Monday, December 3, 2018



_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 01)*_
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*_🌹फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह व अज़मते सहाबा कुरान की रोशनी में_*

_*जैसा कि आप सब जानते है की दौरे हाजिर मे बहुत से नये नये फितने जन्म ले रहे हैं और कुछ तो एेसे हैं जो हमारा ईमान का जनाज़ा तक निकाल दे रहे है, इन्हीं मे से एक फितना है जो सहाबिये रसूल ﷺ हज़रत सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह को माज़अल्लाह सुम्मा माज़अल्लाह जहन्नमी कहता है और उन पर तरह तरह के इल्ज़ाम लगा रहा है।*_

_*आज हम लोग हमारी बज़्मे नूरी टीम भोपाल की जानिब से एेसे लोगो को कुरआन व हदीसों की रोशनी में एेसे लोगो को मुँहतोड़ जवाब देंगे और आप सभी हज़रात हमारी टीम के लिए दुआ करें।*_

_*📖सवाल :- सहाबा किसे कहते है..?*_

_*✍🏻जवाब :- जिस मुसलमान ने हालते ईमान मे मुस्तफा जाने रहमत, मदीने वाले आका, ताजदारे अम्बिया, रसूलअकरम ﷺ का दीदार किया है और हालते ईमान मे ही दुनियाए फ़ानी से रुख्सत हुआ है एेसे शख्स को सहाबीये रसूलﷺ कहते है।*_

_*अल्लाह अपने मुकद्दस कलाम कुरआने मजीद फुर्काने हमीद मे इरशाद फरमाता है :-*_

 *رَضِیَ اللّٰہُ  عَنۡہُمۡ وَ رَضُوۡا عَنۡہُ ؕ*

*_📝तर्ज़ुमाए कंज़ुल ईमान :- अल्लाह उन से राज़ी हो गया और वोह अल्लाह से राज़ी_*

_*अब जो शख्स सहाबा की शान मे जर्रा बराबर भी गुस्ताख़ी करता हैं एेसा शख्स अहले सुन्नत व जमात से खारिज है और कुरआन शरीफ की आयत का भी मुन्किर है।*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 02)*_
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_*💡जैसा कि मैंने आप को पहले ही बता दिया हूँ कि हम जो भी बात अपनी पोस्ट में करेंगे उन सभी बातों का हवाला कुरान और हदीस की रोशनी मे आपके सामने पेश करेंगे।*_

_*जैसे राफ्जी (शिया) सहाबा के गुस्ताख हैं वैसे ही आज के सुलाहकुल्ली जो अपने आप को अहले सुन्नत (सुन्नी) कहते हैं [लेकिन इनका अहले सुन्नत से कोई ताल्लुक नहीं है] ये लोग भी राफ्जियत की जानिब बहुत तेजी के साथ अपना कदम बढ़ा चुके हैं और ये भी सहाबिये रसूल ﷺ हज़रत अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो अन्ह और हज़रत अबू सूफीयान عنهما الله رضى की शान मे बहुत सी गुस्ताख़ी करने लगे है, यही वजह है कि आज हमें इनका बायकॉट करना पड़ रहा है...!*_

_*"न तुम सदमे हमें देते, न हम फरियाद यूँ करते....*_
_*न खुलते राज़े सरबस्ता, न यूँ रुसवाईया होती"...*_

_*अब मैं सबसे पहले अपने मौज़ू का आगाज़ कुराने मजीद की चन्द आयतों के तर्जुमे के साथ करता हूं...*_

_*🕋अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त अपनी मुकद्दस किताब में हुजूर ﷺ के सच्चे साथी यानी सहाबा का ज़िक्र करते हुए यूँ फरमाता है :*_

_*📝तर्ज़ुमा अल कुरान : "मुहम्मद ﷺ अल्लाह के रसूल हैं और उनके साथ वाले (सहाबा) काफिरो पर सख्त हैं और आपस मे नर्म दिल, तू उन्हें देखेगा रुकु करते सज्दा मे गिरते हुए, अल्लाह का फ़ज़्ल और रिज़ा चाहते हुए, उनकी अलामत उनके चेहरों मे है सज्दो के निशान से, ये उनकी सिफात तौरात मे है और उनकी सिफात इन्जील मे"*_

_*📕 सूरह फ़तह, आयत नं. 29*_

_*और अब वो लोग जो किसी सहाबीये रसूल ﷺ ख़ुसुसन जो हज़रत अमीरे मुआविया व हज़रत अबू सूफियान عنهما الله رضى को हल्के लफ्ज़ो से याद करते है और उनकी शान मे ज़बानदराजी करते है वो अपनी खैर मनायें।*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 03)*_
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_*आज की पोस्ट भी मैं कुराने मुकद्दस की रोशनी मे आपके सामने हाजिर करने जा रहा हूं। आप सभी हज़रात आज की पोस्ट बगौर पढ़े और एेसे जाहिलो तक जरूर भेजिये जो सहाबिये रसूल ﷺ की शान में गुस्ताख़ी करते है।*_

