Sunday, February 17, 2019



      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 16)*_
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_*🌹हुज़ुर अमीने शरीअ़त अलैहिर्रहमा के मज़ामीन का एक हसीन गुलदस्ता..!*_

_*हज व ज्यारत : हुज़ुर अमीने शरीअ़त ने छ: (6) मरतबा हज व ज्यारते हरमैन शरीफैन से सरफराज़ हुए.!*_

_*शेरो-शायरी : आप एक बेहतरीन शायर थे.! आपकी शायरी इख़लासो मोहब्बत और इश्के रसुल मे डुबी हुई होती, आपको शेरो शायरी से काफी लगाव था और क्यो न हो.?*_

_*आपको शायरी अपने जद्दे करीम हज़रत उस्ताजे जमन अल्लामा हसन रज़ा खां और उनके बिरादर इमाम अहमद रज़ा खां आलाहज़रत अलैहीर्रहमा से विरासत मे मिली थी आप तख़ल्लुस सिब्तैन फरमाते थे.!*_

_*तबलीगे दीन मे मसरुफीयत की वजह से आपने बहुत कम शायरी की लेकीन जो भी कहा बहुत खुब कहा..!*_

*📕 مضامین امین شریعت*

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮जारी रहेगा......*_
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      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 17)*_
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_*🌹हुज़ुर अमीने शरीअ़त अलैहिर्रहमा के मज़ामीन का एक हसीन गुलदस्ता..!*_

_*दर्स व तदरीस : हुज़ुर अमीने शरीअ़त दीनी उलुम से आरास्ता होने के बाद आपने दारुल उलुम मजहरे इस्लाम बरेली शरीफ मे तदरीसी खिदमात भी अंजाम दी.!*_

_*सन् 1958 मे आप नागपुर तशरीफ ले आए और जामए अरबीया इस्लामीया के नाज़ीमे आला मुकर्रर किए गए और तीन साल तक इस ओहदे पर काएम रहे.!*_

_*बहैसीयते नाज़ीमे आला आप मजलीसे शोअरा के रुक्न भी रहे अराकिने मजलीसे शोअरा आपकी खुद्दार सलाहीयत व ज़हानत से बड़े मुतासीर रहे और आपके मशवरे को कद्र की नज़र से देखते.!*_

_*इस दोरान आपने जिस खुलुसो मोहब्बत और उस जज़्बए खिदमत से अपने फराएज़ अंजाम दिए जो नाकाबीले फरामोश है.!*_

_*सन् 1963 मे हुज़ुर अमीने शरीअत कांकेर छत्तीसगढ़ तशरीफ लाए...*_

*📕 مضامین امین شریعت*

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮जारी रहेगा......*_
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      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 18)*_
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_*🌹हुज़ुर अमीने शरीअ़त अलैहिर्रहमा : के मज़ामीन का एक हसीन गुलदस्ता..!*_

_*दर्स व तदरीस : सन् 1963 मे हुज़ुर अमीने शरीअत कांकेर छत्तीसगढ़ तशरीफ लाए और जब आपने शहरे कांकेर का नज़ारा किया तो हज़रत ने फरमाया ये तो वही है जिसे मैने आलमे ख्वाब मे देखा है.!*_

_*के जब आप बरेली शरीफ मे थे तो आपने ख्वाब मे देखा के एक नदी (जिसे दुध नदी कहा जाता है) जिसमे आगे-आगे हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द है उनके पिछे मुफ्ती अब्दुल रशीद फतेहपुरी अलैहीर्रहमा और उनके पिछे-पिछे हुज़ुर अमीने शरीअत चल रहे थे.!*_

_*कुछ रोज आप कांकेर मे रहे और फिर वहां के लोगो के इसरार पर मुस्तकील आप वहीं रहने लगे...*_

*📕 مضامین امین شریعت*

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮जारी रहेगा......*_
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      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 19)*_
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_*🌹हुज़ुर अमीने शरीअ़त अलैहिर्रहमा के मज़ामीन का एक हसीन गुलदस्ता..!*_

_*दर्स व तदरीस : जिस जमाने मे हुज़ुर अमीने शरीअत कांकेर छत्तीसगढ़ तशरीफ लाए उस वक्त पुरी मुस्लीम अाबादी जहालत मे डुबी हुई थी.! आपने इस माहौल मे भी पुरे इस्तेक़ामत के साथ रज़ाए इलाही पर कायम रहते हुए इल्मो मारफत शम्आ रौशन की.!*_

_*आपने छत्तीसगढ़ और हिन्दुस्तान के अकसर इलाको का दौरा फरमाया जिधर गुजर जाते आबादीयां टुट पड़ती, आशीकों का हुजुम लग जाया करता..!*_

_*हुकुमत कि तारीक और घिनौनी फिज़ाओ ने बारहा आंखे दिखाई.!*_

_*लेकीन आपकी जबीनै अकदस पर किसी भी वक्त शिकन न आयी.!*_

_*आपने खुदा के भटके हुए भटके बन्दो को माअबुदे हकीकी "अल्लाह" कि वहदानियत व मारेफत कि तरफ बुलाया.! जिसकी वजह से आपको न जाने किन किन अज़ीयतों और तकलीफो का सामना करना पड़ा.!*_

_*आपने मुआसरे को आमाले हुसना की तरफ रग़बत दिलाने के लिये अपनी जिन्दगी वक्फ कर दी.!*_

