Monday, August 26, 2019



  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 01 (पोस्ट न. 004)*_
―――――――――――――――――――――

_*☝🏻अक़ीदा - जिस तरह अल्लाह तआला की ज़ात क़दीम, अज़ली व अबदी है उसी तरह उसकी सिफ़तें भी क़दीम, अज़ली और अबदी है !*_

_*☝🏻अक़ीदा - अल्लाह की कोई सिफ़त मख़लूक़ नही न ज़ेरे क़ुदरत दाख़िल !*_

_*☝🏻अक़ीदा - अल्लाह की जात और सिफ़ात के अलावा सब चीजें हादिस यानी पहले न थीं अब मौजूद हैं !*_

_*☝🏻अक़ीदा - जो अल्लाह की सिफ़तों को मख़लूक़ कहे य्या हादिस बताये व ग़ुमराह और बद्दीन है !*_

_*☝🏻अक़ीदा - जो आलम में से कोई चीज़ को ख़ुद से मौजूद माने या उसके हादिस होने में शक़ करे वह क़ाफ़िर है !*_

_*☝🏻अक़ीदा - अल्लाह तआला न किसी का बाप है न किसी का बेटा और न उसके लिए कोई बीवी ! यदि कोई अल्लाहः के लिये बाप, बेटा, या जोरू(बीवी) बताये वह भी क़ाफ़िर है ! बल्कि जो मुमकिन भी बताए वह गुमराह बद्दीन है !*_

_*📕 बहारे शरीअत, हिस्सा 1, सफा 6-7*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 01 (पोस्ट न. 003)*_
―――――――――――――――――――――

_*👉🏻इसी सिलसिले में दूसरी बात यह भी ध्यान रखने की है कि अल्लाह की सिफ़तें कई हैं और अलग हैं और हर सिफ़त का मतलब भी अलग अलग है ! मूतरादीफैन नही, इसलिए सिफ़तें एने ज़ात नही हो सकती और सिफ़तें ग़ैर ज़ात इसलिए नही है कि ग़ैर ज़ात मानने की सूरत मद दो बातें ही सकती हैं ! या तो सिफ़तें क़दीम होंगी या हादिस (जो किसी के पैदा करने से पैदा हुई यानी मख़लूक़) अगर क़दीम मानते हैं तो कई एक क़दीम को मानना पड़ेगा जबकि क़दीम एक ही है ! और अगर हादिस तसलीम करतें हैं तो यह मानना भी जरूरी होगा वह क़दीम ज़ात सिफ़तों के हादिस होने या पैदा होने से पहले बगैर सिफ़तों के थी और यह दोनों बातें बातिल हैं !*_

_*इसलिए इन मुश्किलों से बचने के लिए अहले सुन्नत ने वह मज़हब इख्तियार किया कि सिफ़ाते बारी (अल्लाह तआला की सिफ़तें) न तो एन जात हैं और न ग़ैर ज़ात बल्कि सिफ़तें उस जाते मुक़द्दस को लाज़िम हैं किसी हाल में उससे जुदा नही और जाते बारी तआला अपनी हर सिफ़त के साथ अज़ली, अबदी, और क़दीम है !*_

_*📕 बहारे शरीअत, हिस्सा 1, सफा 6*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 01 (पोस्ट न. 002)*_
―――――――――――――――――――――

_*“अक़ाइद का बयान”*_

_*🕋अल्लाह तआला की ज़ात और उसकी सिफ़तों के बारे में अक़ीदे*_

_*अक़ीदा : अल्लाह कि ज़ात का इदराक अक़्ल के ज़रिए मुहाल है यानी अक़्ल से उसकी ज़ात को समझना मुमकिन नही  क्योंकि जो चीज़ अक़्ल के ज़रिए समझ मे आती है अक़्ल उसको अपने घेरे में ले लेती है ! और अल्लाह की शान ये है कि कोई चीज़ उसकी ज़ात को घेर नही सकती ! अलबत्ता अल्लाह के कामों के ज़रिए से मुख़्तसर तौर पर उसकी सिफ़तों और फिर उन सिफ़तों के ज़रिए अल्लाह तआला की ज़ात पहचानी जाती है !*_

_*अक़ीदा : अल्लाह तआला की सिफ़तें न एन हैं न ग़ैर यानी अल्लाह तआला की सिफ़तें उसकी ज़ात नही न वह सिफ़तें किसी तरह उसकी ज़ात से अलग हो सकें क्योंकि वह सिफ़तें ऐसी हैं जो अल्लाह की ज़ात को चाहती हैं और उसकी ज़ात के लिए ज़रूरी है !*_

_*📕 बहारे शरीअत, हिस्सा 1, सफा 6*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


  _*बहारे शरीअत, हिस्सा- 01 (पोस्ट न. 001)*_
―――――――――――――――――――――

_*“अक़ाइद का बयान”*_

_*🕋अल्लाह तआला की ज़ात और उसकी सिफ़तों के बारे में अक़ीदे*_

_*अल्लाह एक है कोई उसका शरीक़ नही न जात में न सिफ़ात में न अफ़आल (कामों) में न अहकाम (हुक़्म देने) में न नामों में ! वह “वाजिबुल वजूद” है यानी (जिसका हर हाल में मौजूद रहना जरूरी हो) उसका अदम मुहाल है यानी किसी ज़माने में उसकी जात मौजूद न हो नामुमकिन है ! अल्लाह “क़दीम” और “अज़ली” है यानी हमेशा से है और “अबदी” भी है यानी वह हमेशा रहेगा उसे कभी मौत न आएगी ! अल्लाह तआला ही इस लायक है कि उसकी बन्दगी और इबादत की जाए !*_

_*अक़ीदा : अल्लाह तआला बेपरवाह है किसी का मोहताज नही और सारी दुनिया उसी की मोहताज है !*_

