई तो आप उस मुर्दा क़ौम से मुखातिब होकर अर्ज़ करने लगे जो कि ऊपर आयत में गुज़रा_*

_*📕 तफसीर सावी, जिल्द 2, सफह 73*_

*_8) जंगे बद्र के दिन हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने बद्र के मुर्दा कुफ्फारों का नाम लेकर उनसे ख़िताब किया, तो हज़रत उमर फारूक़े आज़म ने हैरत से अर्ज़ किया कि क्या हुज़ूर मुर्दा बेजान जिस्मों से मुखातिब हैं तो सरकार सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम ने फरमाया कि 'एै उमर खुदा की कसम ज़िंदा लोग इनसे ज़्यादा मेरी बात को नहीं समझ सकते'_*

_*📕 बुखारी, जिल्द 1, सफह 183*_

*_सोचिये कि जब काफिरों के मुर्दो में अल्लाह ने सुनने की सलाहियत दे रखी है तो फिर अल्लाह के मुक़द्दस बन्दे क्यों हमारी आवाज़ों को नहीं सुन सकते_*

_*क़ब्र वालों का मदद करना*_

*_9) और अगर जब वो अपनी जानों पर ज़ुल्म करें तो ऐ महबूब तुम्हारे हुज़ूर हाज़िर हों फिर अल्लाह से माफी चाहें और रसूल उनकी शफाअत फरमायें तो ज़रूर अल्लाह को बहुत तौबा क़ुबूल करने वाला मेहरबान पायेंगे_*

_*📕 पारा 5, सूरह निसा, आयत 64*_

*_हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैही वसल्लम की वफात के बाद एक आराबी आपकी मज़ार पर हाज़िर हुआ और रौज़ये अनवर की खाक़ अपने सर पर डाली और क़ुरान की यही आयत पढ़ी फिर बोला कि हुज़ूर मैने अपनी जान पर ज़ुल्म किया अब मै आपके सामने अपने गुनाह की माफी चाहता हूं हुज़ूर मेरी शफाअत कराइये तो रौज़ये अनवर से आवाज़ आती है कि जा तेरी बखशिश हो गई_*

_*📕 तफसीर खज़ाएनुल इर्फान, सफह 105*_

*_10) हज़रते इमाम शाफई रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं जब भी मुझे कोई हाजत पेश आती है तो मैं हज़रते इमामे आज़म रज़ियल्लाहु तआला अन्हु की क़ब्र पर आता हूं, 2 रकत नफ्ल पढता हूं और रब की बारगाह में दुआ करता हूं तो मेरी हाजत बहुत जल्द पूरी हो जाती है_*

_*📕 रद्दुल मुख्तार, जिल्द 1, सफह 38*_

_*वहाबी और मज़ार*_

*_एक सवाल के जवाब पर मौलवी रशीद अहमद गंगोही लिखते हैं कि_*

*_11) क़ुबूरे औलिया पर जाना और उनसे फैज़ हासिल करना इसमें कुछ हर्ज़ नहीं_*

_*📕 फतावा रशीदिया, जिल्द 1, पेज 223*_

*_12) मौलाना रफ़ी उद्दीन के साथ हज़रत (थानवी) ने सरे हिन्द पहुंचकर शेख मुजद्दिद उल्फ सानी के मज़ार पर हाज़िरी दी_*

_*📕 हयाते अशरफ, सफह 25*_

*_थानवी ने लिखा_*

*_13) दस्तगिरी कीजिये मेरे नबी_*
     *_कशमकश में तुम ही हो मेरे वली_*

*_📕 नशरुत्तबीब फि ज़िक्रे नबीईल हबीब, सफह 164_*

*_मौलवी आरिफ सम्भली ने लिखा है कि_*

*_14) पस बुज़ुर्गो की अरवाह से मदद लेने के हम मुंकिर नहीं_*

*_📕 बरैली फितने का नया रूप, सफह 139_*

*_मौलवी हुसैन अहमद टांडवी लिखता है कि_*

*_15) हमें जो कुछ मिला इसी सिलसिलाए चिश्तिया से मिला, जिसका खाये उसी का गाये_*

_*📕 शेखुल इस्लाम नम्बर, सफह 13*_

*_इतना सब कुछ पढ़ने के बाद आज के दोगले वहाबियों को चाहिये कि सुन्नी से मुनाज़रा करना छोड़ें और जाकर चुल्लू भर पानी में डूब कर मर जायें और अगर अब भी कुछ शर्म बाकी है तो फौरन अपने दोगले अक़ायद से तौबा करें और सच्चे दिल से मज़हबे अहले सुन्नत वल जमात यानि मसलके आलाहज़रत पर क़ायम हो जायें_*
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