_*🕋अल्लाह करीम अपने मुकद्दस कलाम कुराने मजीद वल फुर्काने हमीद में इरशाद फरमाता है :*_

_*तर्जुमा अल कुरान : उसने तुम को (सहाबा को) पसंद किया और तुम पर दीन मे कुछ तंगी न रखी कि तुम्हारे बाप इब्राहीम का दीन है, अल्लाह ने तुम्हारा नाम मुसलमान रखा है अगली किताबों में और इस कुरान मे भी, ताकि रसूल तुम पर गवाह हो और तुम लोगो की गवाही दो......*_

_*📕 सूरह हज्ज आयत नं. 78*_

_*ये आयते करीमा साफ साफ बता रही है कि अल्लाह पाक ने अपने रसूल ﷺ के साथ और सोहबत के लिए सहाबा को खुद चुना था, अब जिनका इन्तेख़ाब खुद हक तबारक व तआला ने फरमाया फिर उनकी अज़मत का अंदाजा कौन कर सकता है..?*_

_*🕋अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त का हम सुन्नी बरेलवियों और अहले सुन्नत के तमाम हक़ सिलसिलों पर बहुत बड़ा एहसान है कि हम मुहिब्बे अहले बैत और मुहिब्बे सहाबा है, अलहम्दुलिल्लाह अल्लाह ने हमें अपने उन चुनिंदा बंदो मे रखा है जिनके दिलों मे प्यारे आक़ा मुस्तफा जाने रहमत रसूलेआज़म ﷺ की और उनके जां निसारों की सच्ची पक्की मुहब्बत है, अल्लाह हम सब का खात्मा बिलखैर फरमाये।*_
_*आमीन या रब्बुल आलमीन*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 04)*_
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_*जैसा कि अब तक आप हज़रात ने पिछली 3 पोस्टों में पढ़ा ही होगा कि अल्लाह पाक ने सहाबा ए किराम के मर्तबे का ज़िक्र कुराने करीम में फरमाया है और उनसे भलाई का वादा फरमा लिया है,*_

_*लेकिन अब जो लोग सैय्यदना अमीरे मुआविया रदिअल्लाहो तआला अन्ह पर इतनी बेहुरमती से पेश आते हैं वो लोग बेशक अल्लाह के कलाम के खिलाफ बात करते हैं और हमें चाहिए कि हमें ऐसे लोगों से सलाम व कलाम दोनो चीजों से दूर रहना चाहिए।*_

_*अभी तक तो कुराने करीम के हवाले से बताया गया है कि सहाबा का मकाम व उनकी शान क्या है लेकिन वक्त कि कमी को देखते हुए अब मैं आगे कुछ हदीसों से भी बताता चलूंं कि मदीने वाले अाक़ा ﷺ अपने सहाबा के बारे में क्या फरमाते है.?*_

_*📚 हदीसे नबवी ﷺ :- हज़रत जाबिर रदिअल्लाहु तआला अन्ह से रिवायत है हुज़ूर ﷺ ने फरमाया :*_

*لا تمس النار مسلما رآنى او رآى من رآنى*

_*📝तर्जुमा : आग (जहन्नम की) उस मुसलमान को न छुयेगी जिसने मुझे देखा या मेरे देखने वालो (सहाबा ए किराम) को देखा।*_ _(सुभानअल्लाह)_

*📕 جامع الترمذي،،،،، جلد-2،،،، الصفحة- { 225}*

_*🕋अल्लाह अल्लाह यहाँ तो सिर्फ सहाबा की ही नहीं बल्कि ताबई बुर्ज़ुगों की शान इतनी बुलंद हो गई की उन्होंने सिर्फ सहाबा को देखा है तो उन पर जहन्नम की आग हराम हो गई, अब इससे हम और आप ये गुमान भी नहीं कर सकते हैं कि सहाबा ए किराम अजमईन का मर्तबा क्या होगा.?*_

_*इसीलिए बरेली से मेरे इमाम अहमद रज़ा ने फरमा दिया :*_

_*"जिस मुसलमां ने देखा उन्हें एक नज़र,*_
_*उस नज़र की बसारत पे लाखों सलाम.!*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 05)*_
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_*📚 हदीसे रसूल ﷺ :*_

*قال رسول الله صلى الله عليه وسلم الله الله فى اصحابى لا تتخذوهم غرضا من بعدى، فمن احبهم فحبى أحبهم ومن أبغضهم فببغضى أبغضهم ومن اذا هم فقد*
*آذانى ومن آذانى فقد اذى الله ومن اذالله فيوشك أن ياخذه*

_*📝तर्जुमा : प्यारे मुस्तफा जाने रहमत ﷺ इरशाद फरमाते हैं कि मेरे सहाबा के बारे मे अल्लाह से डरो और मेरे बाद उन्हें निशाना न बनाओ, जिसने उनसे मुहब्बत की उसने मुझसे मुहब्बत की और जिसने उनसे बुग्ज़ रखा उसने मुझसे बुग्ज़ रखा और जिसने उन्हें तकलीफ दी उसने मुझे तकलीफ दी और जिसने मुझे तकलीफ दी उसने अल्लाह को तकलीफ दी और जो अल्लाह को तकलीफ देगा करीब है कि अल्लाह पाक उसे अपनी गिरफ्त (अज़ाब) मे ले ले।*_