*📕 مضامین امین شریعت*

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮जारी रहेगा......*_
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      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 20)*_
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_*🌹हुज़ुर अमीने शरीअ़त अलैहिर्रहमा के मज़ामीन का एक हसीन गुलदस्ता..!*_

_*दर्स व तदरीस : मुखालेफिन ने हुज़ुर अमीने शरीअत के उपर जुल्मो सितम के पहाड़ तोड़े लेकीन आप अज़मते इस्लाम और नामुसे रिसालत कि हिफाजत और शरीअत की पासदारी करते रहे.!*_

_*इसी वजह से दुनीया आपको अमीने शरीअत के नाम से जानती है.! आपने छत्तीसगढ़ के मुसलमानो के इमान व अकीदे की हिफज़त करके एहसाने अज़ीम फरमाया.!*_

_*इमान से ज्यादा एक मुसलमान के लिये किमती सरमाया कोई दुसरी शय नही हो सकती.!*_

_*इमान के बगैर अंधेरा ही अंधेरा है इमान हुज़ुर की मोहब्बत व उलफत और ताज़ीमो तौकीर का नाम है.!*_

_*"खुद प्यारे आका सलल्लाहो अलैह वसल्लम फरमाते हैं :*_

_*तुम मे कोई शख्स मुसलमान नही हो सकता जब तक मै उसके मां-बाप, औलाद और तमाम लोगो से ज्यादा प्यारा न हो जाऊं.!"*_

*📕 مضامین امین شریعت*

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮जारी रहेगा......*_
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      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 21)*_
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_*🌹हुज़ुर अमीने शरीअ़त अलैहिर्रहमा : के मज़ामीन का एक हसीन गुलदस्ता..!*_

_*मोहब्बत का आलम : हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द,  हुज़ुर अमीने शरीअत से बेपनाह मोहब्बत फरमाते थे.!*_

_*हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द का आपसे मोहब्बत इस वाकये से पता चलता है की हुज़ुर अमीने शरीअत का बचपन का जमाना था एक मरतबा ईद की नमाज़ पढ़ाने के लिये हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द ने आपको अपने साथ ईदगाह ले गए चलते वक्त हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द ने फरमाया के :*_

_*घर से एक अमामा ले लो आपने हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द का ही अमामा ले लिया और साथ चले गए ईदगाह पहुचे और जब नमाज़ का वक्त करीब आया तो फरमाया खड़े हो जाओ हुज़ुर अमीने शरीत खड़े हो गए.!*_

_*फिर हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द भी खड़े हुए तो सारा मजमा खड़ा हो गया फिर हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द आपके सर पर अमामा बांधने लगे.!*_

_*उसी दौरान मजमे से एक साहब ने हज़रत से दरयाफ्त किया की ये कौन है..?*_

_*तो हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द ने फरमाया क्या आप नही जानते ये मेरा बच्चा है फिर आपके वालीद का नाम लेकर फरमाया ये उनका लड़का है.!*_

_*हुज़ुर अमीने शरीअत को सनद व खिलाफत अता फरमाते वक्त भी आपका नाम लिखने से पहले हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द अलैहीर्रहमा ने अपने दस्ते करम से [الولد العزیز] लिखा जिसका माना है "प्यारा बच्चा",*_

*📕 مضامین امین شریعت*

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮जारी रहेगा......*_
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      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 22)*_
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_*🌹हुज़ुर अमीने शरीअ़त अलैहिर्रहमा के मज़ामीन का एक हसीन गुलदस्ता..!*_

_**मोहब्बत का आलम : हुज़ुर अमीने शरीअत भी हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द से बेपनाह मोहब्बत फरमाते थे.!*_

_*यही वजह थी की जब भी आपकी बारगाह मे हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द का तज़किरह होता तो आपकी आंखे अस्कबार हो जाती.!*_

_*जब हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म हिन्द अलैहिर्रहमा हज्जे बैतुल्लाह के लिये तशरीफ ले गए और ज्यारते हरमैन शरीफैन से मुशर्रफ होकर बखैर हिन्दुस्तान तशरीफ लाए तो उस मौके पर हुज़ुर अमीने शरीअत अलैहिर्रहमा ने ये मनकबत के अशआर लिखे थे.! जो निचे है..*_

*📚مضامین امین شریعت*

_*मुबारक रुखसत हो के मुस्तफा से मुस्तफा आये.!*_
_*खुदा का शुक्र है क़ाबे से मेहमाने खुदा आये.!!*_

_*अदाए फर्ज करके फिर गए क़ाबे के क़ाबा को.!*_
_*वंहा से दौलते कौनैन लेकर मरहबा आए.!!*_

_*ये कैसी रहमतों की बदलीयां छाई जमाने पर.!*_
_*ज्यारत करके शायद मुस्तफा की मुस्तफा आए.!!*_

_*मसर्रत ही मसर्रत हो रही है अहले सुन्नत को.!*_
_*अदाए फर्ज करके आज उनके पेशवा आए.!!*_

_*मुझे मुश्कील है एै आका, पहुंचना दस्ते तैबा मे.!*_
_*जो तुम चाहो तो एै मौला ये सिब्तैन रज़ा आए.!!*_

_*✍🏻हुज़ुर अमीने शरीअत अल्लामा सिब्तैन रज़ा खां अलैहिर्रहमा.*_

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮पोस्ट खत्म......*_
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Al Waziftul Karima 👇🏻👇🏻👇🏻 https://drive.google.com/file/d/1NeA-5FJcBIAjXdTqQB143zIWBbiNDy_e/view?usp=drivesdk 100 Waliye ke wazai...