            _*सफेद दाग - (White Stains)*_
―――――――――――――――――――――

_*ये एक खतरनाक और मूज़ी मर्ज़ है जो आदमी के हुस्नो जमाल को तबाहो बर्बाद कर देता है, ये मर्ज़ अक्सर खून की खराबी की वजह से होता है, ये कुछ नुस्खे हैं इस्तेमाल करें इंशा अल्लाह बीमारी दूर होगी*_

_*1. चाकसू 20 ग्राम, इंजीर 20 ग्राम,बाबची 20 ग्राम, तुख्म पिंदार 20 ग्राम सबको रात में मिट्टी के बर्तन में आधे पाव पानी में भिगो दें और सुबह को नहार मुंह बग़ैर मले हुए उसको कपड़े से छान लें और उसमें 20 ग्राम शहद मिलाकर पिएं, और बची हुई बाकी चीज़ें पीसकर दागों पर लगाया जाए, इस अमल की मुद्दत 40 दिन है*_

_*📕 शम्ये शबिस्ताने रज़ा, हिस्सा 3, सफह 433*_

_*2. शहद और लहसुन मिलाकर खाने से इस मर्ज़ में काफी फायदा होता है*_

_*3. ज़रीख, तूतिया, मूली की बीज एक बराबर लेकर पीस कर उसमें ज़ैतून का तेल मिला कर दाग की जगह रगड़ कर लगाएं, इंशा अल्लाह 3 दिन से ही फ़ायदा शुरू हो जायेगा*_

_*📕 मुजर्बाते सुयूती, पेज 181*_

_*4. भैंस की चर्बी में इन्द्रानी नमक मिलाकर दाग पर मलने से जल्द ही ये दाग दूर हो जाते हैं*_

_*📕 हयातुल हैवान, जिल्द 2, पेज 31*_

_*5. बैगन पानी में पकाएं जब गल जाए तो पानी छानकर जैतून के तेल में साथ मिलकर खौलाएं जब पानी जल जाए और तेल बाकी रह जाए तो इस तेल को दागों पर लगाएं*_

_*📕 इलाजुल ग़ुरबा, सफह 170*_

_*6. सरसों के बीज को गाय के दूध में डालकर पकाएं जब दूध खोये जैसा गाढ़ा हो जाए तो बीज निकालकर धोकर सुखा लें और बारीक पीसकर 1 ग्राम रोज़ाना गाय के दूध के साथ इस्तेमाल करें*_

_*📕 कंज़ुल मुजरबात, सफह 769*_

*7. قل هو المعين يا المعروف المنان والحليم* 

_*"क़ुल हुवल मोईन या माअरूफ़ुल मन्नान वल हलीम" ज़र्द रंग की रोशनाई से प्लेटों पर लिखकर दिन में 3 बार धोकर पिलायें*_

_*लिखना अरबी में ही है, पढ़ने में आ जाये इसलिये मैने हिन्दी में लिख दिया है*_

_*📕 रूहानी इलाज, सफह 42*_

_*परहेज़ - मछली, गुड़, खटाई, अंडा, चावल, दूध, दही, माश की दाल, आलू, लौकी*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