*📕 مشكوة المصابيح،،، الصفحة- {554}*

_(अल्लाहुअकबर)_

_*🕋अल्लाह रब्बुल इज़्ज़त हम सबको सहाबा ए किराम से मुहब्बत करने की तौफीक अता फरमाये और मज़हबे अहले सुन्नत (मसलके आला हज़रत) पर मर मिटने की तौफीक अता फरमाये।*_
_*🌹आमीन या रब्बुल आलमीन*_

_*बरेली शरीफ से हर वक्त ये सदा आती है :*_

*_अहले सुन्नत का है बेड़ा पार अस्हाबे हुज़ूर_*
*_नज़्म है और नाव है इतरत रसूलअल्लाह की ﷺ_*

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 06)*_
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_*📚 हदीसे रसूल ﷺ : हज़रत उमर फ़ारूके आज़म عنه الله رضى रिवायत करते हैं कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया :*_

*سألت ربى عن اختلاف أصحابى من بعدى فاوحى إلى يا محمد إن اصحابك عندى بمنزلة النجوم فى السماء بعضها أقوى من بعض ولكل نور فمن أخذ بشى مما*
*هم عليه من اختلافهم فهو عندى على هدى*

_*📝तर्जुमा : मैं ने अपने रब से अपने बाद सहाबा के इख्तेलाफ़ के बारे मे पूछा तो मुझे वही (अल्लाह की तरफ से कलाम) हुई कि ऐ मुहम्मद ﷺ तुम्हारे सारे अस्हाब मेरे नज़दीक आसमान के तारों की तरह हैं, रोशनी में अगरचे कम ज़ियादा हों मगर नूर और हिदायत हर एक में है, पास जिनके सहाबा के दरमियान के इख्तेलाफ़ मे जिसके मसले को इख्तियार की वो मेरे नज़दीक हिदायत पर है।*_

_*📕 مشكوة المصابيح،،، الصفحة- {554}*_

_*यानी सहाबा के इख्तेलाफ़ का ताल्लुक़ हक से है, इसलिए उनमें से किसी की भी इक्तेदा हिदायत ही है और इस हदीस से साबित हुआ अल्लाह के नज़दीक तमाम के तमाम सहाबा मक़बूल और मेहबूब हैं।*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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_*फैज़ाने सैय्यदना अमीरे मुआविया (पार्ट- 07)*_
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_*बहुत से लोग हमारी पोस्ट को पढ़कर ये सोचते होंगे कि हम लोगों ने ये हदीसें कहाँ से लाई है, और ये भी कि हमने तो कभी ये सब हदीसें किसी आलिम और मुफ्ती से भी नहीं सुनी और कुछ तो ऐसे भी होंगे जिनके दिमाग में ये दौड़ता होगा कि कहीं हमने ये सब हदीसें गढ़ तो नहीं दी?*_

_*👉🏻मैं ऐसे लोगों को जवाब देना चाहता हूँ कि जब तक आप लोग किताबों का मुताला नहीं करेंगे तब तक आपको ये सब फालतू बातें ही लगेंगी और हर बात आपको ज़रूरी नहीं है कि आलिम और मुफ्ती बतायेंगे बल्कि इल्मे दीन हर मुसलमान मर्द-औरत पर फर्ज़ है, हमें चाहिए कि हम जो अपना फालतू वक्त होटलों में, दुकानों में,  घरों में रहकर गुज़ारते है उसे हमें किसी आलिम के पास गुज़ारना चाहिए ताकि हम इल्मे दीन से करीब हो जाए और कोई आलिम आपके घर आकर आपको नही समझाएगा बल्कि आप में खुद इल्मे दीन सीखने उनके पास जाना होगा और जज़्बा होना चाहिए सीखने का न कि अपने मतलब के लिए हो।*_

_*📚 हदीस शरीफ :*_

*عن ابن عمر قال رسول الله صلى الله عليه وسلم إذا رأيتم الذين يسبون أصحابى فقولوا لعنة الله على شركم*

_*📝तर्जुमा: हज़रत इब्ने उमर कहते हैं कि अल्लाह के रसूल ﷺ ने फरमाया, "जब तुम उन लोगों को देखो जो मेरे सहाबा के बारे मे बुरा भला कह रहे हैं तो (उनसे) कहो तुम पर अल्लाह की लानत हो।"*_

_*📕  الجامع الترمذي،،، جلد-2،،، الصفحة- { 225}*_

_*❌तमाम दुश्मने सहाबा बिलखुसुस राफ्जी, गैर मुक़ल्लिदीन और अजमेर शरीफ के वो मुजावर जो सहाबा के गुस्ताख़ है उन सब पर अल्लाह की लानत हो।*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
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Al Waziftul Karima 👇🏻👇🏻👇🏻 https://drive.google.com/file/d/1NeA-5FJcBIAjXdTqQB143zIWBbiNDy_e/view?usp=drivesdk 100 Waliye ke wazai...