_*📕 बहारे शरीअत, हिस्सा 1, सफा 6*_

_*📮जारी रहेगा.....*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

Sunday, February 17, 2019



      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 01)*_
―――――――――――――――――――――

_*👉🏻आज से तक़रीबन 54 साल पहले सन् 1963 मे एक मर्दे मुजाहिद, हुज़ुर मुफ्तीए आज़म हिन्द के हुक्म से सरजमीने छत्तीसगढ़ पर आता है और फिर लगातार अपनी शब वो रोज़ की कोशीशों से एक तारीख बनाता है। लबों पर इल्मी मुस्कुराहट, चेहरे पर फारूक़ी जलाल और आँखों में रौशनीए ताबनाक मुस्तक़्बिल चमक और क़ल्बो ज़िगर में क़ौमी सरफर लिये कांकेर की सरजमीन पर क़दम रखता है और देखते ही देखते एक नई तारीख जन्म लेने लगती है।*_

_*और फिर उस की शब वो रोज़ की मेहनत, लगातार जद्दो जेहद और दिन रात की सई-ए-मुसलसल से हर तरफ इश्क़े रसूल की बादे बहारी रस्क करने लगती है, इल्म का उजाला फैलने लगता है..!*_

_*हज़रत सिब्तैन रज़ा खां हुज़ुर अमीने शरीअत अलैहिर्रहमा अपने मक़सद पर नज़र लगाए, फूलों की तरह, मुस्कूराते, कांटों से उलझते और मुश्किलात से खेलते मंज़िले मक़सूद की तरफ बढते रहे।*_

_*यहां तक की एक दिन ज़िंदगी का पैमाना लबरेज़ हो गया, मौत के पैग़ाम ने आप को दाएमी ज़िंदगी से जोड दिया..!*_

_*मगर जो इल्म वो इरफान का चिराग जला था वो मुसलसल हवाओं की ज़द पर जलता रहा। शहज़ादे हुज़ुर अमीने शरीअत हज़रत सलमान रज़ा ने आप के मिशन को नया रूप देकर "तहरीक-ए-अमीने शरीअत" की बुनियाद डाल कर मिल्लत की तरक़्की व खुशहाली के लिये एक ठोस मंसूबा तैय्यार किया  "तहरीक-ए-अमीने शरीअत" की शक्लो सूरत में दीन व सुन्नियत का एक मज़बूत मिशन घरों घर पहूंच रहा है..!*_

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮जारी रहेगा......*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 02)*_
―――――――――――――――――――――

_*🌹हुज़ुर अमीने शरीअ़त अलैहिर्रहमा के मज़ामीन का एक हसीन गुलदस्ता..!*_

_*तह़रीक : तहरीक का माना मुहीम (अभीयान) होता है..!!*_

_*आसान लफ़्ज़ों मे ऐसा कोई फेअ़ल या काम जिससे किसी मकसद को बढ़ावा मिलता हो..! या किसी काम को आगे बढ़ाना मुहीम कहलाता है..!*_

_*अमीने शरीअत : यानी के शरीअत का अमीन, और अमीन का माना होता है अमानत की हिफाज़त करने वाला ! और अमीने शरीअत वो है जिसने शरीयत जैसी अज़ीम अमानत की हिफाज़त की है !*_

_*हुज़ुर मुफ्ती-ए-आज़म मुस्तफा रज़ा खां ने जब हज़रते सिब्तै़न  को शरीयत जैसी अज़ीम अमानत सौंप कर सुबा ए छत्तीसगढ़ की सरज़मीन पर भेजा तो उन्होने क्या ही खुब उस अमानत की हिफाज़त की और आलमे इस्लाम मे अमीने शरीअत बनकर जगमगाए हैं..!*_

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮जारी रहेगा......*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━


      _*तहरीक-ए-अमीने शरीअत (पार्ट- 03)*_
―――――――――――――――――――――

_*🌹हुज़ुर अमीने शरीअ़त अलैहिर्रहमा के मज़ामीन का एक हसीन गुलदस्ता..!*_

_*शहजादए आला हज़रत हुज़ुर मुफ्तीए आज़म मुस्तफा रज़ा खां जिनके सायए करम रहकर हुज़ुर अमीने शरीअत उलुमे दीनीया से आरास्ता हुए.!*_

_*जिसकी बरकतों ने हुज़ुर अमीने शरीअत को अपना हमशबीह बना दिया और इनकी मोहब्बत का ये आलम के ख़िलाफत अता फरमाते वक्त [الولد العزیز] यानी प्यारा बच्चा जैसे प्यारे लकब से नवाज़ा..!*_

_*तकरीर व तहरीर तबलीग़ के दो बेहतरीन जरीये हैं..। हमारे असलाफे किराम ने दोनो को बरता है.. किसी ने तकरीर के जरीये तबलीग़ी फराएज़ अंजाम दिया तो किसी ने तहरीर के जरीए..*_

_*हुज़ुर अमीने शरीअत उन बुजुर्गों मे से एक हैं जिन्होने तकरीर व तहरीर दोनो मैदान मे घोड़े दौड़ाए हैं.. जहां आपकी तकरीर से हजारों ग़म गुस्तगाने राह, राह पर आये वहीं आपकी तहरीर ने रुशदो हिदायत के कितने ही गुल-बुटे खिलाए हैं..!*_

_*✍🏻मुहम्मद जुनैद रज़ा अज़हरी*_

_*📮जारी रहेगा......*_
━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━━

Al Waziftul Karima 👇🏻👇🏻👇🏻 https://drive.google.com/file/d/1NeA-5FJcBIAjXdTqQB143zIWBbiNDy_e/view?usp=drivesdk 100 Waliye ke wazai...