                       *_ईमान किया है_*
―――――――――――――――――――――
*_🔘 ईमान कुर्ता पैजामा पहनने दाढ़ी रखने या टोपी लगाने का नाम नहीं है बल्कि ईमान सिर्फ और सिर्फ ये हैं कि अपने नबी से अपनी जान से भी ज़्यादा मुहब्बत की जाये_*
*_ये मैं नहीं कह रहा बल्कि खुद हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम इरशाद फरमाते हैं कि_*
*_तुम में से कोई उस वक़्त तक मुसलमान नहीं होगा जब तक कि मैं उसे उसके मां-बाप उसकी औलाद और सबसे ज़्यादा महबूब ना हो जाऊं_*
_*📕 बुखारी, जिल्द 1, सफह 7*_
*_और मुहब्बत में सबसे खास बात क्या होती है जानते हैं ये कि मोहिब अपने महबूब की सारी कमियां नज़र अंदाज़ करके फक़त उसकी खूबियां ही बयान करता है हालांकि ये आम मुहिब और उनके महबूब सब के सब सर से लेकर पैरों तक ऐबों का मुजस्समा होते हैं, मगर रब के वो महबूब हमारे और आपके आक़ा जनाबे मुहम्मदुर रसूल अल्लाह सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम जो कि हर ऐब से पाक और मासूम पैदा किये गए हैं मगर कुछ हरामखोर उनके अंदर भी ऐब तलाश करते फिरते हैं और दावा मुसलमान होने का करते हैं, जबकि अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त क़ुरान मुक़द्दस में इरशाद फरमाता है कि_*
*_खुदा की कसम खाते हैं कि उन्होंने नबी की शान में गुस्ताखी नहीं की अल्बत्ता बेशक वो ये कुफ्र का बोल बोले और मुसलमान होकर काफिर हो गए_*
_*📕 पारा 10, सूरह तौबा, आयत 74*_
*_अब हर पढ़े लिखे और बे पढ़े लिखे से ये सवाल है कि नीचे वहाबियों की किताबों से दी गई इबारतें पढ़ें या पढ़वाकर सुनले और अक़्ल से फैसला करे कि क्या ये कलिमात हुज़ूर की शान में गुस्ताखी के नहीं हैं और क्या ऐसा कहने वालों या या ऐसा कहने वालों को जो सही कहे क्या उन्हें मुसलमान समझा जा सकता है, पढ़िए_*
_*! तक़वियतुल ईमान सफह 27 पे हुज़ूर को चमार से ज़्यादा ज़लील लिखा, माज़ अल्लाह, क्या ये गुस्ताखी नहीं है*_
_! *तक़वियतुल ईमान सफह 56 पे लिखा कि नबी को किसी बात का इख़्तियार नहीं है, माज़ अल्लाह, क्या ये गुस्ताखी नहीं है*_
_! *तक़वियतुल ईमान सफह 75 पे लिखा कि नबी के चाहने से कुछ नहीं होता, माज़ अल्लाह, क्या ये गुस्ताखी नहीं है*_
_! *तहज़ीरुन्नास सफह 8 पे लिखा कि उम्मती भी नबी से अमल में आगे बढ़ जाते हैं, माज़ अल्लाह, क्या ये गुस्ताखी नहीं है*_
_! *तहज़ीरुन्नास सफह 43 पे लिखा कि हुज़ूर खातेमुन नबीयीन नहीं है, माज़ अल्लाह, क्या ये गुस्ताखी नहीं है*_
_! *बराहीने कातिया सफह 122 पे लिखा कि हुज़ूर का इल्म शैतान से भी कम है, माज़ अल्लाह, क्या ये गुस्ताखी नहीं है*_
_! *हिफज़ुल ईमान सफह 7 पे लिखा कि हुज़ूर का इल्म तो जानवरों की तरह है, माज़ अल्लाह, क्या ये गुस्ताखी नहीं है*_
_! *सिराते मुस्तक़ीम सफह 148 पे लिखा कि नबी का ख्याल नमाज़ में लाना गधे और बैल से भी बदतर है, माज़ अल्लाह, क्या ये गुस्ताखी नहीं है*_
*_अगर ये सब बातें इन वहाबियों के बाप-दादा की शान में की जाए तो क्या वो इसे अच्छा समझेंगे नहीं और यक़ीनन नहीं तो फिर कैसे एक मुसलमान इन काफिरों को अच्छा समझे, जिसने मेरे आक़ा की शान में गुस्ताखी की और उन्हें ईज़ा दी तो उसके लिए रब का ये फरमान है,पढ़ लें_*
*_वो जो रसूल अल्लाह को ईज़ा देते हैं उनके लिए दर्दनाक अज़ाब है_*
_*📕 पारा 10, सूरह तौबा, आयत,61*_
*_और फुक़्हा का ऐसे बद बख्तों के बारे में क्या कहना है ये भी पढ़ें_*
*_जो किसी नबी की गुस्ताखी के सबब काफिर हुआ तो किसी भी तरह उसकी तौबा क़ुबूल नहीं और जो कोई उसके कुफ्र में या अज़ाब में शक करे वो खुद काफिर है_*
_*📕 रद्दुल मुख़्तार, जिल्द 3, सफह 317*_
*_और मेरे आलाहज़रत अज़ीमुल बरक़त रज़ियल्लाहु तआला अन्हु फरमाते हैं कि_*
*_किसी भी काफिर की तौबा क़ुबूल है मगर जो हुज़ूर सल्लललाहो तआला अलैहि वसल्लम की शान में गुस्ताखी करके काफिर हुआ तो किसी भी अइम्मा के नज़दीक उसकी तौबा क़ुबूल नहीं, अगर इस्लामी हुक़ूमत हो तो ऐसो को क़त्ल ही किया जाए अगर चे उनकी तौबा सच्ची ही क्यों ना हो अगर तौबा सही हुई तो क़यामत के दिन बख्शा जायेगा मगर यहां उसकी सज़ा मौत ही है_*
_*📕 तम्हीदे ईमान, सफह 42*_
*_अब सोचिये खुदा और रसूल के ये मुजरिम जो क़त्ल के मुस्तहिक़ हो चुके उनसे बात करना उनसे सलाम जवाब करना उनके साथ खाना पीना उनके यहां रिश्तेदारी करना किस हद तक शर्म की बात है, और क्या इस मेल-जोल पर हम खुदा का क़हर मोल नहीं ले रहे हैं ये आखिरी रिवायत पढ़ लीजिए समझदार के लिए बहुत है_*
*_मौला ने हज़रत जिब्रील अलैहिस्सलाम को हुक्म दिया कि फलां बस्ती पर अज़ाब नाज़िल करदे तो जिब्रील अलैहिस्सलाम बोले कि मौला उस बस्ती में तेरा एक नेक बन्दा है जो एक आन के लिए भी तेरी इबादत से ग़ाफिल ना रहा, मौला फरमाता है कि फिर भी सब पर अज़ाब नाज़िल कर बल्कि पहले उस नेक पर अज़ाब नाज़िल कर क्योंकि उसने गुनाह को देखकर भी अनदेखा कर दिया_*
_*📕 अशअतुल लमआत, जिल्द 4, सफह 183*_
*_जब कोई क़ौम में गुनाह होता है और कोई नेक बन्दा रोकने की ताक़त रखने के बावजूद भी उसे ना रोके तो सब अज़ाबे इलाही के मुस्तहिक़ होंगे_*
_*📕 मिश्कात, सफह 437*_

*_अस्तग़फ़ेरुल्लाह, क्या ही इबरतनाक रिवायत है,सिर्फ गुनाह को गुनाह और मुजरिम को मुजरिम ना समझने पर अज़ाब की वईद आई है तो अंदाजा लगाइये कि जो खुद उस गुनाह में शामिल हो जाए वो कैसे मौला के अज़ाब से बचेगा, और आजकल तो ऐसे मुसलमानों की कसरत है जो दुश्मनाने रसूल को दुश्मन ही नहीं समझते हालांकि अगर कोई उनके मां-बाप को गाली देदे तो हाथा पाई पर उतर आएंगे मगर जो नबी की शान में गुस्ताखियां करते फिरते हैं उन्हें अपना अज़ीज़ समझते हैं, मौला तआला से दुआ है कि मुसलमानों को अपने हबीब से सच्ची मोहब्बत करने की तौफीक़ अता फरमाए और हम सबको मसलके आलाहज़रत पर क़ायम रखे और इसी पर मौत नसीब अता  फरमाये-आमीन_*
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

Al Waziftul Karima 👇🏻👇🏻👇🏻 https://drive.google.com/file/d/1NeA-5FJcBIAjXdTqQB143zIWBbiNDy_e/view?usp=drivesdk 100 Waliye ke wazai...